सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में मणिपुर हिंसा के आरोपी की जमानत रद्द करने की याचिका दायर की
सारांश
Key Takeaways
- सीबीआई ने मणिपुर हिंसा के आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग की।
- यह मामला महिलाओं के खिलाफ हिंसा से संबंधित है।
- सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया।
- पीड़ितों के लिए न्याय की संभावना बनी हुई है।
- यह मामला न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता का परीक्षण है।
नई दिल्ली, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मणिपुर में हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से सुनवाई शुरू हो गई है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोपी अरुण खुंदोंगबाम उर्फ नानाओ को दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की है।
यह मामला मई २०२३ में हुई मणिपुर जातीय हिंसा से संबंधित है, जहां एक भीड़ ने तीन महिलाओं को निर्वस्त्र कर उन्हें घुमाया था। महिलाओं के साथ गैंगरेप की घटनाएं भी हुई थीं। सीबीआई ने अदालत को बताया कि यह एक अत्यंत गंभीर अपराध है। आरोपी इस घटना में संलिप्त था, जिसमें महिलाओं का अपमान किया गया और उनके साथ हिंसा की गई।
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पिछले साल सितंबर में इस आरोपी सहित दो लोगों को जमानत दी थी। अब सीबीआई ने इस जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध में जमानत नहीं मिलनी चाहिए।
पीड़ित पक्ष की ओर से प्रमुख वकील निजाम पाशा ने अदालत में कहा कि वे पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अगर आवश्यक हो, तो अदालत पीड़ितों के लिए कानूनी सहायता परिषद नियुक्त कर सकती है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की याचिका पर सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने आरोपी और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई तब होगी जब सभी पक्षों के जवाब प्राप्त हो जाएंगे।
यह घटना मणिपुर की जातीय हिंसा के कई मामलों में से एक है, जिनकी जांच सीबीआई कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इन मामलों की सुनवाई गुवाहाटी में विशेष सीबीआई अदालत में स्थानांतरित कर दी थी, ताकि पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और निष्पक्ष सुनवाई हो सके।
इस मामले में आरोपी पर दंगे भड़काने, महिलाओं की इज्जत लूटने, गैंगरेप और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार कानून के तहत भी आरोप लगाए गए हैं। सीबीआई का कहना है कि सबूतों के आधार पर आरोपी को जमानत नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि यह महिलाओं के खिलाफ हिंसा का गंभीर मामला है।
पीड़ित परिवारों और समाज में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। कई संगठनों ने न्याय की मांग की थी। अब सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका लंबित है। निर्णय आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपी को जमानत मिलेगी या नहीं।
यह मामला पूरे देश का ध्यान आकर्षित कर रहा है, क्योंकि इसमें महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता शामिल है। सीबीआई की कोशिश है कि सभी दोषियों को सजा मिले और पीड़ितों को न्याय प्राप्त हो।