क्या तिरुपरंकुंद्रम दीपथून विवाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया?

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क्या तिरुपरंकुंद्रम दीपथून विवाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया?

सारांश

क्या तिरुपरंकुंद्रम दीपथून विवाद ने सुप्रीम कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया है? सुनवाई में केंद्र सरकार और एएसआई से जवाब मांगा गया है। जानें इस मामले के बारे में विस्तार से।

Key Takeaways

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और एएसआई से जवाब मांगा है।
  • हिंदू धर्म परिषद ने याचिका दायर की है।
  • धार्मिक परंपराओं का संरक्षण आवश्यक है।
  • मद्रास हाई कोर्ट का फैसला भक्तों के पक्ष में था।
  • तिरुपरंकुंद्रम का धार्मिक महत्व है।

नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के मदुरै जिले में तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित दरगाह के पास 'दीपथून' (दीप स्तंभ) पर कार्तिकई दीपम जलाने को लेकर चल रहे विवाद में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से जवाब मांगा है।

यह मामला हिंदू धर्म परिषद द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें संस्था ने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में तिरुपरंकुंद्रम मंदिर और इससे जुड़े धार्मिक अधिकारों को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें की गई हैं।

इससे पहले, जनवरी में ही मद्रास हाई कोर्ट ने भक्तों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कार्तिकई दीपम के अवसर पर दीप जलाने की अनुमति दी थी। इस फैसले से क्षेत्र के धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़े लोगों ने संतोष व्यक्त किया। बाद में, मद्रास हाई कोर्ट की दो जजों की खंडपीठ ने भी सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें दीप जलाने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

इन सब के बीच, सुप्रीम कोर्ट में हिंदू धर्म परिषद की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि एएसआई को तिरुपरंकुंद्रम मंदिर का अधिग्रहण करने का निर्देश दिया जाए। इसके अतिरिक्त, मंदिर परिसर में रोज़ाना 24 घंटे दीपक जलाए रखने का आदेश पारित करने की भी मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि तिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी और दीपथून से जुड़ी परंपराएं प्राचीन धार्मिक आस्था का हिस्सा हैं और इन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और एएसआई से जवाब मांगा है।

ज्ञात रहे कि इस मामले में 6 जनवरी को मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने एक पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए निर्देश दिया था कि तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी की चोटी पर पारंपरिक कार्तिगई दीपम जलाया जाए। बेंच ने तमिलनाडु सरकार और मंदिर प्रशासन द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया था। यह फैसला जस्टिस जी जयचंद्रन और केके रामकृष्णन की डिवीजन बेंच ने सुनाया था, जिसने सिंगल जज जी.आर. स्वामीनाथन द्वारा पारित आदेश की पुष्टि की।

यह विवाद मदुरै के पास एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थल तिरुपरनकुंद्रम में पहाड़ी की चोटी पर कार्तिगई दीपक जलाने की अनुमति मांगने वाली एक याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि दीपक जलाना मंदिर और कार्तिगई दीपम समारोहों से जुड़ी एक पुरानी धार्मिक प्रथा है, और इस प्रथा का ऐतिहासिक समर्थन है।

Point of View

जो देश की सांस्कृतिक विविधता की पहचान है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
NationPress
23/01/2026

Frequently Asked Questions

दीपथून विवाद क्या है?
यह विवाद तिरुपरंकुंद्रम में दीप जलाने की अनुमति को लेकर है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की है।
हिंदू धर्म परिषद ने सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिका दायर की है?
हिंदू धर्म परिषद ने तिरुपरंकुंद्रम मंदिर के अधिग्रहण और दीप जलाने की अनुमति की मांग की है।
मद्रास हाई कोर्ट का फैसला क्या था?
मद्रास हाई कोर्ट ने भक्तों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए दीप जलाने की अनुमति दी थी।
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