सरगुजा में NEET-JEE की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग: 35 सरकारी स्कूलों के छात्रों को मिलेगा समान अवसर
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला राज्य का पहला जिला बनने जा रहा है जहाँ सरकारी विद्यालयों के छात्रों को NEET और JEE की तैयारी के लिए निःशुल्क लाइव ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी। यह पहल 17 अक्टूबर 2026 को औपचारिक रूप से शुरू होगी और जिले के 35 सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के होनहार छात्रों को लक्षित करती है।
पहल की रूपरेखा और वित्त पोषण
इस कार्यक्रम को स्कूल शिक्षा विभाग के सहयोग से डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड के माध्यम से संचालित किया जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक से पाँच सरकारी स्कूलों का चयन किया गया है, जहाँ एक साथ लाइव ऑनलाइन कक्षाएँ संचालित की जाएंगी। इससे छात्रों को बड़े शैक्षणिक केंद्रों में जाने अथवा निजी कोचिंग संस्थानों की भारी फीस चुकाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
पहल का औपचारिक शुभारंभ पर्यटन, संस्कृति, धर्मस्व एवं धार्मिक न्यास मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा अंबिकापुर कलेक्ट्रेट के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित एक कार्यक्रम में किया जाएगा।
सरगुजा की शैक्षणिक चुनौती
सरगुजा में आदिवासी आबादी का बड़ा हिस्सा है और यहाँ शैक्षणिक प्रतिभा की कमी नहीं, लेकिन संसाधनों और विशेषीकृत कोचिंग तक पहुँच के अभाव में अनेक होनहार छात्र अपने सपने पूरे नहीं कर पाते। निजी कोचिंग की ऊँची फीस और दूरदराज़ के इलाकों से बड़े शहरों तक आने-जाने का खर्च, NEET और JEE की तैयारी को आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए दुर्गम बना देता था।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग पर होने वाले खर्च को लेकर सामाजिक असमानता की चिंताएँ लगातार उठती रही हैं। गौरतलब है कि कोटा जैसे बड़े कोचिंग हब में पढ़ाई का खर्च सालाना कई लाख रुपये तक पहुँच जाता है, जो ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों की पहुँच से बाहर है।
कलेक्टर की दृष्टि और क्रियान्वयन योजना
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत के अनुसार यह कार्यक्रम छात्रों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के अवसर काफी बढ़ा सकता है और उन्हें उन अभ्यर्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाएगा जिनकी पहुँच महँगी कोचिंग सुविधाओं तक है। उन्होंने बताया कि 35 स्कूलों से चुने गए छात्रों के एक समूह को कोचिंग के लिए रायपुर भी भेजा जाएगा।
लाइव ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से जिलेभर के विद्यालयों को एक साझा शिक्षण मंच पर जोड़ा जाएगा, ताकि पाठ्यक्रम और शिक्षण गुणवत्ता में एकरूपता बनी रहे।
आम जनता और छात्रों पर असर
इस पहल से सबसे अधिक लाभ सरगुजा के आदिवासी एवं दूरदराज़ के क्षेत्रों के उन छात्रों को मिलेगा जो डॉक्टर या इंजीनियर बनने का सपना तो देखते हैं, लेकिन आर्थिक बाधाएँ उनके रास्ते में खड़ी हो जाती थीं। DMF फंड का उपयोग खनिज संसाधनों से प्रभावित समुदायों के विकास के लिए किया जाता है, और शिक्षा में इसके निवेश को सामाजिक न्याय की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
आगे की राह: राज्य के लिए मॉडल
यदि यह कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू होता है, तो यह पहल छत्तीसगढ़ के उन अन्य जिलों के लिए एक प्रतिरूप (मॉडल) बन सकती है जहाँ आदिवासी और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों की बड़ी आबादी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम की पहुँच और DMF जैसे स्थानीय संसाधनों के रचनात्मक उपयोग से शिक्षा में क्षेत्रीय असमानता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।