2 नवंबर 2026
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डोडा में भारतीय सेना की पहल: 60 वंचित छात्रों को सैनिक स्कूल प्रवेश के लिए 8 सप्ताह की मुफ्त कोचिंग

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डोडा में भारतीय सेना की पहल: 60 वंचित छात्रों को सैनिक स्कूल प्रवेश के लिए 8 सप्ताह की मुफ्त कोचिंग

सारांश

डोडा के दूरदराज इलाकों के 60 मेधावी छात्रों के लिए भारतीय सेना ने एक अनोखी उम्मीद जगाई है — 8 हफ्ते की मुफ्त कोचिंग, जो उन्हें सैनिक स्कूल के दरवाज़े तक पहुँचा सकती है। यह पहल बताती है कि वर्दी की भूमिका सीमा से आगे भी होती है।

मुख्य बातें

भारतीय सेना की असम राइफल्स यूनिट ने 2 नवंबर 2026 को डोडा, जम्मू-कश्मीर में 8 सप्ताह की निःशुल्क कोचिंग शुरू की।
यह कार्यक्रम ऑपरेशन सद्भावना के तहत ऑल इंडिया सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए आयोजित है।
प्रारंभिक स्क्रीनिंग टेस्ट के ज़रिए डोडा के विभिन्न स्कूलों से 60 मेधावी छात्र चुने गए।
पढ़ाने के लिए पश्चिम बंगाल से विशेष रूप से अनुभवी शिक्षक बुलाए गए हैं।
कार्यक्रम का उद्घाटन 9 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडर ब्रिगेडियर विक्रांत एस.

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के थलीला में तैनात भारतीय सेना की असम राइफल्स यूनिट ने 2 नवंबर 2026 को ऑपरेशन सद्भावना के तहत ऑल इंडिया सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए 8 सप्ताह का निःशुल्क कोचिंग कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम में डोडा के सरकारी और निजी स्कूलों से प्रारंभिक स्क्रीनिंग टेस्ट के ज़रिए चुने गए 60 मेधावी छात्र भाग ले रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन 9 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडर ब्रिगेडियर विक्रांत एस. एस. शिंदे ने थलीला गांव स्थित असम राइफल्स के बटालियन मुख्यालय में किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।

ब्रिगेडियर शिंदे ने बताया कि डोडा जिले के विभिन्न विद्यालयों में पहले एक प्रारंभिक स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित किया गया था, जिसके आधार पर 60 छात्रों का चयन हुआ। अब इन चयनित विद्यार्थियों को पश्चिम बंगाल से विशेष रूप से बुलाए गए अनुभवी शिक्षकों द्वारा परीक्षा पैटर्न, सिलेबस और तैयारी की रणनीति का विस्तृत मार्गदर्शन दिया जाएगा।

सेना का उद्देश्य

सेना की इस पहल का मूल लक्ष्य दूरदराज के इलाकों में रहने वाले प्रतिभाशाली लेकिन संसाधन-वंचित छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में समान अवसर दिलाना है। गौरतलब है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर प्रतिभा की कमी नहीं होती, बल्कि सही मार्गदर्शन और कोचिंग सुविधाओं का अभाव इन बच्चों को पीछे धकेल देता है।

ब्रिगेडियर शिंदे ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, 'इंसानों में फर्क काबिलियत का नहीं, बल्कि अवसरों का होता है। जीवन में जब मौका मिले, तो उसे पूरी ईमानदारी और मेहनत से पकड़ना चाहिए। इस ऐतिहासिक डोडा जिले की धरती से कई लोग सेना में जाकर देश की सेवा कर चुके हैं।'

छात्रों की प्रतिक्रिया

कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। एक छात्र ने कहा, 'आर्मी वालों ने हमें बहुत अच्छा मौका दिया है। मेरा सपना था कि मैं सैनिक स्कूल में पढ़ूं। मेरे स्कूल में आर्मी के जवान आए, उन्होंने हमारा पेपर लिया और मैं उसमें चयनित हो गया। अब हमें फ्री कोचिंग दी जाएगी। मैं आर्मी का धन्यवाद करता हूं।'

एक छात्रा ने भावुक होते हुए कहा, 'मैं इंडियन आर्मी की वजह से यहां आई हूं। मेरा लक्ष्य बड़ा होकर आर्मी में जाना है। अगर आर्मी ने यह अवसर नहीं दिया होता, तो शायद मैं आज यहां नहीं होती।' एक अन्य छात्रा ने बताया कि स्कूल में उन्हें बताया गया था कि एक पेपर पास करने पर नगरोटा सैनिक स्कूल में पढ़ाई का अवसर मिलेगा।

ऑपरेशन सद्भावना की पृष्ठभूमि

यह कार्यक्रम भारतीय सेना के ऑपरेशन सद्भावना का हिस्सा है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे से जुड़ी नागरिक सहायता गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सुदूर पर्वतीय जिलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

आगे की राह

8 सप्ताह की इस कोचिंग के बाद चयनित छात्र ऑल इंडिया सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा में शामिल होंगे। सफल छात्रों को देश के प्रतिष्ठित सैनिक स्कूलों में प्रवेश का अवसर मिलेगा, जो उनके जीवन की दिशा बदल सकता है। ब्रिगेडियर शिंदे ने इस कोचिंग को 'जीवन की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए खुद को तैयार करने का पहला अनुभव' बताया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार शिक्षा को केंद्र में रखना एक परिपक्व बदलाव है। असली परीक्षा यह होगी कि इन 60 में से कितने छात्र वास्तव में सैनिक स्कूल में दाखिला ले पाते हैं और क्या यह कार्यक्रम एकबारगी प्रयास बनकर रह जाता है या प्रतिवर्ष दोहराया जाता है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डोडा में भारतीय सेना ने कौन-सी नई कोचिंग पहल शुरू की है?
भारतीय सेना की असम राइफल्स यूनिट ने 2 नवंबर 2026 को ऑपरेशन सद्भावना के तहत डोडा, जम्मू-कश्मीर में ऑल इंडिया सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा के लिए 8 सप्ताह की मुफ्त कोचिंग शुरू की है। इसमें स्क्रीनिंग टेस्ट से चुने गए 60 मेधावी छात्र भाग ले रहे हैं।
इस कोचिंग कार्यक्रम के लिए छात्रों का चयन कैसे हुआ?
डोडा जिले के सरकारी और निजी स्कूलों में एक प्रारंभिक स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित किया गया था, जिसके परिणाम के आधार पर 60 मेधावी छात्रों का चयन किया गया। चयनित छात्रों को थलीला स्थित असम राइफल्स के बटालियन मुख्यालय में कोचिंग दी जाएगी।
ऑपरेशन सद्भावना क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
ऑपरेशन सद्भावना भारतीय सेना का एक नागरिक सहायता कार्यक्रम है, जिसके तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे से जुड़ी गतिविधियाँ संचालित की जाती हैं। इसका उद्देश्य सेना और स्थानीय नागरिकों के बीच विश्वास बनाना तथा वंचित समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ना है।
इस कोचिंग में पढ़ाने के लिए शिक्षक कहाँ से आए हैं?
पश्चिम बंगाल से विशेष रूप से अनुभवी और प्रशिक्षित शिक्षकों को बुलाया गया है, जो छात्रों को परीक्षा पैटर्न, सिलेबस और तैयारी की रणनीति का विस्तृत मार्गदर्शन देंगे।
इस कोचिंग से छात्रों को क्या फायदा होगा?
8 सप्ताह की निःशुल्क कोचिंग के बाद ये छात्र ऑल इंडिया सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा में शामिल होंगे। सफल छात्रों को नगरोटा सैनिक स्कूल सहित देश के प्रतिष्ठित सैनिक स्कूलों में प्रवेश का अवसर मिलेगा, जो दूरदराज के वंचित बच्चों के लिए अन्यथा दुर्लभ है।
राष्ट्र प्रेस
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