चुनाव आयोग की मेहनत लाई रंग, नंदीग्राम में डर खत्म — सुवेंदु अधिकारी का बड़ा बयान
सारांश
Key Takeaways
- सुवेंदु अधिकारी ने 23 अप्रैल को नंदीग्राम में चुनाव आयोग की प्रशंसा करते हुए कहा कि मतदाताओं का डर अब खत्म हो गया है।
- केंद्रीय सुरक्षा बलों की बड़े पैमाने पर तैनाती ने पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण मतदान में अहम भूमिका निभाई।
- बरहामपुर के बूथ नंबर 141 पर ईवीएम बार-बार खराब होने से मतदाताओं को लंबा इंतजार करना पड़ा और अधीर रंजन चौधरी ने शिकायत दर्ज कराई।
- बीरभूम के लाबपुर में भाजपा चुनाव एजेंट बिश्वजीत मंडल पर कथित हमला हुआ।
- मुर्शिदाबाद के नवादा में आम जनता उन्नयन पार्टी और तृणमूल कांग्रेस नेताओं के बीच टकराव की खबर आई।
- 152 सीटों पर मतदान पूरा होने के साथ बंगाल में शेष चरणों के मतदान और अंतिम परिणाम पर सभी की नजर टिकी है।
नंदीग्राम, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और भवानीपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने गुरुवार को मतदान के दौरान चुनाव आयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने में चुनाव आयोग ने अथक प्रयास किए हैं और अब मतदाताओं के मन से भय का साया हट गया है।
सुवेंदु अधिकारी का चुनाव आयोग को समर्थन
सुवेंदु अधिकारी ने राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में बताया कि चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण मतदान के लिए जमीनी स्तर पर जो तैयारियां की हैं, वे सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात हैं, जिससे मतदाताओं को सुरक्षा का अहसास हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस बार युवा मतदाता और महिलाएं खुलकर सामने आई हैं और निर्भीक होकर अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। यह संकेत है कि वर्षों से चले आ रहे राजनीतिक भय का वातावरण अब बदल रहा है।
पीएम मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में चुनाव प्रचार
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसंपर्क अभियान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व में यह चुनाव लड़ा जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी कार्यकर्ता हर गांव में सक्रिय हैं और जनमानस का रुझान भाजपा की ओर स्पष्ट दिख रहा है।
उन्होंने भवानीपुर सीट पर भी भाजपा की जीत का भरोसा जताया और कहा कि हिंदू मतदाता इस बार एकजुट होकर भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे। उनके अनुसार, अन्य सीटों पर भी पार्टी की स्थिति मजबूत है।
विपक्षी दलों की शिकायतें और ईवीएम विवाद
इसी बीच, बरहामपुर निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बूथ नंबर 141 पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) बार-बार खराब हो रही है। उन्होंने बताया कि मशीन बदलने के बाद भी स्थिति नहीं सुधरी, जिससे मतदाताओं को भीषण गर्मी में घंटों प्रतीक्षा करनी पड़ी।
अधीर रंजन चौधरी ने इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। यह ईवीएम विवाद एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है, जो हर चुनाव में विपक्ष द्वारा उठाया जाने वाला प्रमुख मुद्दा बन चुका है।
हिंसा और तनाव की छिटपुट घटनाएं
पश्चिम बंगाल की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा की खबरें भी आईं। बीरभूम जिले के लाबपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा उम्मीदवार देबाशीष ओझा के चुनाव एजेंट बिश्वजीत मंडल पर कथित हमले की सूचना मिली।
दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज और मुर्शिदाबाद के नवादा विधानसभा क्षेत्र से भी तनाव की खबरें सामने आईं। नवादा में आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर और स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेताओं के बीच टकराव हुआ।
गहरा विश्लेषण: बंगाल में भय की राजनीति और बदलता समीकरण
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का इतिहास दशकों पुराना है। 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाएं दर्ज हुई थीं, जिनकी जांच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने की थी। ऐसे में सुवेंदु अधिकारी का यह कहना कि डर खत्म हो गया है, राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संकेत है।
विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बलों की तैनाती और चुनाव आयोग की सख्ती ने इस बार मतदाताओं को अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित महसूस कराया। हालांकि, बीरभूम और मुर्शिदाबाद जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में हिंसा की घटनाएं यह भी बताती हैं कि जमीनी हकीकत अभी पूरी तरह नहीं बदली है।
मतगणना के बाद जो भी परिणाम आएं, यह चुनाव बंगाल की राजनीतिक दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। आने वाले दिनों में शेष चरणों के मतदान और अंततः परिणामों पर सभी की नजर टिकी रहेगी।