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क्या स्वामी रामभद्राचार्य का बयान संत प्रेमानंद के लिए उचित है?

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क्या स्वामी रामभद्राचार्य का बयान संत प्रेमानंद के लिए उचित है?

सारांश

आचार्य रामचंद्र दास ने स्वामी रामभद्राचार्य के विवादास्पद बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संत प्रेमानंद को सम्मान का पात्र बताया। जानिए इस विवाद का पूरा सच और संत समाज की प्रतिक्रिया।

मुख्य बातें

स्वामी रामभद्राचार्य का बयान विवादास्पद रहा।
आचार्य रामचंद्र दास ने संत प्रेमानंद का समर्थन किया।
धार्मिक संवाद की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है।
संत समाज को विवादों से बचना चाहिए।
अच्छे उपदेश देने वाले संतों का सम्मान होना चाहिए।

चित्रकूट, २५ अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। आध्यात्मिक गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा संत प्रेमानंद पर की गई टिप्पणी ने संत समाज में असंतोष की लहर पैदा कर दी है। इस मुद्दे ने धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में कई चर्चाओं को जन्म दिया है।

इस बीच, जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने अपने गुरुदेव के बयान को स्पष्ट करते हुए विवाद को समाप्त करने का प्रयास किया है।

आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि स्वामी रामभद्राचार्य के हाल के साक्षात्कार से उत्पन्न विवाद पूरी तरह से गलत और अनावश्यक है। उन्होंने संत प्रेमानंद के प्रति किसी भी प्रकार की ईर्ष्या या द्वेष की भावना से इनकार किया है।

रामचंद्र दास ने कहा कि गुरुदेव ने प्रेमानंद को “नामजापक संत” की उपाधि दी है और कहा है कि भगवान के नाम का जाप करने वाला हर व्यक्ति सम्मान के योग्य है। गुरुदेव ने अपने बयान में कहा, “जो राम-कृष्ण का भजन करता है, वह चाहे किसी भी धर्म, वर्ण, लिंग या अवस्था का हो, वह हमारे लिए आदरणीय है।”

उन्होंने आगे यह भी कहा कि गुरुदेव ने संत प्रेमानंद को अपनी अवस्था और धार्मिक व्यवस्था के अनुसार पुत्र समान बताया है। जो संत सनातन धर्म में सम्मानित है, उसे पराया नहीं माना जा सकता। संत प्रेमानंद समाज को अच्छे उपदेश दे रहे हैं, इसलिए वे हमारे लिए पूजनीय हैं।

आचार्य रामचंद्र दास ने कहा, “जगद्गुरु सबके गुरु होते हैं। उनकी प्रजा उनके लिए संतान समान होती है। किसी सनातनी का अहित करना उनका उद्देश्य नहीं हो सकता।” कभी-कभी पिता के वचन कठोर लग सकते हैं, लेकिन उनका भाव हमेशा संतान के कल्याण के लिए होता है। यदि घर के बुजुर्ग कटु वचन कह भी दें, तो हमें कटुता से जवाब नहीं देना चाहिए।

उन्होंने बताया कि गुरुदेव का जीवन सनातन धर्म के कल्याण के लिए समर्पित रहा है। राम मंदिर आंदोलन में उनकी गवाही से लेकर अनेक ग्रंथों की रचना तक, उनका हर कार्य सनातनियों के उत्थान के लिए रहा है। ऐसे में उनके खिलाफ ईर्ष्या या अहंकार जैसे शब्दों का प्रयोग अनुचित है। सनातन की परंपरा संवाद की परंपरा रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि गुरुदेव अपने विद्यालय और विश्वविद्यालय के माध्यम से शिक्षा का प्रसार कर रहे हैं, साथ ही प्रवचनों और ग्रंथों के जरिए संस्कारों का बीजारोपण कर रहे हैं।

रामचंद्र दास ने संत समाज और भक्तों से अपील की कि इस तरह के विवादों से बचा जाए और गुरुदेव के संदेश को सही संदर्भ में समझा जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

ताकि धर्म की बुनियाद मजबूत बनी रहे।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वामी रामभद्राचार्य ने संत प्रेमानंद के बारे में क्या कहा?
स्वामी रामभद्राचार्य ने संत प्रेमानंद को लेकर कुछ टिप्पणियाँ की थीं, जिन्हें विवादित माना गया।
आचार्य रामचंद्र दास का इस मुद्दे पर क्या कहना है?
आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि विवाद अनावश्यक है और गुरुदेव ने प्रेमानंद को सम्मान का पात्र बताया है।
क्या संत प्रेमानंद समाज में सम्मानित हैं?
जी हां, संत प्रेमानंद को समाज में अच्छे उपदेश देने के लिए सम्मानित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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