क्या तालिबान के नूर अहमद नूर भारत में अफगान दूतावास की ज़िम्मेदारी संभालेंगे?

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क्या तालिबान के नूर अहमद नूर भारत में अफगान दूतावास की ज़िम्मेदारी संभालेंगे?

सारांश

तालिबान के नूर अहमद नूर ने भारत में अफगान दूतावास की जिम्मेदारी संभालने के लिए नई दिल्ली का दौरा किया है। जानिए इस यात्रा का महत्व और भारत-तालिबान संबंधों में क्या बदलाव आए हैं।

Key Takeaways

  • तालिबान के नूर अहमद नूर ने नई दिल्ली में दूतावास की जिम्मेदारी संभाली।
  • भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में सुधार हो रहा है।
  • भारत ने तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है, लेकिन सहयोग जारी है।

नई दिल्ली, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तालिबान के उच्च पदस्थ सदस्य मुफ्ती नूर अहमद नूर भारत की राजधानी नई दिल्ली में पहुँच चुके हैं। अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नूर अफगानिस्तान दूतावास में चार्ज डी'अफेयर्स (सीडीए) की भूमिका निभाएंगे।

इससे पहले, नूर अहमद ने अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय में फर्स्ट पॉलिटिकल डिपार्टमेंट के महानिदेशक के रूप में कार्य किया है। पिछले कुछ महीनों में भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों में काफी सुधार हुआ है। अक्टूबर 2025 में, अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने भारत का सात दिनों का दौरा किया, जिसके बाद दोनों देशों के संबंधों में गर्मजोशी आई।

एक सवाल के जवाब में, मुत्ताकी ने कहा, "यह हमारा झंडा है। यह 100 प्रतिशत हमारा दूतावास है। यहाँ काम करने वाले सभी लोग हमारे साथ हैं।"

मुफ्ती नूर, नई दिल्ली में विदेश मंत्री मुत्ताकी के प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। इस दौरान, उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ मुलाकात की, जिसमें अफगान दूतावास के लिए इस्लामिक अमीरात द्वारा नियुक्त राजनयिकों को स्वीकार करने पर सहमति बनी।

तालिबान के अधिग्रहण के बाद यह अफगान विदेश मंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा थी। लगभग पांच साल बाद, नूर अहमद नूर को भारत स्थित अफगान दूतावास की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने इससे पहले दिसंबर 2025 में बांग्लादेश का दौरा किया था।

हालांकि, भारत ने अभी तक तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है, लेकिन वह अफगानिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगी राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। भारत ने अफगानिस्तान में सहायता और चिकित्सा आपूर्ति देना जारी रखा है।

इसी प्रकार, मुंबई और हैदराबाद में तालिबान द्वारा नियुक्त राजदूत अफगान वाणिज्य दूतावास का संचालन कर रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी की सरकार द्वारा नियुक्त सईद मुहम्मद इब्राहिम खिल नई दिल्ली में अफगान एम्बेसी के सीडीए थे।

इस बीच, अफगानिस्तान से भारत के कई बड़े प्रतिनिधिमंडलों के दौरे हुए हैं, जिनका उद्देश्य आपसी रिश्तों, व्यापार और ऊर्जा के विकास को सुदृढ़ करना है। इसके साथ ही, ईरान में भारत द्वारा बनाए गए चाबहार पोर्ट की क्षमता को सक्रिय करना और बड़े स्तर पर निवेश लाना है।

Point of View

यह यात्रा भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि तालिबान को अभी भी अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त नहीं है, लेकिन भारत का सहयोग महत्वपूर्ण है।
NationPress
10/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या तालिबान को भारत में मान्यता मिली है?
नहीं, भारत ने अभी तक तालिबान शासन को मान्यता नहीं दी है।
नूर अहमद नूर का पद क्या होगा?
उन्हें अफगान दूतावास में चार्ज डी'अफेयर्स (सीडीए) का पद सौंपा गया है।
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