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तमिल मानिला कांग्रेस ने NDA से नाता तोड़ा, वासन बोले — स्वतंत्र पहचान बनाना प्राथमिकता

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तमिल मानिला कांग्रेस ने NDA से नाता तोड़ा, वासन बोले — स्वतंत्र पहचान बनाना प्राथमिकता

सारांश

तमिल मानिला कांग्रेस का NDA से अलग होना महज एक पार्टी का फैसला नहीं — यह तमिलनाडु में विपक्षी खेमे की बढ़ती बेचैनी की पहली औपचारिक अभिव्यक्ति है। विधानसभा चुनावों में तीसरे स्थान पर रहने के बाद जी.के. वासन ने स्वतंत्र पहचान को तरजीह दी है।

मुख्य बातें

तमिल मानिला कांग्रेस (मूपनार) ने 14 जून 2026 को NDA से अलग होने की घोषणा की।
पार्टी अध्यक्ष जी.के.
वासन ने कहा — भाजपा या AIADMK से कोई मतभेद नहीं, यह कदम संगठन मजबूत करने के लिए।
हाल के विधानसभा चुनावों में AIADMK -नेतृत्व वाला NDA तीसरे स्थान पर रहा था।
तमिल मानिला कांग्रेस इन चुनावों के बाद NDA छोड़ने वाली पहली सहयोगी पार्टी बनी।
वासन ने संकेत दिया — चुनाव के समय नए गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं।
पार्टी की स्थापना 1996 में जी.के.
मूपनार ने की थी; अब उनके पुत्र वासन इसका नेतृत्व करते हैं।

तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत देते हुए तमिल मानिला कांग्रेस (मूपनार) ने 14 जून 2026 को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से अलग होने की औपचारिक घोषणा कर दी। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री जी.के. वासन ने चेन्नई में कार्यकारिणी की बैठक के बाद यह ऐलान किया। यह निर्णय हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में AIADMK-नेतृत्व वाले NDA के तीसरे स्थान पर रहने के बाद आया है।

क्यों लिया गया यह फैसला

वासन ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी वैचारिक मतभेद या आपसी विवाद के कारण नहीं, बल्कि संगठन को पुनर्जीवित करने की रणनीतिक जरूरत के चलते उठाया गया है। उन्होंने कहा, 'हमारा भाजपा, AIADMK या गठबंधन के अन्य दलों से कोई मतभेद नहीं है। यह फैसला केवल तमिल मानिला कांग्रेस को एक स्वतंत्र राजनीतिक ताकत के रूप में मजबूत करने के लिए लिया गया है।'

पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना था कि गठबंधन की सीमाओं के कारण जमीनी स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियाँ बाधित हो रही थीं। वासन के अनुसार, स्वतंत्र रूप से काम करने से कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और पूरे तमिलनाडु में पार्टी का विस्तार करने का बेहतर अवसर मिलेगा।

चुनावी विफलता की पृष्ठभूमि

वासन ने यह भी स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में जिस गठबंधन का उनकी पार्टी हिस्सा थी, उसे चुनावी सफलता नहीं मिली। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में AIADMK-नेतृत्व वाला NDA तीसरे स्थान पर रहा, जिसके बाद सहयोगी दलों के बीच आत्ममंथन का दौर शुरू हुआ। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में DMK की सत्ता मजबूत बनी हुई है और विपक्षी खेमे में पुनर्गठन की कोशिशें जारी हैं।

गौरतलब है कि हाल के विधानसभा चुनावों के बाद NDA छोड़ने वाली तमिल मानिला कांग्रेस AIADMK-नेतृत्व वाले गठबंधन की पहली सहयोगी पार्टी बन गई है — जो विपक्षी खेमे में बढ़ती बेचैनी का संकेत है।

पार्टी का इतिहास और वर्तमान नेतृत्व

वर्ष 1996 में वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी.के. मूपनार ने कांग्रेस से अलग होकर तमिल मानिला कांग्रेस की स्थापना की थी। उनके निधन के बाद पार्टी में कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव आए और अंततः उनके पुत्र जी.के. वासन के नेतृत्व में इसका पुनर्गठन हुआ। तीन दशकों में पार्टी ने कांग्रेस से अलगाव, UPA के साथ जुड़ाव और फिर NDA में शामिल होने तक का लंबा राजनीतिक सफर तय किया है।

गठबंधन पर भविष्य का रुख

वासन ने यह भी स्पष्ट किया कि NDA से अलग होने के बावजूद गठबंधन के सभी सहयोगियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बने रहेंगे। उन्होंने माना कि तमिलनाडु की राजनीति में चुनावी गठबंधनों का अपना महत्व है और कहा, 'चुनाव के समय गठबंधन जरूरी होते हैं, लेकिन फिलहाल हमारी प्राथमिकता पार्टी को फिर से मजबूत करना है।'

आने वाले महीनों में पार्टी किस दिशा में जाती है — स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ती है या नए गठजोड़ की तलाश करती है — यह तमिलनाडु की राजनीतिक समीकरणों को नई शक्ल दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल संदेश साफ है — विधानसभा चुनावों में तीसरे स्थान पर रहने के बाद NDA का तमिलनाडु मॉडल अपने सहयोगियों को टिकाए रखने में विफल हो रहा है। तमिल मानिला कांग्रेस जैसी छोटी पार्टियाँ बड़े गठबंधन में अपनी पहचान खोती हैं और चुनावी लाभ न मिलने पर उनके पास बाहर निकलने के अलावा विकल्प नहीं बचता। असली सवाल यह है कि क्या वासन स्वतंत्र रहकर अपना जनाधार वापस बना पाएंगे, या अगले चुनाव से पहले किसी नए गठजोड़ — संभवतः DMK-विरोधी मोर्चे — का हिस्सा बनेंगे। तमिलनाडु की द्विध्रुवीय राजनीति में तीसरी ताकत का टिकना ऐतिहासिक रूप से कठिन रहा है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तमिल मानिला कांग्रेस ने NDA क्यों छोड़ा?
पार्टी अध्यक्ष जी.के. वासन के अनुसार, यह निर्णय किसी वैचारिक मतभेद के कारण नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत करने और स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने के लिए लिया गया है। गठबंधन में रहने से जमीनी स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियाँ सीमित हो रही थीं।
जी.के. वासन कौन हैं और तमिल मानिला कांग्रेस का इतिहास क्या है?
जी.के. वासन पूर्व केंद्रीय मंत्री और तमिल मानिला कांग्रेस के अध्यक्ष हैं। पार्टी की स्थापना 1996 में उनके पिता वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी.के. मूपनार ने की थी। मूपनार के निधन के बाद वासन ने पार्टी का पुनर्गठन किया।
क्या तमिल मानिला कांग्रेस भविष्य में कोई नया गठबंधन करेगी?
वासन ने संकेत दिया है कि चुनाव के समय गठबंधन जरूरी होते हैं, लेकिन फिलहाल पार्टी को मजबूत करना प्राथमिकता है। भविष्य के किसी गठजोड़ के बारे में अभी कोई घोषणा नहीं की गई है।
हाल के विधानसभा चुनावों में NDA का प्रदर्शन कैसा रहा?
हाल ही में संपन्न तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में AIADMK-नेतृत्व वाला NDA तीसरे स्थान पर रहा। इस हार के बाद सहयोगी दलों में आत्ममंथन शुरू हुआ और तमिल मानिला कांग्रेस गठबंधन छोड़ने वाली पहली पार्टी बन गई।
NDA छोड़ने के बाद भाजपा और AIADMK से तमिल मानिला कांग्रेस के संबंध कैसे रहेंगे?
वासन ने स्पष्ट किया कि NDA से अलग होने के बावजूद भाजपा, AIADMK और गठबंधन के अन्य सहयोगियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह कोई राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि संगठनात्मक जरूरत से उठाया गया कदम है।
राष्ट्र प्रेस
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