तमिलनाडु में पूर्वोत्तर मानसून सक्रिय, 23 अक्टूबर को बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना
सारांश
मुख्य बातें
भारत मौसम विभाग (IMD) ने 20 अक्टूबर 2026 को जानकारी दी कि तमिलनाडु में पूर्वोत्तर मानसून के तेज़ होने के साथ-साथ 23 अक्टूबर को दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे समुद्री हिस्सों में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। यह पूर्वानुमान ऐसे समय में आया है जब तटीय ज़िलों, कावेरी डेल्टा और पश्चिमी घाट से लगे इलाकों में व्यापक वर्षा जारी है।
मौजूदा मौसमी स्थिति
विभाग के अनुसार, फिलहाल थाईलैंड की खाड़ी और म्यांमार के ऊपर एक अपर-एयर सर्कुलेशन (ऊपरी वायु परिसंचरण) सक्रिय है। अनुमान है कि यह मौसमी प्रणाली बुधवार सुबह तक उत्तरी अंडमान सागर की परिस्थितियों को प्रभावित करेगी, जिससे इस सप्ताह के अंत तक कम दबाव का क्षेत्र बनने की पृष्ठभूमि तैयार हो सकती है।
गौरतलब है कि 17 अक्टूबर को चेन्नई में लगातार बारिश दर्ज की गई थी, जो राज्य में मानसून की बढ़ती सक्रियता का स्पष्ट संकेत था। राज्य के सात जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की जा चुकी है, हालाँकि विभाग ने उन जिलों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं।
संभावित चक्रवात पर अनिश्चितता
मौसम विभाग के मुताबिक, यह कम दबाव का क्षेत्र आगे चलकर पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ सकता है। हालाँकि इस प्रणाली की वास्तविक तीव्रता और आगे का विकास अभी अनिश्चित है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह सिस्टम चक्रवाती तूफान का रूप लेगा या नहीं, इसकी जानकारी आने वाले बुलेटिनों में दी जाएगी।
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर मानसून का मौसम अपने चरम पर होता है और बंगाल की खाड़ी में मौसमी प्रणालियों का बनना तमिलनाडु के लिए सामान्य घटना है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में तीव्रता की संभावना तो है, लेकिन इसकी पुष्टि बाद के अवलोकनों से ही होगी।
तटीय व डेल्टा क्षेत्रों पर असर
कावेरी डेल्टा और पश्चिमी घाट से लगे ज़िलों में पहले से ही अच्छी बारिश हो रही है। तटीय इलाकों में मौसम विभाग की निगरानी बढ़ा दी गई है। यदि यह प्रणाली तेज़ होती है तो तटीय ज़िलों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन अभी सटीक मार्ग और प्रभाव क्षेत्र की पुष्टि नहीं हुई है।
आगे क्या उम्मीद की जाए
मौसम विभाग के आने वाले बुलेटिनों में इस प्रणाली के 23 अक्टूबर के बाद के विकास और तीव्रता के बारे में और स्पष्टता मिलने की उम्मीद है। उत्तरी अंडमान सागर से मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर इस सिस्टम की गति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
विभाग ने नागरिकों और प्रशासन से आग्रह किया है कि वे नियमित रूप से मौसम अपडेट देखते रहें। आने वाले दिनों में इस प्रणाली के विकास के आधार पर बारिश की तीव्रता और संभावित चेतावनियों की स्थिति स्पष्ट होगी।