क्या तमिलनाडु की सरकार चुनाव से पहले कल्याणकारी योजनाओं का सर्वे कराएगी?
सारांश
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चेन्नई, 30 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पूर्व, राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का मूल्यांकन करने का निर्णय लिया है। स्टालिन सरकार कल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव को जानने के लिए राज्य में लगभग 1.91 करोड़ घरों का सर्वेक्षण करवाएगी।
यह सर्वेक्षण नए साल में आरंभ होकर 12 दिनों तक चलेगा, जिसका उद्देश्य विभिन्न सरकारी पहलों की जनता तक पहुंच और उनके प्रभाव का मूल्यांकन करना है।
सर्वेक्षण को 55,706 स्वयं सहायता समूह के सदस्य करेंगे, जो शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर घरों का डेटा इकट्ठा करेंगे। इस पहल का समन्वय पब्लिक डिपार्टमेंट कर रहा है और यह जानकारी जुटाने से पता चलेगा कि सरकारी योजनाएं लाभार्थियों तक कैसे पहुंच रही हैं।
विभाग की सचिव रीता हरीश ठक्कर द्वारा जारी एक सरकारी आदेश के अनुसार, यह सर्वे तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी द्वारा बनाए गए लाभार्थी डाटाबेस का उपयोग करेगा ताकि कल्याणकारी कार्यक्रमों की डिलीवरी और प्रभाव का आकलन किया जा सके।
इकट्ठा किया गया डेटा बाद में नीति लागू करने में सुधार और सेवा वितरण में खामियों की पहचान करने के लिए विश्लेषित किया जाएगा।
इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक हाई-लेवल मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें ग्रामीण विकास और राजस्व विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव शामिल हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु में कुल 2.26 करोड़ राशन कार्ड हैं, जिनमें से 89.03 लाख शहरी और 1.37 करोड़ ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इनमें से 1.57 करोड़ परिवारों को एक या अधिक सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
सरकार ने इस सर्वेक्षण के लिए 43.52 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है।
सर्वेयर को पहचान पत्र प्रदान किए जाएंगे और वे डेटा इकट्ठा करने के लिए भौतिक फॉर्म के साथ-साथ तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी द्वारा विकसित किए गए विशेष मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करेंगे।
अधिकारियों ने कहा कि इन परिणामों से सरकार को जमीनी स्तर पर परिणामों का आकलन करने, कल्याणकारी डिलीवरी को बेहतर बनाने और भविष्य के नीति निर्णय लेने से पहले सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम के प्रभाव को मजबूत करने में मदद मिलेगी।