क्या टैक्स चोरी से पाकिस्तान को सालाना 1 ट्रिलियन रुपये का नुकसान हो रहा है?
सारांश
Key Takeaways
- पाकिस्तान में टैक्स चोरी से हर साल 1 ट्रिलियन रुपये का नुकसान होता है।
- रियल एस्टेट सेक्टर में 500 अरब रुपये की टैक्स चोरी होती है।
- अवैध तंबाकू कारोबार से 310 अरब रुपये का नुकसान होता है।
- नियामक एजेंसियों की मिलीभगत से टैक्स चोरी संभव है।
- राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी टैक्स चोरी को रोकने में बाधक है।
नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में हो रही बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी के कारण सरकार को हर वर्ष लगभग 1 ट्रिलियन रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। एक पाकिस्तानी मीडिया लेख के अनुसार, रियल एस्टेट क्षेत्र में टैक्स चोरी से राष्ट्रीय खजाने को सालाना लगभग 500 अरब रुपये का नुकसान हो रहा है, जबकि अवैध तंबाकू व्यापार से 310 अरब रुपये की क्षति हो रही है। साथ ही, कई उपभोक्ता वस्तुओं का उद्योग दस्तावेज़ी अर्थव्यवस्था से बाहर कार्य कर रहा है।
कराची स्थित बिजनेस रिकॉर्डर में प्रकाशित लेख के अनुसार, इतनी व्यापक टैक्स चोरी और तस्करी, नियामक एजेंसियों के सहयोग और संरक्षण के बिना संभव नहीं है। यदि यह संरक्षण न हो, तो मामूली प्रवर्तन दबाव में ही छाया अर्थव्यवस्था तेजी से सिमट सकती है।
लेख में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू (एफबीआर) का 545 अरब रुपये का राजस्व घाटा इसी गंभीर स्थिति को दर्शाता है। यह केवल कमजोर आर्थिक गतिविधियों या सीमित टैक्स आधार का परिणाम नहीं है, बल्कि ऐसे अर्थव्यवस्था का परिणाम है, जहां मूल्य सृजन का बड़ा हिस्सा जानबूझकर टैक्स दायरे से बाहर रखा जाता है। इसके बावजूद, सरकार टैक्स चोरी को बढ़ावा देने वाली संरचनाओं को तोड़ने के बजाय ईमानदार टैक्सदाताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।
लेख में कहा गया है, “यह तरीका अब आम हो चुका है और बेहद नुकसानदेह है। वेतनभोगी वर्ग, पंजीकृत व्यवसाय और औपचारिक कंपनियां लंबे समय से असमान रूप से भारी टैक्स बोझ उठा रही हैं। इस वर्ग पर अधिक प्रभावी टैक्स दरें निवेश को हतोत्साहित करती हैं, प्रोत्साहनों को बिगाड़ती हैं और सीमांत कारोबारियों को फिर से अनौपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर धकेल देती हैं। इससे एक ऐसा चक्र बनता है, जिसमें ईमानदारी को सज़ा और टैक्स बचाने को इनाम मिलता है।”
लेख में रिसर्च एजेंसी इप्सोस द्वारा किए गए अध्ययन का हवाला देते हुए कहा गया है कि कई सेक्टरों में यह अव्यवस्था गहराई तक जड़ जमा चुकी है। रियल एस्टेट सेक्टर में लगातार कम मूल्यांकन, कमजोर प्रवर्तन और चयनात्मक जांच जारी है। अवैध तंबाकू व्यापार मजबूत वितरण नेटवर्क और स्पष्ट प्रवर्तन बिंदुओं के बावजूद फल-फूल रहा है। इसी तरह के हालात टायर, लुब्रिकेंट, फार्मास्यूटिकल्स और चाय उद्योग में भी देखे जा रहे हैं।
लेख में टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए लक्षित प्रवर्तन, उचित दस्तावेज़ीकरण, विश्वसनीय मूल्यांकन तंत्र और ट्रैक-एंड-ट्रेस सिस्टम के पूर्ण क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बार-बार चर्चा की गई है। लेकिन इसमें सबसे बड़ी कमी राजनीतिक इच्छाशक्ति की बताई गई है।
लेख के अनुसार, “अघोषित अर्थव्यवस्था से निपटने का मतलब प्रभावशाली, संसाधन-संपन्न और पहुंच रखने वाले तत्वों से टकराना है। इसके लिए प्रवर्तन एजेंसियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करना भी जरूरी है, जिसमें लगातार सरकारें विफल रही हैं।”