15 अक्टूबर 2026
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तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को लिखा पत्र, वैशाली नाव हादसे के पीड़ित परिवारों को जमीन व सरकारी नौकरी की मांग

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तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को लिखा पत्र, वैशाली नाव हादसे के पीड़ित परिवारों को जमीन व सरकारी नौकरी की मांग

सारांश

वैशाली के राघोपुर में 13 बच्चों की नाव दुर्घटना में मौत के बाद तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर पीड़ित परिवारों को जमीन, नौकरी और विशेष मुआवजे की माँग की। साथ ही बचाव में देरी, एंबुलेंस में ऑक्सीजन का अभाव और नाव-संचालन नियमों की अनदेखी पर उच्चस्तरीय जाँच की माँग उठाई।

मुख्य बातें

13 अक्टूबर 2026 को वैशाली जिले के राघोपुर में नाव हादसे में 13 बच्चों की मौत हुई।
तेजस्वी यादव ने 15 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर पीड़ित परिवारों को 3 डिसमिल जमीन और स्थायी सरकारी नौकरी देने की माँग की।
राहत कार्य में कथित देरी और एंबुलेंस में ऑक्सीजन तक उपलब्ध न होने का आरोप लगाया गया।
2017 की SOP के बावजूद नाव-संचालन नियमों — सूर्यास्त के बाद परिचालन पर रोक, ओवरलोडिंग नियंत्रण, लाइफ जैकेट अनिवार्यता — के पालन में चूक का आरोप।
मोहनपुर रेफरल अस्पताल में 48 घंटे के भीतर डॉक्टरों की तैनाती और राघोपुर में SDRF/NDRF का स्थायी उपकेंद्र बनाने की माँग।
पूरी घटना, बचाव में देरी और अस्पताल अव्यवस्था की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच की माँग।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर वैशाली जिले के राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में हुए नाव हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए तीन डिसमिल जमीन, स्थायी सरकारी नौकरी और विशेष मुआवजे की माँग की है। 13 अक्टूबर की रात रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला में हुई इस दुर्घटना में 13 बच्चों की जान चली गई, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है।

हादसे की पृष्ठभूमि

तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि राघोपुर जैसे दियारा क्षेत्र में बुनियादी सड़क, संपर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं का आज भी अभाव है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को जोखिम उठाकर नावों पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिंग रोड, रिंग बांध और पंचायतों को मुख्य सड़कों से जोड़ने वाली परियोजनाओं के लिए पहले डीपीआर तथा लागत आकलन कराया गया था, किंतु इन योजनाओं को बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

राहत-बचाव में देरी पर सवाल

पत्र में तेजस्वी ने हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य में कथित देरी को लेकर तीखे सवाल उठाए। उनके अनुसार घटनास्थल पर समय से एंबुलेंस नहीं पहुँची और जब पहुँची तब उसमें ऑक्सीजन जैसी बुनियादी जीवनरक्षक सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि वैशाली जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और बचाव दलों ने समय पर कार्रवाई की होती तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।

नियमों की अनदेखी का आरोप

तेजस्वी ने वर्ष 2017 में पटना के पतंग उत्सव के दौरान हुए नाव हादसे का संदर्भ देते हुए कहा कि उस घटना के बाद नाव परिचालन के लिए दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई थी — जिसमें सूर्यास्त के बाद परिचालन पर रोक, ओवरलोडिंग पर नियंत्रण और लाइफ जैकेट की अनिवार्यता शामिल थी। उनका आरोप है कि इन नियमों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं कराया गया, जो इस त्रासदी की एक प्रमुख वजह बनी।

पीड़ित परिवारों के लिए मुख्य माँगें

तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री के समक्ष कई ठोस माँगें रखी हैं। प्रत्येक पीड़ित परिवार को तीन डिसमिल जमीन आवंटित करने और परिवार के कम-से-कम एक योग्य सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी देने की माँग प्रमुख है। इसके अलावा सामान्य अनुग्रह राशि से अतिरिक्त विशेष मुआवजा, और पूरी घटना, बचाव में देरी तथा अस्पताल की अव्यवस्था की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच की माँग भी उठाई गई है।

बुनियादी ढाँचे और स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

पत्र में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की पहचान कर निलंबन सहित कड़ी कार्रवाई करने की माँग की गई है। मोहनपुर रेफरल अस्पताल में 48 घंटे के भीतर चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती और आधुनिक उपकरण तथा जीवनरक्षक दवाएँ उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया गया है। इसके साथ ही राघोपुर में ऑक्सीजन-युक्त एंबुलेंस, एंबुलेंस बोट और SDRF अथवा NDRF का स्थायी उपकेंद्र स्थापित करने तथा रिंग रोड एवं सड़क संपर्क परियोजनाओं को तत्काल मंजूरी देने की माँग भी की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में दियारा क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें उठाए गए सवाल — एंबुलेंस में ऑक्सीजन का अभाव, 2017 की SOP की अनदेखी, दियारा क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे का खालीपन — इन्हें महज़ पक्षपाती आरोपों की तरह खारिज करना आसान नहीं है। गौरतलब है कि बिहार में हर मानसून के बाद नाव हादसों की पुनरावृत्ति यह बताती है कि नियम बनते हैं, लेकिन जमीन पर क्रियान्वयन नहीं होता। असली सवाल यह है कि 2017 की SOP के नौ साल बाद भी राघोपुर जैसे दियारा क्षेत्रों में जीवनरक्षक व्यवस्था क्यों नहीं पहुँची — यह जवाबदेही सरकार को देनी होगी, विपक्ष को नहीं।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वैशाली नाव हादसा क्या है और कब हुआ?
यह हादसा 13 अक्टूबर 2026 की रात बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला में हुआ, जिसमें 13 बच्चों की मौत हो गई। यह क्षेत्र दियारा इलाका है जहाँ सड़क संपर्क की कमी के कारण नाव ही आवागमन का प्रमुख साधन है।
तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी से क्या-क्या माँगें की हैं?
तेजस्वी यादव ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को तीन डिसमिल जमीन , परिवार के एक योग्य सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी , विशेष मुआवजा और पूरी घटना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच की माँग की है। इसके अलावा लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई और मोहनपुर रेफरल अस्पताल में 48 घंटे के भीतर डॉक्टरों की तैनाती की भी माँग की गई है।
तेजस्वी यादव ने बचाव कार्य में किस तरह की लापरवाही का आरोप लगाया है?
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर समय से एंबुलेंस नहीं पहुँची और जब पहुँची तो उसमें ऑक्सीजन तक उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने कहा कि वैशाली जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की समय पर कार्रवाई से कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
नाव परिचालन को लेकर पहले क्या नियम बने थे और क्या उनका पालन हुआ?
वर्ष 2017 में पटना के पतंग उत्सव हादसे के बाद नाव संचालन के लिए SOP जारी की गई थी, जिसमें सूर्यास्त के बाद परिचालन पर रोक, ओवरलोडिंग नियंत्रण और लाइफ जैकेट की अनिवार्यता शामिल थी। तेजस्वी यादव का आरोप है कि इन नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ।
राघोपुर में बुनियादी ढाँचे की क्या स्थिति है?
राघोपुर दियारा क्षेत्र में है, जहाँ सड़क, स्वास्थ्य सेवा और आपातकालीन बचाव सुविधाओं की कमी के कारण लोग नावों पर निर्भर हैं। तेजस्वी ने कहा कि रिंग रोड और रिंग बांध परियोजनाओं के लिए डीपीआर बनाए जाने के बावजूद इन्हें ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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