तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को लिखा पत्र, वैशाली नाव हादसे के पीड़ित परिवारों को जमीन व सरकारी नौकरी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 15 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर वैशाली जिले के राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में हुए नाव हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए तीन डिसमिल जमीन, स्थायी सरकारी नौकरी और विशेष मुआवजे की माँग की है। 13 अक्टूबर की रात रामपुर श्यामचंद पंचायत के भगतान टोला में हुई इस दुर्घटना में 13 बच्चों की जान चली गई, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है।
हादसे की पृष्ठभूमि
तेजस्वी यादव ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि राघोपुर जैसे दियारा क्षेत्र में बुनियादी सड़क, संपर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं का आज भी अभाव है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को जोखिम उठाकर नावों पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि रिंग रोड, रिंग बांध और पंचायतों को मुख्य सड़कों से जोड़ने वाली परियोजनाओं के लिए पहले डीपीआर तथा लागत आकलन कराया गया था, किंतु इन योजनाओं को बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
राहत-बचाव में देरी पर सवाल
पत्र में तेजस्वी ने हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य में कथित देरी को लेकर तीखे सवाल उठाए। उनके अनुसार घटनास्थल पर समय से एंबुलेंस नहीं पहुँची और जब पहुँची तब उसमें ऑक्सीजन जैसी बुनियादी जीवनरक्षक सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि वैशाली जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग और बचाव दलों ने समय पर कार्रवाई की होती तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।
नियमों की अनदेखी का आरोप
तेजस्वी ने वर्ष 2017 में पटना के पतंग उत्सव के दौरान हुए नाव हादसे का संदर्भ देते हुए कहा कि उस घटना के बाद नाव परिचालन के लिए दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई थी — जिसमें सूर्यास्त के बाद परिचालन पर रोक, ओवरलोडिंग पर नियंत्रण और लाइफ जैकेट की अनिवार्यता शामिल थी। उनका आरोप है कि इन नियमों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं कराया गया, जो इस त्रासदी की एक प्रमुख वजह बनी।
पीड़ित परिवारों के लिए मुख्य माँगें
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री के समक्ष कई ठोस माँगें रखी हैं। प्रत्येक पीड़ित परिवार को तीन डिसमिल जमीन आवंटित करने और परिवार के कम-से-कम एक योग्य सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी देने की माँग प्रमुख है। इसके अलावा सामान्य अनुग्रह राशि से अतिरिक्त विशेष मुआवजा, और पूरी घटना, बचाव में देरी तथा अस्पताल की अव्यवस्था की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जाँच की माँग भी उठाई गई है।
बुनियादी ढाँचे और स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
पत्र में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की पहचान कर निलंबन सहित कड़ी कार्रवाई करने की माँग की गई है। मोहनपुर रेफरल अस्पताल में 48 घंटे के भीतर चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती और आधुनिक उपकरण तथा जीवनरक्षक दवाएँ उपलब्ध कराने का भी आग्रह किया गया है। इसके साथ ही राघोपुर में ऑक्सीजन-युक्त एंबुलेंस, एंबुलेंस बोट और SDRF अथवा NDRF का स्थायी उपकेंद्र स्थापित करने तथा रिंग रोड एवं सड़क संपर्क परियोजनाओं को तत्काल मंजूरी देने की माँग भी की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में दियारा क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।