वैशाली नाव हादसा: जर्जर नाव पलटी, 13 मासूम बच्चों की डूबने से मौत; एक परिवार के 7 बच्चे शामिल
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर थाना क्षेत्र स्थित रामपुर श्यामचंद पंचायत में मंगलवार रात एक जर्जर नाव के पलटने से 13 मासूम बच्चों की डूबकर मौत हो गई। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को जब एक साथ कई अर्थियाँ गाँव की गलियों से निकलीं, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया। यह हादसा उस समय हुआ जब गाँव के करीब 20 लोग एक भोज में शामिल होने के लिए उस छोटी नाव पर सवार होकर ढाब पार कर रहे थे।
हादसे का घटनाक्रम
भगतान टोला में एक घर पर भोज का आयोजन था। उसमें शामिल होने के लिए पंचायत के करीब 20 ग्रामीण एक छोटी और जर्जर नाव पर सवार होकर ढाब के दूसरी ओर जा रहे थे। बीच पानी में पहुँचते ही नाव अनियंत्रित होकर पलट गई और सभी सवार गहरे पानी में जा गिरे। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और तब तक 13 बच्चों की जलसमाधि हो चुकी थी।
एक परिवार के 7 बच्चे, दूसरे के 5 — त्रासदी की सबसे हृदयविदारक तस्वीर
इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर तब सामने आई जब एक ही परिवार के सात मासूम बच्चों के शव एक साथ उठाए गए। दूसरे परिवार के पाँच बच्चों की मौत ने परिजनों को पूरी तरह तोड़ दिया, जबकि तीसरे परिवार का एक बच्चा भी इस हादसे में असमय काल के गाल में समा गया। जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक बच्चों की किलकारियाँ गूँजती थीं, वहाँ अब माँ की सिसकियाँ और पिता का मूक दर्द है। शोक में कई घरों में बुधवार को चूल्हे तक नहीं जले।
जर्जर नाव और सुरक्षा पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जिस नाव पर यह सफर किया गया, वह पहले से जर्जर थी और उसे बदलने के लिए पूर्व में आवेदन भी दिया जा चुका था। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आलोचकों का कहना है कि यदि समय रहते नई नाव उपलब्ध करा दी जाती, तो यह त्रासदी टाली जा सकती थी। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण इलाकों में नदी-ढाब पार करने के लिए असुरक्षित नौकाओं पर निर्भरता एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
गाँव में पसरा मातम
हादसे के बाद रामपुर श्यामचंद पंचायत में गहरी खामोशी पसरी है। अस्पताल परिसर में भी शोक और पीड़ा का माहौल रहा। अधिकारी भी इस असमय मौत से दुखी दिखे। गाँव का शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसकी आँखें इस हादसे के बाद सूखी रही हों। जिन परिवारों को अपने बच्चों के भोज से लौटने का इंतजार था, उनके घरों में अब एक ऐसी चुप्पी है जिसे शब्दों में बयाँ कर पाना असंभव है।
आगे क्या होगा
हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर जाँच की माँग उठ रही है। ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों का आग्रह है कि दोषियों पर जवाबदेही तय की जाए और क्षेत्र में सुरक्षित नौका परिवहन सुनिश्चित किया जाए। गौरतलब है कि बिहार में हर साल मानसून और उसके बाद के महीनों में नाव हादसों की घटनाएँ सामने आती रहती हैं, जिससे जलमार्ग सुरक्षा पर नीतिगत ध्यान देने की जरूरत एक बार फिर रेखांकित होती है।