तेजस्वी यादव का दावा: बिहार को गुजरात से रिमोट कंट्रोल से चलाया जा रहा है
सारांश
Key Takeaways
- तेजस्वी यादव का आरोप: बिहार को गुजरात से चलाया जा रहा है।
- राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है।
- बिहार की प्रति व्यक्ति आय सबसे कम है।
- कोई उद्योग या कारखाना नहीं है।
- सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पटना, 13 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में सत्ताधारी गठबंधन पर तेजस्वी यादव ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) पर कुशासन का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि राज्य को गुजरात से रिमोट कंट्रोल के माध्यम से चलाया जा रहा है और पिछले दो दशकों से बिहार के निवासियों के हितों की अनदेखी की गई है।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान राजद नेता ने बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा हालात के लिए भाजपा से जुड़े तत्व जिम्मेदार हैं, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो जनता दल-यूनाइटेड के भीतर रहकर भाजपा के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि वह कोई ठोस विकास किए बिना ही राज्य के संसाधनों को समाप्त कर रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता छोड़ने से पहले उन्होंने बिहार का खजाना खाली कर दिया है। 20 वर्षों के शासन के बाद भी बिहार सबसे गरीब राज्यों में से एक बना हुआ है। यहाँ की प्रति व्यक्ति आय सबसे कम है और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में भी यह सबसे निचले स्तर पर है। यहाँ कोई उद्योग या कारखाना नहीं हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर मंत्रियों की बार-बार आने-जाने की गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि इस तरह की हलचल का जनता की व्यापक चिंताओं से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी चिंता केवल बिहार की जनता है। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आय, रोजगार, बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, कारखानों और किसानों की समस्याएँ जैसे मुद्दे ही हमारा मुख्य केंद्र बिंदु हैं। उन्होंने आगे कहा कि कोई भी सरकार आए, वह जनता की सरकार नहीं होगी।
उन्होंने सरकार के कामकाज की भी आलोचना करते हुए कहा कि पिछले दो महीनों से कोई कैबिनेट बैठक नहीं हुई है, कोई निर्णय नहीं लिया गया है। लोग परेशान हैं। प्रशासन निष्क्रिय हो गया है। भ्रष्टाचार बढ़ गया है। अपराध में वृद्धि हुई है। नौकरियों की कमी है। चुनावों के दौरान किए गए वादे पूरे नहीं किए जा रहे हैं।