विजयादशमी 2026: तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और CM रेवंत रेड्डी ने दी शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर राज्यवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और प्रदेश की शांति, समृद्धि एवं एकता के लिए प्रार्थना की। दोनों ने इस पर्व को अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में रेखांकित किया।
राज्यपाल का संदेश
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने तेलंगाना के समस्त नागरिकों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व लोगों में साहस, धर्म के प्रति निष्ठा, सदाचरण और सकारात्मक दृष्टिकोण को प्रेरित करता है। उन्होंने प्रार्थना की कि देवी दुर्गा के आशीर्वाद से तेलंगाना राज्य निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और यहाँ के नागरिकों का जीवन खुशी, आनंद और सफलता से परिपूर्ण हो।
राज्यपाल ने राज्यवासियों से अपील की कि वे एकता, आपसी सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना के साथ एक प्रगतिशील तेलंगाना के निर्माण में योगदान दें।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने विजयादशमी को तेलंगाना की संस्कृति और परंपराओं में विशेष स्थान रखने वाला पर्व बताया। उन्होंने कहा कि दशहरा साहस, धर्म, सत्य, एकता और आत्मविश्वास जैसे महान मानवीय मूल्यों की याद दिलाता है। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया कि यह पर्व हमें अहंकार, ईर्ष्या, नफरत और अन्याय जैसी नकारात्मक प्रवृत्तियों को त्यागने और प्रेम, करुणा, भाईचारे पर आधारित समाज बनाने के लिए प्रेरित करे।
उन्होंने देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध और भगवान राम की रावण पर विजय का स्मरण कराते हुए कहा, 'मेरी कामना है कि यह विजयादशमी हर घर में खुशियाँ लाए, हर परिवार को समृद्धि से भर दे और सभी को अच्छा स्वास्थ्य, धन-संपदा तथा सफलता प्रदान करे।'
तेलंगाना की अनूठी परंपरा
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना की एक विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख किया, जिसमें 'जम्मी वृक्ष' की पूजा की जाती है। इस परंपरा में वृक्ष की पत्तियों को 'सोना' मानकर बड़ों को भेंट की जाती है और उनका आशीर्वाद लिया जाता है। उन्होंने बताया कि यह रीति प्रकृति के प्रति सम्मान और बुजुर्गों के प्रति आदर का संदेश देती है — एक ऐसी परंपरा जो पीढ़ियों से तेलंगाना की पहचान का हिस्सा रही है।
पर्व का महत्त्व
विजयादशमी — जिसे दशहरा के नाम से भी जाना जाता है — भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पर्व नवरात्रि के समापन पर मनाया जाता है और देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग परंपराओं के साथ इसे मनाए जाने की सदियों पुरानी परिपाटी रही है। तेलंगाना में यह पर्व सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक माना जाता है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री के इन संदेशों ने राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को सुदृढ़ करने की आकांक्षा को रेखांकित किया है — और उम्मीद है कि यह भावना उत्सव के उत्साह के साथ-साथ नागरिक जीवन में भी परिलक्षित होगी।