18 अक्टूबर 2026
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सद्दुला बथुकम्मा 2026: राज्यपाल शुक्ला और सीएम रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना की महिलाओं को दी बधाई

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सद्दुला बथुकम्मा 2026: राज्यपाल शुक्ला और सीएम रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना की महिलाओं को दी बधाई

सारांश

सद्दुला बथुकम्मा 2026 पर तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने महिलाओं को बधाई दी। दोनों नेताओं ने इस नौ दिवसीय पर्व को प्रकृति-पूजा, सांस्कृतिक गौरव और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।

मुख्य बातें

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और मुख्यमंत्री ए.
रेवंत रेड्डी ने 18 अक्टूबर 2026 को 'सद्दुला बथुकम्मा' पर तेलंगाना की महिलाओं को बधाई दी।
राज्यपाल ने पर्व को तेलंगाना की संस्कृति, प्रकृति-पूजा और महिलाओं के आत्म-सम्मान का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री रेड्डी ने नौ दिवसीय बथुकम्मा उत्सव को सांस्कृतिक समृद्धि और महिला एकता का उत्सव कहा।
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण के लिए कल्याणकारी एवं विकास कार्यक्रम जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
'सद्दुला बथुकम्मा' बथुकम्मा महोत्सव का अंतिम एवं सबसे भव्य दिन होता है, जिसमें फूलों की रचनाओं का जलाशयों में विसर्जन किया जाता है।

तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला और मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 18 अक्टूबर 2026 को 'सद्दुला बथुकम्मा' के पर्व पर राज्य की महिलाओं एवं समस्त नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। यह त्योहार तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान का सबसे जीवंत प्रतीक माना जाता है, जो प्रकृति की आराधना और महिलाओं के आत्म-सम्मान को समर्पित है।

राज्यपाल का संदेश

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने 'सद्दुला बथुकम्मा' को तेलंगाना की संस्कृति, परंपराओं की भव्यता और प्रकृति-पूजा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि फूलों से 'बथुकम्मा' को सजाना और 'गौराम्मा' (देवी गौरी) की आराधना करना मानव एवं प्रकृति के अटूट संबंध को रेखांकित करता है।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि यह पर्व समाज में भक्ति भाव, सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और सामाजिक एकता को प्रगाढ़ करता है। उन्होंने देवी से प्रार्थना की कि तेलंगाना में हर घर सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य से भरा रहे।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी का संबोधन

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने 'सद्दुला बथुकम्मा' को तेलंगाना की संस्कृति एवं परंपराओं का सच्चा प्रतिनिधि बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश की महिलाएँ और बालिकाएँ इस पर्व को गीत, नृत्य और रंग-बिरंगी फूलों की भव्य रचनाओं के साथ उल्लासपूर्वक मनाएँगी।

मुख्यमंत्री ने कामना की कि 'फूलों का यह त्योहार' हर परिवार में समृद्धि, शांति और कल्याण लेकर आए तथा तेलंगाना की सांस्कृतिक विरासत की भव्यता आने वाली पीढ़ियों तक अनुस्यूत रहे। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि पूरे राज्य में नौ दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में बथुकम्मा को असाधारण उत्साह के साथ मनाया जाता है।

महिला सशक्तिकरण पर जोर

मुख्यमंत्री रेड्डी ने इस अवसर पर दोहराया कि उनकी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई कल्याणकारी एवं विकासात्मक कार्यक्रम संचालित करने के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने बथुकम्मा पर्व को केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि महिलाओं की एकता और सामाजिक मूल्यों के उत्सव के रूप में रेखांकित किया।

सद्दुला बथुकम्मा का महत्त्व

'सद्दुला बथुकम्मा' बथुकम्मा उत्सव का समापन दिन होता है, जो तेलंगाना में नौ दिनों तक मनाया जाता है। इस दिन महिलाएँ फूलों से सजी बथुकम्मा को जलाशयों में विसर्जित करती हैं — यह प्रकृति को वापस अर्पण करने का प्रतीकात्मक कार्य है। यह पर्व हैदराबाद सहित पूरे तेलंगाना में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है और राज्य की सांस्कृतिक अस्मिता से गहराई से जुड़ा हुआ है।

आगामी दिनों में राज्य सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण से जुड़ी घोषणाओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता फिर से दोहराई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तेलंगाना की राजनीतिक पृष्ठभूमि में यह संकेत देती है कि सांस्कृतिक पर्वों को लेकर राज्य में आम सहमति कितनी गहरी है। मुख्यमंत्री रेड्डी का महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों का उल्लेख एक सुनियोजित राजनीतिक संदेश भी है — बथुकम्मा जैसे जन-उत्सव का मंच कल्याणकारी नीतियों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का अवसर देता है। यह देखना प्रासंगिक होगा कि पर्व के बाद सरकार की ओर से महिलाओं के लिए कोई ठोस नीतिगत घोषणा आती है या यह केवल शुभकामनाओं तक सीमित रहती है।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सद्दुला बथुकम्मा क्या है और इसे कब मनाया जाता है?
'सद्दुला बथुकम्मा' तेलंगाना के नौ दिवसीय बथुकम्मा महोत्सव का समापन दिन है, जो हर वर्ष दशहरे के आसपास मनाया जाता है। इस दिन महिलाएँ रंग-बिरंगे फूलों से सजी बथुकम्मा की रचनाओं को जलाशयों में विसर्जित करती हैं, जो प्रकृति को अर्पण का प्रतीक है।
तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने बथुकम्मा पर क्या कहा?
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने 'सद्दुला बथुकम्मा' को तेलंगाना की संस्कृति, परंपराओं और महिलाओं के आत्म-सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने फूलों से बथुकम्मा सजाने और गौराम्मा (देवी गौरी) की पूजा को मानव-प्रकृति के अटूट संबंध की अभिव्यक्ति कहा।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बथुकम्मा 2026 पर क्या संदेश दिया?
मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बथुकम्मा को तेलंगाना की संस्कृति का सच्चा प्रतीक बताया और महिलाओं से इसे गीत, नृत्य और उल्लास के साथ मनाने की अपील की। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए कल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रति प्रतिबद्ध है।
बथुकम्मा त्योहार तेलंगाना की महिलाओं के लिए क्यों खास है?
बथुकम्मा तेलंगाना की महिलाओं का सबसे प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव है, जो उनकी एकता, प्रकृति से जुड़ाव और सामाजिक पहचान को उजागर करता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में महिलाएँ सामूहिक रूप से गीत गाती हैं, नृत्य करती हैं और फूलों की भव्य रचनाएँ तैयार करती हैं।
2026 में सद्दुला बथुकम्मा किस तारीख को मनाया गया?
2026 में 'सद्दुला बथुकम्मा' 18 अक्टूबर को मनाया गया। इसी दिन तेलंगाना के राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने राज्यभर की महिलाओं को बधाई संदेश दिए।
राष्ट्र प्रेस
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