अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव 2026 का उद्घाटन, 347 से अधिक देवी-देवता रथ यात्रा में शामिल
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने 21 अक्टूबर 2026 को कुल्लू के ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में सप्ताह भर चलने वाले अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। भगवान रघुनाथ की पारंपरिक रथ यात्रा के साथ आरंभ हुए इस उत्सव में कुल्लू घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से 347 से अधिक देवी-देवताओं की सहभागिता रही, जो इसे हिमाचल प्रदेश के सबसे भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में से एक बनाती है।
महोत्सव का शुभारंभ और रथ यात्रा
उत्सव की परंपरागत शुरुआत भगवान रघुनाथ की भव्य रथ यात्रा से हुई, जिसमें घाटी के कोने-कोने से आए देवी-देवताओं के विग्रहों ने हिस्सा लिया। यह यात्रा धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के समृद्ध संगम की जीवंत झाँकी प्रस्तुत करती है। राज्यपाल की पत्नी बिंदू गुप्ता भी इस अवसर पर उपस्थित रहीं। ढालपुर मैदान पहुँचने पर राज्यपाल का भव्य स्वागत किया गया।
राज्यपाल का संदेश: देव संस्कृति और सामाजिक सद्भाव
उपस्थित जनसमूह को शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल गुप्ता ने कहा कि कुल्लू दशहरा महज एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह हिमाचल प्रदेश की देव संस्कृति, लोक परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक सद्भाव की जीवंत अभिव्यक्ति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देव और लोक संस्कृति का यह अनूठा संगम इस उत्सव को राज्य की सांस्कृतिक पहचान का स्थायी प्रतीक बनाता है।
सदियों पुरानी परंपराओं के संरक्षण पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक विरासत भावी पीढ़ियों को शक्ति, मूल्य और मार्गदर्शन प्रदान करती है। विजयादशमी के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम का जीवन और आदर्श समाज को सत्य, कर्तव्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
नशे, हिंसा और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आह्वान
राज्यपाल ने उपस्थित लोगों से सामाजिक बुराइयों — विशेष रूप से नशीली दवाओं के दुरुपयोग, हिंसा और भ्रष्टाचार — के विरुद्ध एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने नागरिकों से 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना को अपनाते हुए राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का आग्रह किया। यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश में युवाओं के बीच मादक पदार्थों की बढ़ती समस्या चिंता का विषय बनी हुई है।
पर्यटन, रोज़गार और पर्यावरण पर ज़ोर
विकसित भारत के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए गुप्ता ने नागरिकों — विशेषकर युवाओं — को नए कौशल हासिल करने, उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक दर्शकों के सामने प्रस्तुत करने के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और उद्यमिता के अवसर पैदा करने का महत्वपूर्ण मंच है।
पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पहाड़, जंगल, नदियाँ और जैव विविधता अमूल्य प्राकृतिक संपदा हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि त्योहार की प्रामाणिकता की रक्षा की जाए और इसके आर्थिक लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुँचना सुनिश्चित हो।
प्रदर्शनियों का उद्घाटन और भगवान रघुनाथ से प्रार्थना
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने विभिन्न सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया और उनके स्टालों का अवलोकन किया। उन्होंने भगवान रघुनाथ से प्रार्थना कर हिमाचल प्रदेश और राष्ट्र की शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की। महोत्सव के सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को देखते हुए इस सप्ताह भर के उत्सव से राज्य में पर्यटन और स्थानीय व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है।