कुल्लू दशहरा 2026: भगवान रघुनाथ की रथयात्रा से 7 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय उत्सव का भव्य आगाज़
सारांश
मुख्य बातें
कुल्लू के ढालपुर मैदान में भगवान रघुनाथ की भव्य रथयात्रा के साथ 7 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव का 21 अक्टूबर 2026 को शुभारंभ हुआ। जय श्रीराम के उद्घोषों से घाटी गूंज उठी, जब हज़ारों श्रद्धालुओं ने भगवान रघुनाथ का रथ खींचा। अगले सात दिनों तक भगवान रघुनाथ ढालपुर स्थित अपने अस्थायी शिविर में विराजमान रहेंगे और लंका दहन के पश्चात अपने मूल मंदिर वापस लौटेंगे।
रथयात्रा का मुख्य घटनाक्रम
बुधवार दोपहर लगभग 4 बजे भगवान रघुनाथ रघुनाथपुर से ढालपुर के रथ मैदान पहुँचे और अपने सुसज्जित रथ पर विराजे। इस अवसर पर भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह और राज परिवार के सदस्य उनके साथ उपस्थित रहे। ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने रथ के समक्ष नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया।
रथयात्रा में माता हिडिंबा, देवता बिजली महादेव, देवता आदि ब्रह्म, देवता कार्तिक स्वामी, देवता नाग धूमल, देवता वीर नाथ, देवता बीर केला, माता गायत्री, माता त्रिपुर सुंदरी, माता काली ओडी सहित घाटी के दर्जनों देवी-देवताओं ने भाग लिया। यह कुल्लू दशहरे की विशिष्ट पहचान है — देश के किसी अन्य दशहरे में इस तरह सैकड़ों देवी-देवताओं का एक साथ समागम नहीं होता।
देव परंपरा और सांस्कृतिक महत्त्व
भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह के अनुसार, उत्सव के दौरान अस्थायी शिविर में भगवान रघुनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी और श्रद्धालुओं को प्रतिदिन दर्शन का लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि लंका दहन के पश्चात ही भगवान रघुनाथ पुनः अपने मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे।
गौरतलब है कि कुल्लू दशहरा पारंपरिक रूप से विजयादशमी के दूसरे दिन से आरंभ होता है, जो इसे देश के अन्य दशहरा आयोजनों से अलग बनाता है। यह परंपरा 17वीं शताब्दी से चली आ रही है, जब कुल्लू के राजा जगत सिंह ने अयोध्या से भगवान रघुनाथ की मूर्ति मँगवाकर उन्हें कुल्लू का इष्टदेव घोषित किया था।
राज्यपाल और प्रशासन की प्रतिक्रिया
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने रथयात्रा में भाग लेते हुए कहा कि दशहरा उत्सव देवी-देवताओं से जुड़ी अत्यंत प्राचीन परंपरा है। उन्होंने कहा कि भगवान रघुनाथ की रथयात्रा देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे देवी-देवता स्वर्ग से सीधे धरती पर उतर आए हों। राज्यपाल ने बताया कि इस उत्सव में देश ही नहीं, विदेश से भी पर्यटक ढालपुर पहुँचते हैं। शाम को कला केंद्र में राज्यपाल द्वारा सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ भी किया जाएगा।
देश-विदेश के पर्यटकों का उत्साह
लखनऊ से आए पर्यटक मोहित ने बताया कि कुल्लू दशहरे के बारे में वे पहले से सुनते आए थे, और इस वर्ष प्रत्यक्ष भाग लेने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि हज़ारों लोगों का देवी-देवताओं के साथ चलना एक अद्भुत और मनमोहक दृश्य है।
मुंबई से आई पर्यटक जेनिफर ने कहा कि रथयात्रा देखकर वे भावुक हो गईं और जीवन में पहली बार हिमालय के इतने देवी-देवताओं के एक साथ दर्शन करने का सौभाग्य मिला। फ्रांस से आए पर्यटक एलेक्स ने बताया कि कुल्लू दशहरे की परंपराएँ अनूठी हैं और यहाँ की देव संस्कृति ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। वे आने वाले दिनों में ढालपुर में विभिन्न देवी-देवताओं के शिविरों में भी जाएँगे।
आगे का कार्यक्रम
अगले सात दिनों तक ढालपुर मैदान में सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य और देव-दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा। उत्सव के अंतिम दिन लंका दहन के साथ इसका समापन होगा, जिसके पश्चात भगवान रघुनाथ की वापसी शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है।