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बहुड़ा यात्रा 2025: पुरी में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब, भगवान जगन्नाथ की घर वापसी आज

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बहुड़ा यात्रा 2025: पुरी में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब, भगवान जगन्नाथ की घर वापसी आज

सारांश

नौ दिन मौसी के घर विराजने के बाद भगवान जगन्नाथ आज बहुड़ा यात्रा में घर लौट रहे हैं। पुरी में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा है — देश-विदेश से आए भक्त तड़के से रथ मार्ग पर डटे हैं। 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से पूरा शहर गूँज रहा है।

मुख्य बातें

बहुड़ा यात्रा — रथयात्रा का वापसी पर्व — शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को आषाढ़ शुक्ल दशमी पर पुरी में आयोजित हो रही है।
भगवान जगन्नाथ , बलभद्र , देवी सुभद्रा और सुदर्शन चक्र नौ दिन श्री गुंडिचा मंदिर में रहने के बाद अपने मूल धाम लौट रहे हैं।
देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु तड़के दो-तीन बजे से ही रथ मार्ग पर दर्शन की प्रतीक्षा में मौजूद हैं।
कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों से पहली बार आए श्रद्धालुओं ने इस अनुभव को 'जीवन का सबसे यादगार पल' बताया।
बहुड़ा यात्रा के बाद सुना बेशा (स्वर्ण वेशभूषा दर्शन) के साथ वार्षिक उत्सव का समापन होगा।

भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा का सबसे भावपूर्ण पड़ाव — बहुड़ा यात्राशुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को आषाढ़ शुक्ल दशमी के पावन अवसर पर पुरी में संपन्न हो रही है। नौ दिनों तक श्री गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहने के बाद भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज भगवान बलभद्र, भगिनी देवी सुभद्रा और सुदर्शन चक्र अपने-अपने भव्य रथों पर आरूढ़ होकर मूल धाम श्री जगन्नाथ मंदिर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालु तड़के से ही रथ मार्ग पर डटे हैं और 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से पुरी की गलियाँ गूँज रही हैं।

बहुड़ा यात्रा का धार्मिक महत्व

बहुड़ा यात्रा को रथयात्रा का 'वापसी पर्व' कहा जाता है। मान्यता है कि श्री गुंडिचा मंदिर भगवान की मौसी का घर है, जहाँ वे प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से दशमी तक नौ दिन विश्राम करते हैं। इस वापसी यात्रा को 'उल्टा रथ' भी कहा जाता है। परंपरागत वैदिक अनुष्ठानों और धार्मिक रीति-रिवाजों के बाद रथ खींचने का शुभारंभ होता है — यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए मोक्षदायी माना जाता है। गौरतलब है कि रथ की रस्सी को एक बार भी स्पर्श करना सौ यज्ञों के फल के समतुल्य माना जाता है।

श्रद्धालुओं का उमड़ा आस्था का सैलाब

पुरी की सड़कों पर सुबह दो-तीन बजे से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होनी शुरू हो गई थी। पहली बार दर्शन के लिए पुरी पहुँचे एक श्रद्धालु ने बताया कि उनकी माँ कुछ महीने पहले यहाँ आई थीं और उन्हीं की प्रेरणा से वे भी परिवार सहित आए। उन्होंने कहा, 'यहाँ का आध्यात्मिक वातावरण इतना अद्भुत है कि वापस जाने का मन ही नहीं करता। जगत के नाथ वर्ष में एक बार स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने बाहर आते हैं — यह अनुभव शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।'

कर्नाटक से आई एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि वे वर्षों से पुरी की रथयात्रा के बारे में सुनती आ रही थीं और इस बार पहली बार इस ऐतिहासिक आयोजन की प्रत्यक्षदर्शी बनी हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ का माहौल 'अत्यंत दिव्य और अनुशासित' है। कर्नाटक से ही आई एक अन्य महिला श्रद्धालु ने बहुड़ा यात्रा को 'दुनिया का दुर्लभ अवसर' बताते हुए कहा कि अपने शहर में छोटी रथयात्रा देखने के बाद से पुरी आने का सपना था, जो आज साकार हुआ।

पारंपरिक अनुष्ठान और प्रशासनिक तैयारी

बहुड़ा यात्रा के अवसर पर पुरी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने रथ मार्ग पर बैरिकेडिंग और यातायात प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की है। पारंपरिक वैदिक अनुष्ठानों के बाद सेवायतों द्वारा रथ खींचने की रस्म आरंभ होती है, जिसके बाद श्रद्धालु रस्सी थामते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।

आम जनता पर असर और अनुभव

एक अन्य महिला श्रद्धालु ने बताया कि उन्होंने इस यात्रा के वीडियो और तस्वीरें अपने मोबाइल में सहेजी हैं, जो घर लौटकर परिवार और मित्रों के साथ साझा करेंगी। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष वे और अधिक लोगों को पुरी लाने का प्रयास करेंगी। यह भावना इस बात की गवाह है कि बहुड़ा यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह पर्यटन और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी शक्तिशाली माध्यम बन चुकी है।

आगे क्या

बहुड़ा यात्रा के बाद सुना बेशा (स्वर्ण वेशभूषा) का आयोजन होगा, जिसमें भगवान जगन्नाथ को सोने के आभूषणों से सजाया जाएगा — यह दृश्य भी लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इसके बाद भगवान औपचारिक रूप से श्री जगन्नाथ मंदिर में पुनः विराजमान होंगे और वार्षिक रथयात्रा उत्सव का समापन होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की सामूहिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का जीवंत प्रमाण है — जहाँ कर्नाटक से ओडिशा तक के श्रद्धालु एक ही रथ की रस्सी थामते हैं। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब धार्मिक पर्यटन भारत के आर्थिक एजेंडे में केंद्रीय स्थान पा रहा है। हालाँकि, लाखों की भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा की चुनौती हर वर्ष की तरह इस बार भी परीक्षा में है। असली सफलता तब होगी जब आस्था और व्यवस्था दोनों साथ चलें।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बहुड़ा यात्रा क्या है और यह कब होती है?
बहुड़ा यात्रा पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा का वापसी पर्व है, जो आषाढ़ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा नौ दिन श्री गुंडिचा मंदिर में रहने के बाद रथों पर सवार होकर मूल धाम श्री जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं।
2025 में बहुड़ा यात्रा किस तारीख को है?
2025 में बहुड़ा यात्रा शुक्रवार, 25 जुलाई को आषाढ़ शुक्ल दशमी के अवसर पर पुरी में आयोजित हो रही है।
बहुड़ा यात्रा का धार्मिक महत्व क्या है?
मान्यता है कि रथ की रस्सी को एक बार स्पर्श करना सौ यज्ञों के फल के समान है। यह यात्रा मोक्षदायी मानी जाती है और इसे 'उल्टा रथ' भी कहा जाता है। भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार इस अवसर पर स्वयं भक्तों के बीच आते हैं।
बहुड़ा यात्रा के बाद क्या होता है?
बहुड़ा यात्रा के बाद 'सुना बेशा' का आयोजन होता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ को सोने के आभूषणों से सजाया जाता है। इसके बाद भगवान औपचारिक रूप से श्री जगन्नाथ मंदिर में पुनः विराजमान होते हैं और वार्षिक रथयात्रा उत्सव का समापन होता है।
पुरी बहुड़ा यात्रा में कहाँ से श्रद्धालु आते हैं?
बहुड़ा यात्रा में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं। इस वर्ष कर्नाटक सहित विभिन्न राज्यों से पहली बार दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या देखी गई है। विदेशों से भी भक्त इस आयोजन में भाग लेने पुरी पहुँचते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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