पुरी में बहुदा यात्रा 2025: 'पहांडी बीजे' से हुआ शुभारंभ, 7 लाख श्रद्धालु उमड़े
सारांश
मुख्य बातें
पुरी में 24 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की बहुदा यात्रा का शुभारंभ 'पहांडी बीजे' अनुष्ठान के साथ हुआ, जिसमें करीब 7 लाख श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बनने के लिए पुरी पहुँचे। नौ दिनों के प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र, बहन देवी सुभद्रा और दिव्य आयुध चक्रराज सुदर्शन को गुंडिचा मंदिर से उनके-अपने रथों पर विराजमान कराया गया।
बहुदा यात्रा का धार्मिक महत्व
बहुदा यात्रा वह पावन प्रसंग है जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा नौ दिनों के गुंडिचा मंदिर-प्रवास के बाद अपने मुख्य धाम श्री जगन्नाथ मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा रथ यात्रा उत्सव का अभिन्न और समापन-पर्व है, जिसे 'उलटा रथ' भी कहा जाता है।
'पहांडी बीजे' अनुष्ठान के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवताओं को गुंडिचा मंदिर के आड़प मंडप से उनके रथों तक लाया गया। पूरे पुरी नगर में 'जय जगन्नाथ' और 'हरि बोल' के जयघोष गूँजते रहे।
मुख्य अनुष्ठान और परंपराएँ
मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया, जबकि ओडिशी कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर भगवान के नाम का संकीर्तन करते और नृत्य करते नज़र आए।
परंपरा के अनुसार, देवताओं के रथों पर विराजमान होने के बाद पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंह देव स्वर्ण झाड़ू से रथों की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे — इस रस्म को 'छेरा पहंरा' कहा जाता है। इसके बाद श्रद्धालु तीनों रथों को गुंडिचा मंदिर से श्री जगन्नाथ मंदिर तक खींचेंगे।
सुरक्षा व्यवस्था
केंद्रीय रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) सत्यजीत नाइक ने बताया कि भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, रथ खींचने की व्यवस्था, रात्रि गश्त और तटीय सुरक्षा के लिए 223 पुलिस बलों की तैनाती की गई है। उन्होंने कहा कि बहुदा यात्रा और 'सुना बेशा' के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत किया गया है।
मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन सभी धार्मिक अनुष्ठानों को सुचारु रूप से संपन्न कराने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
सुना बेशा की तैयारी
आईजीपी के अनुसार, शुक्रवार को बहुदा यात्रा के दौरान करीब 7 लाख श्रद्धालुओं के पुरी पहुँचने का अनुमान था। वहीं शनिवार को होने वाले 'सुना बेशा' अनुष्ठान के दौरान 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई गई है। 'सुना बेशा' वह दुर्लभ अनुष्ठान है जिसमें देवताओं को स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित किया जाता है — यह दृश्य लाखों भक्तों को प्रतिवर्ष खींच लाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा पर्यटन विभाग रथ यात्रा को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और प्रमुखता से स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। आगामी 'सुना बेशा' के साथ पुरी में उत्सव का माहौल अपने चरम पर पहुँचने की उम्मीद है।