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पुरी में बहुदा यात्रा 2025: 'पहांडी बीजे' से हुआ शुभारंभ, 7 लाख श्रद्धालु उमड़े

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पुरी में बहुदा यात्रा 2025: 'पहांडी बीजे' से हुआ शुभारंभ, 7 लाख श्रद्धालु उमड़े

सारांश

नौ दिनों के गुंडिचा प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ की घर-वापसी का पर्व — बहुदा यात्रा — पुरी में 'पहांडी बीजे' के साथ शुरू हुआ। 7 लाख श्रद्धालु उमड़े और शनिवार के 'सुना बेशा' के लिए 10 लाख से अधिक की उम्मीद है।

मुख्य बातें

पुरी में 24 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की बहुदा यात्रा का शुभारंभ ' पहांडी बीजे ' अनुष्ठान के साथ हुआ।
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र , देवी सुभद्रा और चक्रराज सुदर्शन को गुंडिचा मंदिर से उनके रथों पर विराजमान कराया गया।
बहुदा यात्रा में करीब 7 लाख और शनिवार के ' सुना बेशा ' में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने का अनुमान।
गजपति महाराज दिव्य सिंह देव ' छेरा पहंरा ' रस्म में स्वर्ण झाड़ू से रथों की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे।
आईजीपी सत्यजीत नाइक के अनुसार, सुरक्षा के लिए 223 पुलिस बल तैनात किए गए हैं।

पुरी में 24 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की बहुदा यात्रा का शुभारंभ 'पहांडी बीजे' अनुष्ठान के साथ हुआ, जिसमें करीब 7 लाख श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बनने के लिए पुरी पहुँचे। नौ दिनों के प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र, बहन देवी सुभद्रा और दिव्य आयुध चक्रराज सुदर्शन को गुंडिचा मंदिर से उनके-अपने रथों पर विराजमान कराया गया।

बहुदा यात्रा का धार्मिक महत्व

बहुदा यात्रा वह पावन प्रसंग है जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा नौ दिनों के गुंडिचा मंदिर-प्रवास के बाद अपने मुख्य धाम श्री जगन्नाथ मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा रथ यात्रा उत्सव का अभिन्न और समापन-पर्व है, जिसे 'उलटा रथ' भी कहा जाता है।

'पहांडी बीजे' अनुष्ठान के दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच देवताओं को गुंडिचा मंदिर के आड़प मंडप से उनके रथों तक लाया गया। पूरे पुरी नगर में 'जय जगन्नाथ' और 'हरि बोल' के जयघोष गूँजते रहे।

मुख्य अनुष्ठान और परंपराएँ

मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया, जबकि ओडिशी कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर भगवान के नाम का संकीर्तन करते और नृत्य करते नज़र आए।

परंपरा के अनुसार, देवताओं के रथों पर विराजमान होने के बाद पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंह देव स्वर्ण झाड़ू से रथों की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे — इस रस्म को 'छेरा पहंरा' कहा जाता है। इसके बाद श्रद्धालु तीनों रथों को गुंडिचा मंदिर से श्री जगन्नाथ मंदिर तक खींचेंगे।

सुरक्षा व्यवस्था

केंद्रीय रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) सत्यजीत नाइक ने बताया कि भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, रथ खींचने की व्यवस्था, रात्रि गश्त और तटीय सुरक्षा के लिए 223 पुलिस बलों की तैनाती की गई है। उन्होंने कहा कि बहुदा यात्रा और 'सुना बेशा' के दौरान भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत किया गया है।

मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन सभी धार्मिक अनुष्ठानों को सुचारु रूप से संपन्न कराने और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क है।

सुना बेशा की तैयारी

आईजीपी के अनुसार, शुक्रवार को बहुदा यात्रा के दौरान करीब 7 लाख श्रद्धालुओं के पुरी पहुँचने का अनुमान था। वहीं शनिवार को होने वाले 'सुना बेशा' अनुष्ठान के दौरान 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई गई है। 'सुना बेशा' वह दुर्लभ अनुष्ठान है जिसमें देवताओं को स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित किया जाता है — यह दृश्य लाखों भक्तों को प्रतिवर्ष खींच लाता है।

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा पर्यटन विभाग रथ यात्रा को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और प्रमुखता से स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। आगामी 'सुना बेशा' के साथ पुरी में उत्सव का माहौल अपने चरम पर पहुँचने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक क्षमता की वार्षिक परीक्षा भी है। 223 पुलिस बलों की तैनाती और लाखों की भीड़ प्रबंधन की चुनौती यह बताती है कि इस पर्व की विशालता अब स्थानीय नहीं, राष्ट्रीय स्तर की है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में रथ यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन की चूकों से हादसे हो चुके हैं — इसलिए इस बार प्रशासन की सतर्कता स्वागत योग्य है, परंतु 'सुना बेशा' में 10 लाख से अधिक की भीड़ के लिए यह व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं, यह देखना होगा।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बहुदा यात्रा क्या है और यह कब होती है?
बहुदा यात्रा भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की गुंडिचा मंदिर से श्री जगन्नाथ मंदिर वापसी की यात्रा है, जो रथ यात्रा के नौ दिन बाद होती है। इसे 'उलटा रथ' भी कहते हैं। 2025 में यह 24 जुलाई को पुरी में आयोजित हुई।
'पहांडी बीजे' अनुष्ठान क्या होता है?
'पहांडी बीजे' वह परंपरागत अनुष्ठान है जिसमें देवताओं को वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ध्वनि के बीच मंदिर के आड़प मंडप से उनके रथों तक लाया जाता है। यह बहुदा यात्रा का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
'छेरा पहंरा' रस्म क्या है?
'छेरा पहंरा' वह अनुष्ठान है जिसमें पुरी के गजपति महाराज दिव्य सिंह देव स्वर्ण झाड़ू से रथों की प्रतीकात्मक सफाई करते हैं। यह रस्म देवताओं के रथों पर विराजमान होने के बाद रथ खींचने से पहले संपन्न की जाती है।
'सुना बेशा' अनुष्ठान कब होगा और इसमें कितने श्रद्धालु आने की उम्मीद है?
'सुना बेशा' बहुदा यात्रा के अगले दिन यानी शनिवार को आयोजित होगा, जिसमें देवताओं को स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित किया जाता है। आईजीपी सत्यजीत नाइक के अनुसार, इस अनुष्ठान के दौरान 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पुरी पहुँचने की संभावना है।
बहुदा यात्रा के दौरान सुरक्षा के क्या इंतज़ाम किए गए हैं?
केंद्रीय रेंज के आईजीपी सत्यजीत नाइक के अनुसार, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, रथ खींचने की व्यवस्था, रात्रि गश्त और तटीय सुरक्षा के लिए 223 पुलिस बलों की तैनाती की गई है। मंदिर और जिला प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है।
राष्ट्र प्रेस
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