18 जुलाई 2026
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जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: पुरी में लाखों भक्तों का सैलाब, गुंडिचा मंदिर के सामने दिव्य दर्शन

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जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: पुरी में लाखों भक्तों का सैलाब, गुंडिचा मंदिर के सामने दिव्य दर्शन

सारांश

पुरी की गलियाँ इस बार भी लाखों कंठों के जयकारों से गूँज उठीं। जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 में देश-विदेश के श्रद्धालु उमड़े — हंगरी से आई भक्त की आँखें भर आईं, तो स्थानीय भक्तों ने विश्व शांति की प्रार्थना की। यह यात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, सामाजिक समरसता का जीवंत उत्सव है।

मुख्य बातें

18 जुलाई 2026 को पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर के सामने दर्शन के लिए एकत्रित हुए।
भगवान जगन्नाथ , भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने भव्य रथों पर विराजमान हैं — यह वर्ष का एकमात्र अवसर है जब देवता मंदिर के गर्भगृह से बाहर आते हैं।
यात्रा 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) को जगन्नाथ मंदिर से आरंभ हुई और गुंडिचा मंदिर तक पहुँची।
हंगरी की भक्त राधिका लीला देवी सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक उत्सव में भाग लिया।
पुरी पुलिस ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक इंतज़ाम किए।
कुछ दिनों बाद बहुड़ा यात्रा के साथ देवता जगन्नाथ मंदिर वापस लौटेंगे।

ओडिशा के पुरी में शनिवार, 18 जुलाई 2026 को विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य दर्शन के लिए उमड़ पड़े। तीनों देवता गुंडिचा मंदिर के सामने अपने भव्य रथों पर विराजमान हैं, और पूरा वातावरण भक्ति एवं आस्था के रंग में डूबा हुआ है।

मुख्य घटनाक्रम

वार्षिक जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ गुरुवार, 16 जुलाई 2026 को पुरी में हुआ। इस सदियों पुराने उत्सव में देश के कोने-कोने से और विदेशों से भी तीर्थयात्री, संत एवं पर्यटक बड़ी संख्या में पहुँचे। भक्त भजन गाते, प्रार्थना करते और आशीर्वाद माँगते नज़र आए। हज़ारों श्रद्धालुओं ने भक्तिपूर्ण मंत्रोच्चार और धार्मिक गीतों के बीच विशाल लकड़ी के रथों को खींचा।

यह यात्रा जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक की पवित्र यात्रा का प्रतीक है। परंपरा के अनुसार, तीनों देवी-देवता यहाँ कुछ दिनों तक अपनी मौसी के घर रुकते हैं।

धार्मिक महत्व

रथ यात्रा का विशेष महत्व इसलिए है क्योंकि यह वर्ष का एकमात्र अवसर होता है जब जगन्नाथ मंदिर के मुख्य देवता गर्भगृह से बाहर निकलकर पुरी की सड़कों पर यात्रा करते हैं। इस अवसर पर जीवन के हर क्षेत्र से आए भक्त — चाहे वे किसी भी सामाजिक या सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के हों — भगवान का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। तीनों देवी-देवताओं को भाई-बहन के रूप में पूजा जाता है और उन्हें शानदार ढंग से सजाए गए रथों पर विधि-विधान के साथ विराजमान किया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय भक्तों की आस्था

इस वर्ष की रथ यात्रा में विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। हंगरी से आई भक्त राधिका लीला देवी ने रथ यात्रा के गहरे आध्यात्मिक अनुभव को साझा किया। उन्होंने कहा, 'जब मैं यहाँ भक्तों को देखती हूँ, तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मैं उनके चेहरों पर कई तरह के भाव देख सकती हूँ — कुछ रो रहे हैं, तो कुछ मुस्कुरा रहे हैं।'

राधिका लीला देवी ने आगे कहा, 'मेरी आँखों में आँसू सिर्फ इसलिए नहीं आते कि मैं भगवान से प्यार करती हूँ, बल्कि इसलिए भी कि मैं उनसे पूछती रहती हूँ — मैं आपके लिए वैसा प्यार कब महसूस कर पाऊँगी। भगवान सबसे शक्तिशाली चुंबक हैं, इससे ज़्यादा शक्तिशाली कुछ भी नहीं है।'

सुरक्षा और प्रशासन की व्यवस्था

पुरी पुलिस ने उत्सव के सुचारू संचालन के लिए व्यापक प्रबंध किए। अहम स्थानों पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए और भीड़ की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए अधिकारी सतर्क रहे। एक स्थानीय भक्त ने बताया कि प्रशासन की ओर से इंतज़ाम संतोषजनक हैं और उन्होंने भगवान से सभी को सद्बुद्धि देने तथा विश्व में शांति लाने की प्रार्थना की।

आगे की यात्रा

परंपरा के अनुसार, गुंडिचा मंदिर में कुछ दिन विराजने के बाद तीनों देवी-देवता जगन्नाथ मंदिर वापस लौटेंगे — इस वापसी यात्रा को बहुड़ा यात्रा कहा जाता है। हर वर्ष यह आयोजन भारत और विश्व भर के लाखों श्रद्धालुओं को एक सूत्र में पिरोता है, और इसे देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सवों में स्थान प्राप्त है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वर्ग और राष्ट्रीयता की सीमाएँ एक ही रथ की रस्सी थामने में विलीन हो जाती हैं। हंगरी की राधिका लीला देवी जैसे अंतरराष्ट्रीय भक्तों की उपस्थिति यह भी रेखांकित करती है कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं की वैश्विक पहुँच लगातार गहरी हो रही है। हालाँकि, लाखों की भीड़ और सीमित संसाधनों के बीच भगदड़ जैसी दुर्घटनाओं का जोखिम हर वर्ष बना रहता है — इसलिए प्रशासनिक तैयारी की वास्तविक परीक्षा उत्सव के बाद की समीक्षा में होती है, न केवल घटना के दिन की रिपोर्टिंग में।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 कब और कहाँ शुरू हुई?
जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का आरंभ 16 जुलाई 2026 (गुरुवार) को ओडिशा के पुरी में हुआ। यह यात्रा जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक जाती है, जहाँ तीनों देवी-देवता कुछ दिन विराजते हैं।
रथ यात्रा का धार्मिक महत्व क्या है?
रथ यात्रा वर्ष का एकमात्र अवसर है जब भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकलकर पुरी की सड़कों पर यात्रा करते हैं। इस दौरान जीवन के हर क्षेत्र से आए भक्त — सामाजिक भेदभाव से परे — उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
गुंडिचा मंदिर में देवता कितने दिन रुकते हैं और वापसी कब होती है?
परंपरा के अनुसार, तीनों देवी-देवता गुंडिचा मंदिर में अपनी मौसी से मिलने के लिए कुछ दिन रुकते हैं। इसके बाद बहुड़ा यात्रा के माध्यम से वे जगन्नाथ मंदिर वापस लौटते हैं।
इस वर्ष की रथ यात्रा में विदेशी भक्त भी शामिल हुए?
हाँ, इस वर्ष हंगरी से आई भक्त राधिका लीला देवी सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं ने रथ यात्रा में भाग लिया। राधिका लीला देवी ने इस आध्यात्मिक अनुभव को अत्यंत भावपूर्ण बताते हुए कहा कि भक्तों के चेहरों पर दिखने वाले भाव उन्हें गहराई से प्रभावित करते हैं।
रथ यात्रा के दौरान पुरी में सुरक्षा के क्या इंतज़ाम किए गए?
पुरी पुलिस ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रबंध किए। अहम स्थानों पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए और अधिकारी श्रद्धालुओं की आवाजाही पर निरंतर नज़र रखे हुए रहे।
राष्ट्र प्रेस
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