बहुड़ा यात्रा 2025: 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से गूंजा पुरी, नौ दिन बाद श्रीमंदिर लौट रहे भगवान
सारांश
मुख्य बातें
पुरी में 24 जुलाई 2025 को बहुड़ा यात्रा का शुभारंभ हुआ, जब भगवान जगन्नाथ, उनके अग्रज बलभद्र और भगिनी देवी सुभद्रा नौ दिनों के प्रवास के बाद श्री गुंडिचा मंदिर से अपने मूल धाम श्रीमंदिर की ओर प्रस्थान कर रहे हैं। शुक्रवार की सुबह पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ यात्रा का आगाज़ हुआ और 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से पूरा नगर भक्तिमय हो उठा। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं।
यात्रा का आध्यात्मिक महत्व
इस पावन अवसर पर आध्यात्मिक गुरु इंद्रेश जी महाराज भी पुरी पहुंचे और उन्होंने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर भक्ति भाव से भजन गाया। यात्रा में उपस्थित संत बाबा भैरबानंद सरस्वती ने बहुड़ा यात्रा की विशिष्टता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान जगन्नाथ वर्षभर मंदिर में विराजमान रहते हैं, किंतु साल में एक बार स्वयं रथ पर सवार होकर बाहर आते हैं और प्रत्येक जाति, वर्ग तथा धर्म के व्यक्ति को दर्शन देते हैं।
उन्होंने कहा कि श्रीमंदिर में प्रवेश सभी को सुलभ नहीं है, परंतु जब भगवान स्वयं रथ पर विराजकर बाहर आते हैं तो यह उनकी मानव लीला है — समानता और करुणा का संदेश जो पूरी दुनिया को दिया जाता है। संत ने यह भी बताया कि वे वर्ष 1996 से निरंतर रथ यात्रा और बहुड़ा यात्रा में भाग ले रहे हैं और भगवान को करीब 12 फीट लंबी विशेष रूप से तैयार अगरबत्ती, दीप और धूप अर्पित करते हैं।
रेड क्रॉस स्वयंसेवकों की अथक सेवा
यात्रा को सुव्यवस्थित बनाने में भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के स्वयंसेवक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सेवा प्रशिक्षक जयंती महापात्रा ने बताया कि वर्षों की सेवा के बाद भी उन्हें कभी थकान का अनुभव नहीं होता, क्योंकि लोगों की सहायता करना उनके जीवन का उद्देश्य बन चुका है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि डिजिटल युग में भी संस्कार, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की भावना सर्वोपरि है।
रेड क्रॉस की एफएमआर स्वयंसेविका मधुमिता महापात्रा ने बताया कि वह पिछले 38 वर्षों से सेवा कार्य में संलग्न हैं। रथ यात्रा के दौरान उनकी टीम घायल या अस्वस्थ श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार देती है, स्ट्रेचर के माध्यम से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाती है और आवश्यकता पड़ने पर बचाव कार्य भी संचालित करती है। उन्होंने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ी ईश्वर सेवा है।
प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था
ओडिशा अग्निशमन एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निदेशक रमेश चंद्र माझी ने बताया कि भारी वर्षा या भीड़ की किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूर्व में ही व्यापक तैयारी कर ली गई है। पूरे यात्रा मार्ग पर 38 स्थानों पर विशेष व्यवस्था की गई है, जबकि 25 क्विक रिस्पॉन्स टीमों में करीब 125 प्रशिक्षित जवान तैनात हैं।
नगर निगम और प्रशासन की टीमें जल निकासी, मार्गों की निगरानी और भीड़ प्रबंधन पर लगातार कार्यरत हैं। माझी ने बताया कि अब तक सैकड़ों लोगों को तत्काल सहायता पहुंचाई जा चुकी है और अधिकांश को अस्पताल तक ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे अनावश्यक रूप से भीड़ में न जाएं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
दूर-दूर से आए भक्तों का अनुभव
कर्नाटक से पहली बार पुरी पहुंचीं श्रद्धालु ऋषिका आर्या ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से उनकी इच्छा थी कि वह रथ यात्रा में भाग लें। उन्होंने कहा कि इस बार उन्हें ऐसा अनुभव हुआ जैसे स्वयं भगवान जगन्नाथ ने उन्हें बुलाया हो। मूलतः किसी अन्य कार्य से हैदराबाद गई ऋषिका परिस्थितियों के चलते भुवनेश्वर पहुंचीं और फिर पुरी आने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि भीड़ को लेकर पहले भय था, किंतु भगवान की कृपा से सब कुछ सहजता से संपन्न हुआ और दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यह यात्रा उनके लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव रही। बहुड़ा यात्रा का समापन भगवान जगन्नाथ के श्रीमंदिर में पुनः विराजमान होने के साथ होगा, जिसके बाद सुना बेशा (स्वर्ण वेशभूषा दर्शन) का आयोजन किया जाएगा।