तेलंगाना: किसान को 'कीटनाशक पीने' की टिप्पणी पर सिद्दिपेट तहसीलदार चिट्टमपल्ली स्वामी सस्पेंड
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के सिद्दिपेट जिले में गजवेल के तहसीलदार चिट्टमपल्ली स्वामी को एक किसान के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में 11 अक्टूबर 2026 को निलंबित कर दिया गया। सिद्दिपेट जिला कलेक्टर के. हैमावती ने राजस्व मंडल अधिकारी (आरडीओ) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर यह निलंबन आदेश जारी किया। यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद हुई, जिसमें अधिकारी की असंवेदनशील टिप्पणी स्पष्ट रूप से सुनी जा सकती है।
क्या था पूरा मामला
गजवेल मंडल के मक्ता मसानपल्ली गांव के किसान येसु रीजनल रिंग रोड (आरआरआर) के लिए अधिग्रहित अपनी जमीन के मुआवजे को लेकर रिश्तेदारों से उपजे विवाद के समाधान हेतु तहसीलदार के कार्यालय पहुंचे थे। वायरल वीडियो के अनुसार, जब किसान अपनी समस्या बता रहे थे, तहसीलदार ने उनसे कहा — 'क्या तुम अभी भी जिंदा हो? क्या तुमने अभी तक कीटनाशक नहीं खाया?'
किसान येसु ने नाराजगी जाहिर करते हुए पूछा कि क्या उन्होंने जानबूझकर ऐसा कहा, जिस पर अधिकारी ने स्वीकार किया — 'हां, मैंने कहा। बिल्कुल, मैंने कहा।' यह घटना कथित तौर पर 5-6 महीने पहले हुई थी, जैसा कि खुद येसु ने एक अन्य वीडियो में बताया।
जांच और निलंबन की प्रक्रिया
वीडियो वायरल होने के बाद किसानों और आम नागरिकों में रोष फैल गया। जिला कलेक्टर के. हैमावती ने तत्काल आरडीओ को जांच के आदेश दिए। आरडीओ की प्रारंभिक रिपोर्ट में अधिकारी का व्यवहार अनुचित एवं अमर्यादित पाया गया। इसके आधार पर कलेक्टर ने चिट्टमपल्ली स्वामी को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
निलंबन आदेश में अधिकारी को बिना पूर्व अनुमति के अपना मुख्यालय न छोड़ने का भी स्पष्ट निर्देश दिया गया है।
किसान की स्थिति और मामले का हल
किसान येसु ने बताया कि गांव के बड़े-बुजुर्ग, जिनमें सरपंच और उप-सरपंच भी शामिल थे, उनके साथ एमआरओ कार्यालय गए थे। अंततः मुआवजे की राशि उनके बैंक खाते में जमा होने के बाद जमीन से जुड़ा विवाद सुलझ गया। गौरतलब है कि यह वीडियो उस समय सामने आया जब मामला सुलझ चुका था, लेकिन अधिकारी की आपत्तिजनक टिप्पणी ने सार्वजनिक आक्रोश को जन्म दिया।
व्यापक संदर्भ और असर
भारत में किसानों की आत्महत्या एक संवेदनशील और गंभीर सामाजिक समस्या है। ऐसे में एक सरकारी अधिकारी द्वारा किसान को 'कीटनाशक पीने' का ताना देना न केवल प्रशासनिक अमर्यादा है, बल्कि आलोचकों के अनुसार यह सरकारी तंत्र में व्याप्त संवेदनहीनता की भी बानगी है। यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना सरकार किसान-कल्याण को अपनी प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
तेलंगाना सरकार की त्वरित कार्रवाई को जनभावना के प्रति संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि विपक्षी दलों ने यह भी सवाल उठाया है कि घटना महीनों पुरानी होने के बावजूद कार्रवाई तब हुई जब वीडियो वायरल हुआ।
आगे क्या होगा
अधिकारियों के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान विभागीय जांच जारी रहेगी। चिट्टमपल्ली स्वामी के विरुद्ध नियमित विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। यह देखना होगा कि क्या राज्य सरकार इससे आगे बढ़कर सरकारी अधिकारियों के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाने जैसे कदम उठाती है।