हिंगोली: शराब पीकर स्कूल में सोने वाला प्रधानाध्यापक निलंबित, अभिजीत दिपके की शिकायत पर हुई कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
हिंगोली जिले के लिंबाला एमआईडीसी क्षेत्र स्थित जिला परिषद स्कूल के प्रधानाध्यापक को शराब के नशे में स्कूल परिसर में सोने के गंभीर आरोपों के बाद 18 अगस्त 2026 को निलंबित कर दिया गया। हिंगोली जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विवेक गायकवाड ने लिखित निलंबन आदेश जारी किए, जो कॉकरोच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके द्वारा शिक्षाधिकारी को फोन कर तत्काल कार्रवाई की माँग करने के बाद संभव हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
अभिजीत दिपके ने 15 अगस्त से देशभर में 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की, जिसकी पहली कड़ी उनके पैतृक गाँव हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी स्थित जिला परिषद स्कूल से हुई। इसी दौरान लिंबाला एमआईडीसी क्षेत्र के नागरिकों ने स्थानीय जिला परिषद स्कूल के प्रधानाध्यापक पर शराब के नशे में स्कूल आने का आरोप लगाया। शिकायत मिलते ही दिपके ने स्वयं उस स्कूल का दौरा किया और शिक्षाधिकारी आसावरी काले को फोन कर संबंधित प्रधानाध्यापक के विरुद्ध तत्काल कदम उठाने की माँग की।
वायरल वीडियो और सोशल मीडिया दबाव
इस मामले में एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर प्रधानाध्यापक शराब के नशे में स्कूल के भीतर सोते दिखाई दे रहे हैं। दिपके ने 16 अगस्त को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया: 'शराब के साथ प्रिंसिपल की तस्वीरें और शराब पीने के बाद क्लासरूम में सोते हुए प्रिंसिपल। प्रिंसिपल को तुरंत सस्पेंड किया जाना चाहिए! शराब के नशे में धुत प्रिंसिपल सरकारी स्कूल कैसे चला सकता है? यह बच्चों, खासकर छोटी बच्चियों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है।'
अनशन की चेतावनी और प्रशासनिक दबाव
दिपके ने एक अन्य पोस्ट में चेतावनी दी थी कि गाँव वालों ने प्रधानाध्यापक की शराब पीने की आदत के बारे में कई बार शिकायत की, परंतु वरिष्ठ अधिकारियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया। उन्होंने कहा कि यदि मंगलवार तक प्रधानाध्यापक को नहीं हटाया गया, तो वे भी नागरिकों के साथ विरोध-प्रदर्शन में शामिल होंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्कूल में पाँच कक्षाओं के लिए केवल दो शिक्षक हैं, जो शैक्षणिक व्यवस्था की बदहाली को दर्शाता है।
निलंबन के बाद आगे की कार्रवाई
प्रधानाध्यापक के निलंबन के बाद अभिजीत दिपके ने घोषणा की है कि वे जल्द ही लिंबाला एमआईडीसी स्थित स्कूल का पुनः दौरा करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि निलंबन के बाद स्कूल की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था में वास्तविक सुधार हुआ है या नहीं। यह मामला यह भी उजागर करता है कि सरकारी स्कूलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने में नागरिक दबाव की भूमिका कितनी अहम हो सकती है।