लातूर सरकारी स्कूल में हंगामे पर एफआईआर: सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके समेत 5 पर केस दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के लातूर जिले में एक सरकारी स्कूल में कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश कर हंगामा करने, शिक्षकों के साथ विवाद करने और शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा डालने के आरोप में सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके, अजिंक्य शिंदे समेत पाँच लोगों के विरुद्ध औसा पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। 22 अगस्त 2026 को पुलिस ने शिकायत के आधार पर विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।
घटनाक्रम: क्या हुआ उस दिन
शिक्षकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 20 अगस्त 2026 को दोपहर करीब एक बजे अभिजीत दिपके, अजिंक्य शिंदे और कुछ अन्य व्यक्ति स्कूल परिसर में पहुँचे। आरोप है कि इन लोगों ने विभिन्न कक्षाओं में जाकर छात्रों से सवाल-जवाब किए और लगभग डेढ़ से दो घंटे तक विद्यालय परिसर में मौजूद रहे।
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि आगंतुकों ने बिना किसी पूर्व अनुमति के स्कूल और कक्षाओं में प्रवेश किया तथा परिसर के भीतर तस्वीरें भी खींचीं। बताया जा रहा है कि विवाद की जड़ में स्कूल में दूसरे विद्यालय के विद्यार्थियों को बैठाए जाने का मुद्दा था।
शिक्षकों के आरोप
शिकायतकर्ता शिक्षकों का कहना है कि इस दौरान उनके साथ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया और उन्हें निलंबित कराने की धमकी भी दी गई। उनके अनुसार, पूरे घटनाक्रम के कारण विद्यालय की नियमित पढ़ाई बाधित हुई और शैक्षणिक माहौल प्रभावित हुआ।
पुलिस की कार्रवाई
औसा पुलिस ने शिकायत के आधार पर अभिजीत दिपके समेत पाँचों आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत में लगाए गए आरोपों की जाँच जारी है और घटना से जुड़े तथ्यों को एकत्र किया जा रहा है।
गौरतलब है कि अभिजीत दिपके और अन्य आरोपियों का पक्ष अभी तक सामने नहीं आया है, इसलिए पुलिस जाँच और दोनों पक्षों के बयानों के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश के कई राज्यों में सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) से जुड़े कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों द्वारा सरकारी स्कूलों के दौरे को लेकर विवाद उठ रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में लातूर की यह घटना राज्य में सरकारी स्कूलों की सुरक्षा और बाहरी हस्तक्षेप के सवाल को एक बार फिर चर्चा में ले आई है।
पुलिस जाँच के नतीजे और आरोपियों का पक्ष सामने आने के बाद मामले की दिशा स्पष्ट होगी।