16 सितंबर 2026
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महाराष्ट्र आश्रम स्कूलों में 590 बच्चों की मौत का दावा, 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू

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महाराष्ट्र आश्रम स्कूलों में 590 बच्चों की मौत का दावा, 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू

सारांश

महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में दो वर्षों में 590 से अधिक बच्चों की कथित मौत का आरोप — और इस पर कोई गंभीर सरकारी जाँच नहीं। अभिजीत दिपके का 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान उस व्यापक संकट की ओर ध्यान खींच रहा है, जो आदिवासी बच्चों की बुनियादी सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार को सीधे चुनौती दे रहा है।

मुख्य बातें

कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने 16 सितंबर 2026 को नागपुर में ' आदिवासी स्कूल ठीक करो ' अभियान की घोषणा की।
दिपके ने दावा किया कि महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में पिछले दो वर्षों में 590 से अधिक बच्चों की मौत हुई है — आँकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बालाघाट क्षेत्र में तीन महीनों में 30 से अधिक और स्थानीय दावों के अनुसार जनवरी 2026 से 100 से अधिक बच्चों की मौत का आरोप।
कई आश्रम स्कूलों में बच्चों को जमीन पर सोना पड़ता है; पर्याप्त बिस्तर, डॉक्टर और दवाएँ उपलब्ध नहीं होने का आरोप।
अभियान का लक्ष्य आश्रम स्कूलों की स्थिति उजागर करना और सरकार से जाँच व सुधार की माँग करना है।

महाराष्ट्र के आदिवासी आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी और कथित तौर पर पिछले दो वर्षों में 590 से अधिक बच्चों की मौत के आरोपों के बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने 16 सितंबर 2026 को नागपुर में 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान की घोषणा की। दिपके ने आरोप लगाया कि आदिवासी बच्चों को स्कूलों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा, दवाएँ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

अभियान की पृष्ठभूमि और मुख्य आरोप

अभिजीत दिपके ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में आदिवासी बच्चों और उनके स्कूलों की जो स्थिति सामने आई है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई आदिवासी स्कूलों की इमारतें जर्जर हालत में हैं और वहाँ मौजूद सुविधाएँ बच्चों के पढ़ने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। दिपके के अनुसार, जिन परिस्थितियों में आदिवासी बच्चे शिक्षा हासिल करने के लिए मजबूर हैं, वहाँ बुनियादी संरचना का घोर अभाव है।

रहने और सोने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल

दिपके ने स्कूलों में बच्चों के रहने की व्यवस्था पर भी कड़े सवाल उठाए। उनके अनुसार कई जगहों पर बच्चों को जमीन पर सोना पड़ता है क्योंकि पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन्हीं खराब परिस्थितियों के कारण बच्चों को सांप के काटने जैसी खतरनाक घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब आदिवासी बच्चों के अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।

मौतों के आँकड़े और जाँच की माँग

दिपके ने दावा किया कि महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में पिछले दो वर्षों में 590 से अधिक बच्चों की मौत हुई है — हालाँकि इस आँकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मौतें होने के बावजूद सरकार की ओर से गंभीर जाँच क्यों नहीं की जा रही। गौरतलब है कि बालाघाट क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ पिछले तीन महीनों में 30 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार — जिनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है — जनवरी 2026 से अब तक 100 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकार से जवाब

दिपके ने आदिवासी स्कूलों में चिकित्सा व्यवस्था की कमी को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पर्याप्त डॉक्टर तैनात नहीं हैं और ज़रूरी दवाओं की भी भारी कमी है। उनके अनुसार, केवल स्कूलों में बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है — बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक भोजन, चिकित्सा सुविधा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिलनी चाहिए।

अभियान का उद्देश्य और आगे की राह

दिपके ने कहा कि आदिवासी समुदाय का देश के संसाधनों पर महत्वपूर्ण अधिकार है और शिक्षा के क्षेत्र में उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान का उद्देश्य आश्रम स्कूलों की वास्तविक स्थिति को जन-जन तक पहुँचाना और सरकार पर सुधार का दबाव बनाना है। आने वाले दिनों में यह अभियान महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में विस्तारित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी पर सीधा सवाल है। आदिवासी आश्रम स्कूलों की दुर्दशा कोई नई खबर नहीं — राज्य सरकारें दशकों से बजट आवंटन और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने में विफल रही हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि इन स्कूलों में मौतों की जाँच के लिए कोई स्वतंत्र, समयबद्ध तंत्र मौजूद नहीं है — न राज्य स्तर पर, न केंद्र स्तर पर। बिना सत्यापन-योग्य डेटा और जवाबदेही ढाँचे के, ये अभियान केवल चुनावी मौसम तक सीमित रह जाते हैं।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान क्या है?
यह कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके द्वारा 16 सितंबर 2026 को नागपुर में घोषित एक राजनीतिक अभियान है, जिसका उद्देश्य महाराष्ट्र के आदिवासी आश्रम स्कूलों की दयनीय स्थिति को उजागर करना और सरकार से सुधार की माँग करना है।
महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में 590 बच्चों की मौत का दावा क्या है?
अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया है कि पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में 590 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। यह आँकड़ा उनके द्वारा लगाया गया आरोप है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
आदिवासी आश्रम स्कूलों में किन सुविधाओं की कमी का आरोप है?
दिपके के अनुसार, कई आश्रम स्कूलों में बच्चों को जमीन पर सोना पड़ता है, पर्याप्त बिस्तर नहीं हैं, डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं और ज़रूरी दवाओं की कमी है। इसके अलावा पौष्टिक भोजन और सुरक्षित वातावरण का भी अभाव बताया गया है।
बालाघाट में बच्चों की मौत का क्या मामला है?
दिपके ने दावा किया कि बालाघाट क्षेत्र में पिछले तीन महीनों में 30 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। स्थानीय लोगों के हवाले से उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 से अब तक यह संख्या 100 से अधिक हो सकती है, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस अभियान से किसे फायदा होगा और सरकार की क्या जिम्मेदारी है?
यह अभियान मुख्य रूप से महाराष्ट्र के आदिवासी समुदाय के बच्चों के हित में है, जो आश्रम स्कूलों में रहकर पढ़ाई करते हैं। दिपके के अनुसार, शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार की है और उसे इस पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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