महाराष्ट्र आश्रम स्कूलों में 590 बच्चों की मौत का दावा, 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान शुरू
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के आदिवासी आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी और कथित तौर पर पिछले दो वर्षों में 590 से अधिक बच्चों की मौत के आरोपों के बीच, कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने 16 सितंबर 2026 को नागपुर में 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान की घोषणा की। दिपके ने आरोप लगाया कि आदिवासी बच्चों को स्कूलों में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा, दवाएँ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
अभियान की पृष्ठभूमि और मुख्य आरोप
अभिजीत दिपके ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में आदिवासी बच्चों और उनके स्कूलों की जो स्थिति सामने आई है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई आदिवासी स्कूलों की इमारतें जर्जर हालत में हैं और वहाँ मौजूद सुविधाएँ बच्चों के पढ़ने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। दिपके के अनुसार, जिन परिस्थितियों में आदिवासी बच्चे शिक्षा हासिल करने के लिए मजबूर हैं, वहाँ बुनियादी संरचना का घोर अभाव है।
रहने और सोने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल
दिपके ने स्कूलों में बच्चों के रहने की व्यवस्था पर भी कड़े सवाल उठाए। उनके अनुसार कई जगहों पर बच्चों को जमीन पर सोना पड़ता है क्योंकि पर्याप्त बिस्तर उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन्हीं खराब परिस्थितियों के कारण बच्चों को सांप के काटने जैसी खतरनाक घटनाओं का सामना करना पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब आदिवासी बच्चों के अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।
मौतों के आँकड़े और जाँच की माँग
दिपके ने दावा किया कि महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में पिछले दो वर्षों में 590 से अधिक बच्चों की मौत हुई है — हालाँकि इस आँकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी संख्या में मौतें होने के बावजूद सरकार की ओर से गंभीर जाँच क्यों नहीं की जा रही। गौरतलब है कि बालाघाट क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वहाँ पिछले तीन महीनों में 30 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार — जिनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है — जनवरी 2026 से अब तक 100 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकार से जवाब
दिपके ने आदिवासी स्कूलों में चिकित्सा व्यवस्था की कमी को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पर्याप्त डॉक्टर तैनात नहीं हैं और ज़रूरी दवाओं की भी भारी कमी है। उनके अनुसार, केवल स्कूलों में बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना पर्याप्त नहीं है — बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक भोजन, चिकित्सा सुविधा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी मिलनी चाहिए।
अभियान का उद्देश्य और आगे की राह
दिपके ने कहा कि आदिवासी समुदाय का देश के संसाधनों पर महत्वपूर्ण अधिकार है और शिक्षा के क्षेत्र में उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' अभियान का उद्देश्य आश्रम स्कूलों की वास्तविक स्थिति को जन-जन तक पहुँचाना और सरकार पर सुधार का दबाव बनाना है। आने वाले दिनों में यह अभियान महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों में विस्तारित किए जाने की संभावना है।