नेपाल के वित्त मंत्री वाग्ले आज भारत दौरे पर, बाढ़ पुनर्निर्माण के लिए ₹723 अरब से अधिक सहायता की अपील
सारांश
मुख्य बातें
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले 16 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के तीन दिवसीय दौरे पर पहुँच रहे हैं, जहाँ वे 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण कार्यों के लिए भारत से वित्तीय और तकनीकी सहयोग माँगेंगे। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, प्रभावित बुनियादी ढाँचे की बहाली के लिए 723 अरब नेपाली रुपए से अधिक की ज़रूरत है। यह यात्रा भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के निमंत्रण पर आयोजित हो रही है।
बाढ़ की भीषण तबाही
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी गलियारों में आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के बड़े हिस्से को तहस-नहस कर दिया। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1,399 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि विदेशी नागरिकों समेत 5,179 लोग अभी भी लापता हैं या उनके बारे में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्रीय योजना आयोग और राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की संयुक्त तकनीकी टीम द्वारा तैयार रैपिड डिज़ास्टर नीड्स असेसमेंट (RDNA) रिपोर्ट के अनुसार, इस बाढ़ से 274.48 अरब नेपाली रुपए की भौतिक क्षति हुई है। वहीं, कुल नुकसान और क्षति का आँकड़ा 408.28 अरब नेपाली रुपए तक पहुँच चुका है।
वार्ता का प्रमुख एजेंडा
नेपाल के वित्त सचिव घनश्याम उपाध्याय ने बताया कि बातचीत के केंद्र में बाढ़-क्षतिग्रस्त बुनियादी ढाँचे और सार्वजनिक संपत्तियों के पुनर्निर्माण के लिए भारतीय समर्थन हासिल करना होगा। नेपाल के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक नोट में यह स्पष्ट किया गया है कि वाग्ले सीतारमण के साथ द्विपक्षीय बैठक में इस अनुरोध को औपचारिक रूप देंगे।
वाग्ले भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात करेंगे और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मिलने की भी संभावना है। इसके अलावा, पूर्व भारतीय विदेश सचिव और नेपाल में पूर्व राजदूत श्याम सरन की मेजबानी में आयोजित एक गोलमेज बैठक में वे भारतीय राजनयिक विशेषज्ञों से भी संवाद करेंगे।
निवेश और आर्थिक प्राथमिकताएँ
वाग्ले भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे, जहाँ वे भारतीय कारोबारी नेताओं के सामने नेपाल की निवेश प्रोत्साहन नीतियों और नई सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं का खाका पेश करेंगे। यह कदम बाढ़ राहत की माँग के समानांतर दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को भी मज़बूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा वे दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अर्थशास्त्र विभाग में विकास नीति पर भी संबोधन देंगे।
भारत-नेपाल सहयोग का इतिहास
गौरतलब है कि 2015 के विनाशकारी भूकंप के बाद भी भारत ने नेपाल के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई थी। उस समय भारत सबसे बड़ा दाता देश था और उसने एक अरब डॉलर तक की सहायता देने का वादा किया था। हालाँकि, बाद में इस सहायता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा अन्य बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की ओर निर्देशित किया गया था — एक तथ्य जिसे नेपाली पक्ष इस बार के अनुरोध में पृष्ठभूमि के रूप में सामने रख सकता है।
आगे क्या
यह यात्रा नेपाल के लिए ऐसे नाज़ुक समय में हो रही है जब देश एक ओर बाढ़ की तबाही से उबरने की कोशिश कर रहा है और दूसरी ओर विदेशी निवेश आकर्षित करने की भी मंशा रखता है। 723 अरब नेपाली रुपए से अधिक की पुनर्निर्माण आवश्यकता के मद्देनज़र, वाग्ले की इस यात्रा के नतीजे आने वाले महीनों में नेपाल की पुनर्बहाली गति और भारत-नेपाल संबंधों की दिशा दोनों तय करेंगे।