22 अक्टूबर 2026
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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: आरोपियों ने ₹1,000 देकर की सितारों के घरों की रेकी, क्राइम ब्रांच ने धारा-111 जोड़ी

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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: आरोपियों ने ₹1,000 देकर की सितारों के घरों की रेकी, क्राइम ब्रांच ने धारा-111 जोड़ी

सारांश

मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग से पहले आरोपियों ने ₹1,000 में ऑटो चालकों की मदद से कई बॉलीवुड सितारों के घरों की रेकी की थी। मामले में बीएनएस धारा-111 जुड़ने के बाद मकोका लगाने की संभावना प्रबल हो गई है।

मुख्य बातें

टाइगर श्रॉफ फायरिंग मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच को नए अहम खुलासे मिले हैं।
आरोपियों ने अंधेरी के होटल में रुककर ऑटो चालकों को ₹1,000 देकर कई सितारों के घरों की रेकी की थी।
आरोपी गूगल पर पता खोजकर भी सितारों के घरों तक पहुँचते थे।
क्राइम ब्रांच ने बीएनएस धारा-111 (संगठित अपराध) मामले में जोड़ी; मकोका लगाने की संभावना बढ़ी।
फायरिंग के बाद आरोपी सूरत पहुँचे और वहाँ बंदूक व मोबाइल फोन छिपाए; बरामदगी के प्रयास जारी।

मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ के घर पर हुई फायरिंग के मामले में गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को नए और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उन्होंने अंधेरी के एक होटल में ठहरकर मुंबई के बड़े बॉलीवुड सितारों के घरों की व्यवस्थित तरीके से रेकी की थी। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संगठित अपराध से जुड़ी धारा-111 भी जोड़ दी है।

रेकी का तरीका: ऑटो और गूगल का सहारा

क्राइम ब्रांच सूत्रों के अनुसार, आरोपी जब मुंबई पहुँचे तो अंधेरी के एक होटल में रुके। वहाँ से वे रोज़ाना निकलते और किसी भी ऑटो रिक्शा चालक को रोककर खुद को 'पहली बार मुंबई आए पर्यटक' बताते थे। इसके बाद वे ऑटो चालकों से बॉलीवुड अभिनेताओं के घर दिखाने की गुज़ारिश करते थे।

सूत्रों के मुताबिक, ऑटो चालक आमतौर पर इस 'टूर' के लिए करीब ₹1,000 लेते थे। आरोपियों ने कई बार अलग-अलग ऑटो चालकों को ₹1,000 देकर विभिन्न सितारों के घरों तक पहुँचकर उनकी और आसपास के इलाकों की जानकारी जुटाई। जांच में यह भी सामने आया कि कई बार आरोपी पहले गूगल पर अभिनेताओं के घर का पता खोजते थे और फिर वही पता ऑटो चालक को बताकर वहाँ पहुँच जाते थे।

तीनों शूटरों ने की थी कई घरों की रेकी

क्राइम ब्रांच की जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि इस मामले में पकड़े गए तीनों शूटरों ने बॉलीवुड से जुड़े केवल एक नहीं, बल्कि कई अभिनेताओं के घरों की रेकी की थी। यह संकेत देता है कि फायरिंग की घटना एक सुनियोजित और व्यापक अपराधिक साजिश का हिस्सा हो सकती है।

गौरतलब है कि इस खुलासे के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है, क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब मुंबई में बड़े हस्तियों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंताएँ व्यक्त की जा रही थीं।

धारा-111 जोड़ी, मकोका की संभावना

क्राइम ब्रांच ने इस मामले में अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-111, जो संगठित अपराध से संबंधित है, आरोपियों पर लगाई है। इस कदम के बाद मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाए जाने की संभावना भी काफी बढ़ गई है।

हालाँकि, अधिकारियों के अनुसार मकोका लगाने का अंतिम निर्णय जांच के निष्कर्षों और कानून में निर्धारित शर्तों की पूर्ति पर निर्भर करेगा। मकोका एक कड़ा कानून है जो संगठित अपराध गिरोहों पर लागू होता है और इसमें जमानत मिलना बेहद कठिन होता है।

सूरत में छिपाए हथियार और मोबाइल

जांच में एक और अहम खुलासा यह हुआ है कि फायरिंग की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी सूरत पहुँचे थे और वहाँ उन्होंने बंदूक को छिपा दिया था। सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन भी उसी स्थान पर या किसी अन्य जगह छिपाए हुए हैं।

पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अब इन दावों को सत्यापित करने में जुटी है। सूरत में स्थानीय पुलिस की मदद से बंदूक और मोबाइल फोन को बरामद करने के प्रयास जारी हैं।

आगे क्या होगा

क्राइम ब्रांच की जांच तेज़ी से आगे बढ़ रही है और धारा-111 के जुड़ने के बाद मामले में मकोका लगाने की औपचारिक प्रक्रिया भी शुरू हो सकती है। बंदूक और मोबाइल की बरामदगी से जांचकर्ताओं को आरोपियों के नेटवर्क और इस साजिश के पीछे के मास्टरमाइंड तक पहुँचने में मदद मिलने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 में ऑटो से रेकी का यह तरीका बताता है कि निशाना लेने वाले शौकिया नहीं थे, बल्कि उन्होंने सस्ती, अनौपचारिक और ट्रेस करने में कठिन रणनीति चुनी। धारा-111 और मकोका की संभावना इस बात की पुष्टि है कि जांचकर्ता इसे एक बड़े गिरोह का हिस्सा मान रहे हैं — लेकिन असली परीक्षा सूरत से हथियार और मोबाइल बरामद होने के बाद होगी, जब यह साफ होगा कि इस साजिश के तार कहाँ तक जाते हैं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में आरोपियों ने रेकी कैसे की?
सूत्रों के अनुसार, आरोपी अंधेरी के एक होटल में रुककर रोज़ाना ऑटो रिक्शा चालकों को ₹1,000 देकर बॉलीवुड सितारों के घर दिखवाते थे। कई बार वे पहले गूगल पर पता खोजते और फिर ऑटो चालक को बताकर वहाँ पहुँच जाते थे।
मामले में बीएनएस धारा-111 क्यों जोड़ी गई?
मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-111 जोड़ी है, जो संगठित अपराध से संबंधित है। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि जांच में तीनों शूटरों द्वारा कई सितारों के घरों की सुनियोजित रेकी और एक संगठित साजिश के संकेत मिले हैं।
क्या इस मामले में मकोका लगाया जाएगा?
धारा-111 जुड़ने के बाद महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) लगाए जाने की संभावना बढ़ गई है। हालाँकि, अधिकारियों के अनुसार मकोका लगाने का अंतिम फैसला जांच के निष्कर्षों और कानून में निर्धारित शर्तों की पूर्ति के आधार पर होगा।
आरोपियों ने फायरिंग के बाद बंदूक कहाँ छिपाई?
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि फायरिंग के बाद वे सूरत पहुँचे और वहाँ बंदूक छिपा दी। मोबाइल फोन भी किसी स्थान पर छिपाए गए हैं। पुलिस इन दावों की सत्यापन प्रक्रिया में है और सूरत में स्थानीय मदद से हथियार व मोबाइल बरामद करने के प्रयास जारी हैं।
क्या सिर्फ टाइगर श्रॉफ के घर की रेकी हुई थी?
नहीं, जांच में सामने आया है कि तीनों शूटरों ने केवल टाइगर श्रॉफ के घर की नहीं, बल्कि कई बॉलीवुड अभिनेताओं के घरों की रेकी की थी। इससे यह संकेत मिलता है कि यह एक व्यापक और सुनियोजित साजिश थी।
राष्ट्र प्रेस
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