क्या हर साल मकर संक्रांति पर तिल भर बढ़ता है शिवलिंग का आकार?
सारांश
Key Takeaways
- शिवलिंग का आकार हर साल मकर संक्रांति पर बढ़ता है।
- मंदिर 2,500 वर्ष पुराना है।
- यह मंदिर काशी खंड और केदार खंड का हिस्सा है।
- भक्त अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए बाबा को तिल अर्पित करते हैं।
- मंदिर का गर्भगृह में शिवलिंग 3.5 फीट ऊँचा है।
नई दिल्ली, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सृष्टि के हर कण में विराजित भगवान शिव का न कोई निश्चित आकार है और न ही कोई निश्चित रूप। भक्त अपनी इच्छानुसार भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।
भारत के विभिन्न मंदिरों में स्थित शिवलिंग इस बात का प्रमाण हैं। एक ऐसा ही मंदिर वाराणसी में है, जो हर वर्ष तिल के बराबर बढ़ता है। माना जाता है कि हर साल शिवलिंग के आकार में परिवर्तन होता है।
काशी विश्वनाथ मंदिर से 2 किलोमीटर की दूरी पर पांडे हवेली की गली में, भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित बाबा तिलभंडेश्वर महादेव का यह मंदिर है। मंदिर के नाम से ही स्पष्ट है कि बाबा का संबंध तिल से है और भक्त अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए बाबा को तिल अर्पित करते हैं। यहां का शिवलिंग अन्य मंदिरों से अलग है। इसका आकार गुंबद की तरह है और इस पर एक बड़ी गोल आकृति भी बनी हुई है।
कहा जाता है कि भगवान शिव बाबा तिलभंडेश्वर के रूप में भक्तों को सुख और समृद्धि प्रदान करते हैं। यह मंदिर 2,500 वर्ष पुराना है और इसका अस्तित्व सतयुग से है। पहले शिवलिंग का आकार सामान्य हुआ करता था, लेकिन द्वापर युग तक इसका आकार बढ़ता गया।
जब कलयुग में भक्तों ने बाबा के बढ़ते आकार पर चिंता व्यक्त की, तो उन्होंने प्रार्थना की कि बाबा अपना आकार स्थिर कर लें। भक्तों की प्रार्थना का उत्तर देते हुए बाबा ने वचन दिया कि वह हर साल सिर्फ मकर संक्रांति पर तिलभर बढ़ेंगे। तब से अब तक बाबा हर साल अपना आकार बदलते हैं।
मंदिर के गर्भगृह में शिवलिंग 3.5 फीट ऊँचा है, जबकि इसका व्यास 3 फीट है। मंदिर के इतिहास को मां शारदा से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर में मां शारदा ने तपस्या की थी और भगवान शिव को प्रसन्न कर वरदान प्राप्त किया था।
काशी को दो भागों में विभाजित माना जाता है: एक है काशी खंड और दूसरी केदार खंड। बाबा तिलभंडेश्वर महादेव का मंदिर केदारखंड में स्थित है। बाबा विश्वनाथ और महामृत्युंजय काशी खंड के स्वामी हैं। तिलभंडेश्वर, केदारेश्वर और कई अन्य महत्वपूर्ण शिवालय केदार खंड में स्थित हैं।