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टीएमसी सांसद का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, बैठक महज 7 मिनट में समाप्त

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टीएमसी सांसद का चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप, बैठक महज 7 मिनट में समाप्त

सारांश

तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग के साथ हुई बैठक में असम्मानजनक व्यवहार का आरोप लगाया। बैठक में उठाए गए मुद्दे और 7 मिनट में समाप्त होने की घटना ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है।

मुख्य बातें

टीएमसी सांसद ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
बैठक महज 7 मिनट में समाप्त हुई।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठे।
विपक्षी दलों में एकजुटता बढ़ रही है।
ममता बनर्जी द्वारा भेजी गई चिट्ठियों का कोई जवाब नहीं मिला।

नई दिल्ली, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग (ईसी) के साथ हुई बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने इस अवसर पर आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ अत्यंत असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक के महज 7 मिनट के भीतर उन्हें वहाँ से जाने के लिए कह दिया।

डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि वे अपनी पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ पूरी तैयारी के साथ चुनाव आयोग के पास गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी की प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से चुनाव आयोग को 9 चिट्ठियां भेजी गई थीं, लेकिन उनमें से किसी का भी न तो जवाब दिया गया और न ही कोई संज्ञान लिया गया। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में एक गंभीर मामला है, क्योंकि एक संवैधानिक संस्था को इस तरह की चिट्ठियों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ओ’ब्रायन के अनुसार, बैठक सुबह लगभग 10:02 बजे शुरू हुई और 7-8 मिनट में ही समाप्त हो गई। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे अधिकारी चुनाव प्रक्रिया में शामिल हैं, जिनका संबंध भारतीय जनता पार्टी से है। उन्होंने ऐसे 6 उदाहरण चुनाव आयोग के समक्ष रखे और कहा कि इससे चुनाव की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न होता है।

उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने अधिकारियों के ट्रांसफर और नियुक्तियों को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि अगर इस तरह के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी, तो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे संभव हो पाएंगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने ये मुद्दे उठाए, मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें बीच में रोक दिया और कथित तौर पर "यहां से निकल जाओ" कह दिया।

डेरेक ओ’ब्रायन ने इस पूरे घटनाक्रम को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि अपने 22 साल के राजनीतिक करियर और 16 साल के संसदीय अनुभव में उन्होंने कभी भी किसी संवैधानिक संस्था के साथ ऐसी स्थिति नहीं देखी। उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर चुनाव आयोग के पास बैठक का वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए ताकि सच सामने आ सके।

उन्होंने यह भी कहा कि जब उनका प्रतिनिधिमंडल बाहर निकल रहा था, तब उनके एक सहयोगी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को बधाई दी कि वे भारत के इतिहास में पहले ऐसे मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जिनके खिलाफ लोकसभा और राज्यसभा में हटाने के नोटिस दिए गए हैं।

ओ’ब्रायन ने आगे बताया कि इस मुद्दे को लेकर सभी विपक्षी दल एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि संविधान क्लब में शाम लगभग 4:30

उन्होंने कहा कि जब वे बैठक में पहुंचे, तो शुरुआत में ही यह कहा गया कि उनका प्रतिनिधिमंडल अधिकृत नहीं है, जबकि वे पूरी तरह अधिकृत होकर गए थे। इसके बाद जब उन्होंने अपने मुद्दे रखने शुरू किए, तो उन्हें बोलने का मौका ही नहीं दिया गया।

ओ’ब्रायन ने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता बेहद आवश्यक है और अगर इस पर सवाल उठते हैं, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चिंता का विषय है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टीएमसी के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
डेरेक ओ'ब्रायन ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ असम्मानजनक व्यवहार किया और बैठक महज 7 मिनट में समाप्त कर दी।
बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा की गई?
बैठक में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई, जिसमें चुनाव प्रक्रिया में भाजपा से जुड़े अधिकारियों की संलिप्तता का मुद्दा शामिल था।
क्या चुनाव आयोग ने टीएमसी की चिट्ठियों का जवाब दिया?
डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी द्वारा भेजी गई 9 चिट्ठियों का न तो जवाब दिया और न ही कोई संज्ञान लिया।
इस घटना का राजनीतिक प्रभाव क्या होगा?
इस घटना ने विपक्षी दलों को एकजुट किया है और संभावित रूप से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
क्या टीएमसी के सांसद ने चुनाव आयोग से कोई चुनौती दी?
हां, डेरेक ओ'ब्रायन ने चुनाव आयोग से चुनौती दी कि यदि उनके पास बैठक का रिकॉर्ड है, तो उसे सार्वजनिक किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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