त्रिपुरा में ऑर्गेनिक गेहूं की पैदावार 3.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर, पारंपरिक खेती को पीछे छोड़ा: मंत्री रतन लाल नाथ

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त्रिपुरा में ऑर्गेनिक गेहूं की पैदावार 3.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर, पारंपरिक खेती को पीछे छोड़ा: मंत्री रतन लाल नाथ

सारांश

त्रिपुरा में पहली बार ऑर्गेनिक गेहूं की खेती ने पारंपरिक पैदावार को पीछे छोड़ दिया — 3.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर की उपज राष्ट्रीय औसत के करीब है। TSOFDA और किसान उत्पादक संगठनों की यह साझा सफलता राज्य में फसल विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की नई संभावनाएँ खोलती है।

Key Takeaways

त्रिपुरा में पहली बार ऑर्गेनिक गेहूं की सफल खेती; उपज 3.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज। पारंपरिक गेहूं की औसत उपज ( 2018-19 से 2024-25 ) 2.119 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर थी। यह उपज राष्ट्रीय औसत 3.5 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर के करीब। पश्चिम त्रिपुरा, सेपाहिजाला, खोवाई और गोमती जिलों के कई क्लस्टरों में खेती हुई। TSOFDA और जैविक किसान उत्पादक संगठनों (FPC) के सहयोग से यह पहल संभव हुई।

त्रिपुरा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने रविवार, 3 मई 2026 को अगरतला में मीडिया को बताया कि राज्य में पहली बार ऑर्गेनिक गेहूं की खेती सफलतापूर्वक संपन्न हुई है और इसकी उपज 3.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रही, जो राज्य की पारंपरिक गेहूं की औसत उपज 2.119 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर से काफी अधिक है। यह उपलब्धि त्रिपुरा स्टेट ऑर्गेनिक फार्मिंग डेवलपमेंट एजेंसी (TSOFDA) और राज्य के विभिन्न जैविक किसान उत्पादक संगठनों (FPC) के संयुक्त प्रयास का परिणाम है।

मुख्य उपलब्धि और उपज के आँकड़े

कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, 2018-19 से 2024-25 के बीच त्रिपुरा में पारंपरिक गेहूं की औसत उपज 2.119 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रही है। इस वर्ष ऑर्गेनिक पद्धति से उगाए गए गेहूं की पैदावार 3.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत 3.5 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर के भी करीब है। मंत्री नाथ के अनुसार यह आँकड़ा त्रिपुरा में जैविक उत्पादन प्रणाली की प्रबल क्षमता को रेखांकित करता है।

किन क्षेत्रों में हुई खेती

यह फसल राज्य के चार जिलों के कई क्लस्टरों में उगाई गई। पश्चिम त्रिपुरा जिले में जिरानिया, लेफुंगा, हेजामारा और मंदाई; सेपाहिजाला जिले में जम्पुइजाला; खोवाई जिले में बेलबारी, तुलशीखर, तेलियामुरा और कल्याणपुर; तथा गोमती जिले में ओम्पी शामिल हैं। यह भौगोलिक विस्तार दर्शाता है कि ऑर्गेनिक गेहूं की खेती केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य में संभव है।

TSOFDA और FPC की भूमिका

त्रिपुरा स्टेट ऑर्गेनिक फार्मिंग डेवलपमेंट एजेंसी (TSOFDA) ने इस पहल में तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान किया। कई अग्रणी किसानों और जैविक किसान उत्पादक संगठनों ने मिलकर इस प्रयोग को ज़मीन पर उतारा। किसानों ने TSOFDA द्वारा दिए गए समर्थन की सराहना करते हुए इस पहल को एक ऐतिहासिक शुरुआत बताया है।

किसानों और फसल विविधीकरण पर असर

मंत्री नाथ ने कहा कि यह विकास ऑर्गेनिक खेती के तहत फसल विविधीकरण में एक बड़ा कदम है और राज्य में जैविक फसल उत्पादन बढ़ाने के नए रास्ते खोलता है। किसानों ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त किया है और कई ने इसे पोषण सुरक्षा, फसल विविधीकरण तथा आय वृद्धि में योगदान देने वाला बताया है। गौरतलब है कि त्रिपुरा पहले से ही जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले राज्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, और यह उपलब्धि उस दिशा में एक ठोस कदम है।

आगे की राह

यह सफलता राज्य सरकार को ऑर्गेनिक गेहूं की खेती का और विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करती है। यदि इस उपज को बाज़ार से जोड़ा जाए और प्रमाणीकरण प्रक्रिया सुदृढ़ की जाए, तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। आने वाले मौसमों में और अधिक क्लस्टरों को इस पहल में शामिल किए जाने की उम्मीद है।

Point of View

लेकिन एक मौसम के आँकड़े को दीर्घकालिक नीति का आधार बनाना जल्दबाज़ी होगी। असली परीक्षा यह है कि क्या यह उपज अगले कई मौसमों में दोहराई जा सकती है और क्या किसानों को जैविक प्रमाणीकरण के ज़रिए बाज़ार में प्रीमियम मूल्य मिल पाएगा। राज्य में ऑर्गेनिक खेती का विस्तार तभी टिकाऊ होगा जब आपूर्ति श्रृंखला, भंडारण और विपणन का ढाँचा भी उतनी ही मज़बूती से खड़ा किया जाए।
NationPress
03/05/2026

Frequently Asked Questions

त्रिपुरा में ऑर्गेनिक गेहूं की पैदावार कितनी रही?
इस वर्ष त्रिपुरा में ऑर्गेनिक गेहूं की उपज 3.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रही, जो राज्य की पारंपरिक गेहूं की औसत उपज 2.119 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर से काफी अधिक है। यह उपज राष्ट्रीय औसत 3.5 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर के भी करीब है।
TSOFDA क्या है और इसकी भूमिका क्या रही?
TSOFDA यानी त्रिपुरा स्टेट ऑर्गेनिक फार्मिंग डेवलपमेंट एजेंसी राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने वाली सरकारी संस्था है। इस पहल में TSOFDA ने तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे किसान उत्पादक संगठनों के साथ मिलकर ऑर्गेनिक गेहूं की सफल खेती संभव हो सकी।
त्रिपुरा के किन जिलों में ऑर्गेनिक गेहूं उगाया गया?
ऑर्गेनिक गेहूं की खेती पश्चिम त्रिपुरा, सेपाहिजाला, खोवाई और गोमती जिलों के कई क्लस्टरों में की गई। इनमें जिरानिया, लेफुंगा, हेजामारा, जम्पुइजाला, बेलबारी, तेलियामुरा और ओम्पी जैसे स्थान शामिल हैं।
यह उपलब्धि किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
ऑर्गेनिक गेहूं की अधिक उपज किसानों को फसल विविधीकरण, बेहतर आय और पोषण सुरक्षा का अवसर देती है। जैविक उत्पादों को बाज़ार में प्रीमियम मूल्य मिलता है, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ने की संभावना है।
पारंपरिक और ऑर्गेनिक गेहूं की उपज में कितना अंतर है?
त्रिपुरा में 2018-19 से 2024-25 के बीच पारंपरिक गेहूं की औसत उपज 2.119 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रही, जबकि इस वर्ष ऑर्गेनिक गेहूं की उपज 3.03 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रही। यह अंतर लगभग 43% अधिक उपज दर्शाता है।
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