क्या त्रिशूर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में आग लगने का कारण ओएचई था?
सारांश
Key Takeaways
- त्रिशूर रेलवे स्टेशन की पार्किंग में आग लगने से 250 दोपहिया वाहन जल गए।
- कोई जनहानि नहीं हुई।
- रेलवे ने ओएचई से संबंधित दावों का खंडन किया।
- पार्किंग क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी द्वारा की जा रही थी।
- रेलवे ने जांच शुरू की है।
त्रिशूर, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। रविवार सुबह त्रिशूर रेलवे स्टेशन के पश्चिम दिशा में स्थित टू-व्हीलर पार्किंग क्षेत्र में एक भयंकर आग लग गई। आग के तेज़ी से फैलने के कारण वहां खड़े लगभग 250 दोपहिया वाहन पूरी तरह या आंशिक रूप से जल गए। हालांकि, इस घटना में कोई भी यात्री, रेलवे कर्मचारी या आम जनता को कोई चोट नहीं आई और न ही किसी की जान गई।
दक्षिणी रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ), गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) त्रिशूर और प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत कार्रवाई की। स्टेशन मास्टर को सूचित करने के बाद, स्टेशन पर उपलब्ध फायर एक्सटिंग्विशर से आग बुझाने का प्रयास किया गया। त्रिशूर फायर फोर्स की टीम सुबह 6.45 बजे मौके पर पहुंची और लगातार प्रयासों के बाद आग पर सुबह 7.15 बजे तक पूरी तरह काबू पा लिया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) या रेलवे की विद्युत व्यवस्था से नहीं लगी। आग का आगाज़ पार्किंग में खड़ी एक टू-व्हीलर से हुआ था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पार्किंग स्टाफ के साथ मिलकर आग बुझाने की कोशिश की गई, लेकिन आग तेजी से फैल गई। यार्ड में खड़े एक डिपार्टमेंटल टावर वैगन पर भी आग का प्रभाव पड़ा, जिसे तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।
पूरे पार्किंग क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी द्वारा की जा रही थी, लेकिन आग की तीव्रता के कारण सीसीटीवी कंट्रोल यूनिट और हार्ड डिस्क क्षतिग्रस्त हो गए। इन उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए त्रिशूर वेस्ट पुलिस को सौंपा गया है। स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही, रेलवे प्रशासन ने एक संयुक्त विभागीय तथ्य-खोज जांच भी आरंभ की है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में अस्थायी पार्किंग शेड के निर्माण के लिए अनुमति न होने का दावा किया गया था। रेलवे ने इसका कड़ा खंडन करते हुए कहा कि इंडियन रेलवे एक्ट और गवर्नमेंट बिल्डिंग्स एक्ट के प्रावधानों के अनुसार, रेलवे परिसर में निर्माण के लिए किसी स्थानीय निकाय या कॉर्पोरेशन से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। त्रिशूर कॉर्पोरेशन से आज तक कोई नोटिस या विवाद संबंधी सूचना भी प्राप्त नहीं हुई है।
रेलवे ने ओएचई या वैधानिक अनुमतियों की कमी से आग लगने की अफवाहों को सिरे से खारिज किया है। प्रभावित यात्रियों की मदद के लिए पार्किंग एजेंसी ने उसी क्षेत्र में हेल्प डेस्क और सहायता केंद्र स्थापित किया है। क्षतिग्रस्त वाहनों के मालिकों को बीमा क्लेम और अन्य प्रक्रियाओं में सहायता प्रदान की जा रही है।