उज्जैन की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का काशी में होगा भव्य अर्पण, सीएम मोहन यादव करेंगे पूजा
सारांश
Key Takeaways
- विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का भव्य अर्पण काशी में होगा।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव और योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति इस आयोजन को खास बनाएगी।
- यह घड़ी भारत की पहली वैदिक काल गणना पर आधारित विशेषता है।
- सम्राट विक्रमादित्य का महानाट्य 3 से 5 अप्रैल तक होगा।
- इस कार्यक्रम में 175 से अधिक कलाकार शामिल होंगे।
भोपाल, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के महाकाल की नगरी उज्जैन में निर्मित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अब काशी पहुंचने वाली है। मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को वाराणसी में पहुंचेंगे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में इस घड़ी को सबसे पहले बाबा विश्वनाथ को अर्पित करेंगे।
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारत की पहली घड़ी है जो वैदिक काल की गणना पर आधारित है। इसका लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2024 में किया गया था। यह घड़ी सूर्योदय के आधार पर समय की गणना करती है और पंचांग से संबंधित जानकारी प्रदान करती है। इससे वैदिक समय, ग्रह-नक्षत्र, चंद्र स्थिति और विक्रम संवत की संपूर्ण जानकारी एक साथ उपलब्ध होगी।
भारतीय काल गणना की समृद्ध विरासत को पुनर्जीवित करने के इस प्रयास के तहत वाराणसी में सबसे पहले बाबा विश्वनाथ को वैदिक घड़ी समर्पित की जाएगी। इस घड़ी की विशेषता केवल इसकी पारंपरिक गणना पद्धति नहीं, बल्कि इसका डिजिटल विस्तार भी है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वाराणसी दौरे से संबंधित जानकारी साझा करते हुए लिखा, "भारतीय संस्कृति, वीरता, नीति और न्याय की अमर गाथाओं का भव्य प्रस्तुतीकरण होगा 'सम्राट विक्रमादित्य' महानाट्य, काशी की धरती पर आज से शुरू होगा। बाबा विश्वनाथ की नगरी इस गौरवशाली आयोजन की साक्षी बनेगी।"
मुख्यमंत्री मोहन यादव उत्तर प्रदेश के सीएम योगी के साथ बीएलडब्ल्यू में सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी पर आधारित महानाट्य का शुभारंभ करेंगे। 3 से 5 अप्रैल तक मंचन होने वाले इस महानाट्य का उद्देश्य देश के गौरवशाली इतिहास, विक्रम संवत की वैज्ञानिकता और उस युग के अनुपम योगदान से जनमानस को परिचित कराना है।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' का ऐतिहासिक मंचन किया जाएगा। आयोजन स्थल पर विभिन्न ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियां भी लगाई जा रही हैं। सम्राट विक्रमादित्य आधारित महानाट्य की प्रस्तुति लगभग 1.45 घंटे की होगी। मंच पर 175 से अधिक कलाकार और सहयोगी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।