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उज्जैन के सिद्धवट पर पिंडदान का विशेष महत्व, क्षिप्रा किनारे सदियों पुरानी श्राद्ध परंपरा

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उज्जैन के सिद्धवट पर पिंडदान का विशेष महत्व, क्षिप्रा किनारे सदियों पुरानी श्राद्ध परंपरा

सारांश

पितृ पक्ष 2026 में उज्जैन का सिद्धवट तीर्थ फिर केंद्र में है — क्षिप्रा तट पर यह 'पापमोचन तीर्थ' माता पार्वती से जुड़ी मान्यता और रामघाट की पौराणिक विरासत के साथ श्रद्धालुओं को खींचता है। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर भारी भीड़ की उम्मीद।

मुख्य बातें

उज्जैन का सिद्धवट तीर्थ क्षिप्रा नदी के किनारे शहर से लगभग पाँच किलोमीटर दूर स्थित है।
उज्जैन जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार सिद्धवट को पापमोचन तीर्थ भी कहा जाता है; मान्यता है कि यहाँ का वट वृक्ष माता पार्वती ने लगाया था।
यहाँ श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसे कर्म संपन्न किए जाते हैं।
रामघाट पर पौराणिक मान्यता है कि भगवान राम ने अपने माता-पिता के लिए यहाँ पिंडदान किया था।
पितृ पक्ष 2026 में पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को और सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को है।

पितृ पक्ष के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित सिद्धवट तीर्थ पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहाँ पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध की परंपरा सदियों से चली आ रही है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की नगरी के रूप में विख्यात उज्जैन न केवल अपने मंदिरों के लिए, बल्कि पितृ-कर्म के इन प्राचीन तीर्थ स्थलों के लिए भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष स्थान रखता है।

सिद्धवट का धार्मिक महत्व

उज्जैन शहर से लगभग पाँच किलोमीटर की दूरी पर क्षिप्रा नदी के तट पर बसा सिद्धवट स्थानीय धार्मिक परंपरा में अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। उज्जैन जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सिद्धवट को पापमोचन तीर्थ भी कहा जाता है। यहाँ स्थित वट वृक्ष के बारे में धार्मिक मान्यता है कि इसे माता पार्वती ने स्वयं लगाया था और उनकी पूजा भी यहीं से जुड़ी है।

इसी कारण इस स्थान का आध्यात्मिक महत्व युगों पुराना माना जाता है। यहाँ श्राद्ध, पिंड, तर्पण, पिंडदान और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसे विशेष कर्म संपन्न किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन कर्मों का सिद्धवट पर विशेष फल प्राप्त होता है।

पिंडदान और तर्पण की परंपरा

हिंदू धार्मिक परंपरा में पिंडदान के दौरान पूर्वजों की स्मृति में पिंड अर्पित किए जाते हैं और तर्पण के माध्यम से जल चढ़ाया जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष में किए गए इन कर्मों से पूर्वजों की आत्मा को शांति और तृप्ति प्राप्त होती है। यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है और आज भी लाखों श्रद्धालु इसे श्रद्धा के साथ निभाते हैं।

रामघाट की पौराणिक मान्यता

उज्जैन में क्षिप्रा नदी, महाकालेश्वर और अन्य प्राचीन तीर्थ स्थल एक ही धार्मिक परंपरा की कड़ियाँ हैं। इनमें रामघाट का भी विशेष स्थान है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने अपने माता-पिता के निमित्त यहाँ पिंडदान किया था, जिससे इस घाट का नाम रामघाट पड़ा। यह मान्यता इस स्थल को पितृ-कर्म के लिए और भी महत्वपूर्ण बनाती है।

पितृ पक्ष 2026 की तिथियाँ

पंचांग के अनुसार, 26 सितंबर 2026 को पूर्णिमा श्राद्ध है, जबकि 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध मनाया जाएगा। इसके पश्चात विभिन्न तिथियों पर संबंधित श्राद्ध कर्म संपन्न होंगे। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा।

उज्जैन का समग्र धार्मिक संदर्भ

गौरतलब है कि उज्जैन भारत के उन गिने-चुने शहरों में है जहाँ एक ही स्थान पर ज्योतिर्लिंग दर्शन, नदी-स्नान और पितृ-कर्म की त्रयी पूरी होती है। यही कारण है कि पितृ पक्ष के दौरान देशभर से श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। आने वाले दिनों में सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर सिद्धवट और रामघाट पर विशेष भीड़ की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली प्रश्न यह है कि इन तीर्थ स्थलों पर बुनियादी ढाँचा — घाट, स्वच्छता, भीड़-प्रबंधन — श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप है या नहीं। पितृ पक्ष जैसे मौसमी धार्मिक आयोजनों में क्षिप्रा की जल-गुणवत्ता और घाटों की स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी आस्था। प्रशासनिक तैयारी और तीर्थ-पर्यटन के बीच संतुलन ही यह तय करेगा कि सिद्धवट और रामघाट की यह विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सके।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जैन में सिद्धवट पर पिंडदान का क्या महत्व है?
सिद्धवट उज्जैन जिला प्रशासन द्वारा मान्यता प्राप्त 'पापमोचन तीर्थ' है, जहाँ पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसे पितृ-कर्म संपन्न होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यहाँ किए गए इन कर्मों का विशेष फल मिलता है और पूर्वजों को शांति प्राप्त होती है।
सिद्धवट का वट वृक्ष किसलिए प्रसिद्ध है?
उज्जैन जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, सिद्धवट के वट वृक्ष को लेकर मान्यता है कि इसे माता पार्वती ने स्वयं लगाया था और उनकी पूजा भी इससे जुड़ी है। यही कारण है कि इस स्थान का धार्मिक महत्व अत्यंत प्राचीन माना जाता है।
पितृ पक्ष 2026 की प्रमुख तिथियाँ क्या हैं?
पंचांग के अनुसार पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर 2026 को है और प्रतिपदा श्राद्ध 27 सितंबर को पड़ेगा। पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।
उज्जैन का रामघाट पिंडदान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने अपने माता-पिता के निमित्त उज्जैन के इस घाट पर पिंडदान किया था, जिससे इसका नाम रामघाट पड़ा। यह मान्यता इसे पितृ पक्ष में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाती है।
उज्जैन में सिद्धवट तीर्थ कहाँ स्थित है?
सिद्धवट उज्जैन शहर से लगभग पाँच किलोमीटर दूर क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित है। यह महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित उज्जैन के उन प्रमुख तीर्थों में से एक है जो एक ही धार्मिक परंपरा से जुड़े माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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