सियाल फेयर 2026: पेरिस में यूपी के खाद्य उत्पादों की धूम, वैश्विक बाज़ार से जुड़ने की पहल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश का खाद्य प्रसंस्करण विभाग फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खाद्य मेले 'सियाल फेयर 2026' में भाग ले रहा है, जो 17 से 21 अक्टूबर 2026 तक चल रहा है। इस आयोजन में इंडिया पवेलियन के माध्यम से प्रदेश के अनाज, जैविक खाद्य उत्पाद, स्नैक्स, फल-सब्ज़ियाँ और फूड स्टार्टअप्स के उत्पादों को वैश्विक खरीदारों और निवेशकों के सामने प्रदर्शित किया जा रहा है। राज्य सरकार इसे किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण रोज़गार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
मेले में यूपी की भागीदारी का स्वरूप
अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा ने बताया कि उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दिशा-निर्देशों में खाद्य प्रसंस्करण विभाग नए अंतरराष्ट्रीय अवसरों की तलाश कर रहा है और पेरिस में यह भागीदारी उसी रणनीति का हिस्सा है। सियाल फेयर दुनिया के सबसे बड़े खाद्य व्यापार प्रदर्शनियों में से एक है, जहाँ वैश्विक खाद्य उद्योग के प्रमुख खरीदार, आपूर्तिकर्ता और निवेशक एकत्रित होते हैं।
इस मेले में उत्तर प्रदेश में निर्मित शुद्ध, गुणवत्तापूर्ण और उत्कृष्ट खाद्य उत्पादों को सीधे अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के उद्यमियों और किसान-समूहों को वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का सुअवसर मिल रहा है।
सरकार के लक्ष्य और प्रोत्साहन योजनाएँ
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती उपस्थिति ने उत्तर प्रदेश के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाने का मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने कहा कि सियाल फेयर जैसे आयोजन प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मौर्य ने यह भी कहा कि राज्य सरकार खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएँ संचालित कर रही है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य 'लोकल फॉर ग्लोबल' की अवधारणा को व्यावहारिक रूप देते हुए उत्तर प्रदेश के उत्पादों को अधिक से अधिक देशों तक पहुँचाना है।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
राज्य सरकार के अनुसार, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश और निर्यात से किसानों को उनके कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है। कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) सीधे तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार के नए अवसर पैदा करने में सहायक हो सकता है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला और प्रमुख कृषि राज्य है, जहाँ गन्ना, गेहूँ, आलू, आम और दलहन जैसी फसलों का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। इन उत्पादों की वैश्विक माँग बढ़ने पर कृषि-आधारित उद्यमों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
आगे की राह
सियाल फेयर में उत्तर प्रदेश की भागीदारी उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य सरकार अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इससे प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए नए कारोबारी अवसर खुलने और कृषि आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन मिलने की संभावनाएँ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वैश्विक मंचों पर निरंतर उपस्थिति से ही निर्यात के दीर्घकालिक लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।