यूपी में खाद्य रंगों पर सख्त दिशा-निर्देश: मिठाई, चटनी, तंदूरी डिश में प्रतिबंधित रंग मिलाने पर होगी कड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA), उत्तर प्रदेश ने 18 अक्टूबर 2026 को मिठाइयों, स्नैक्स, मोमोज, चटनी, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों में रासायनिक रंगों के मनमाने इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आयुक्त FSDA डॉ. रोशन जैकब द्वारा जारी इन निर्देशों में खाद्य विनिर्माताओं से लेकर स्ट्रीट फूड वेंडर्स तक सभी को नियमों का पालन अनिवार्य किया गया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब कॉटन कैंडी और तंदूरी खाद्य पदार्थों में औद्योगिक रंगों के इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताएँ बढ़ रही थीं।
किन खाद्य कारोबारियों पर लागू होंगे ये नियम
दिशा-निर्देश खाद्य विनिर्माताओं, हलवाइयों, होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों, बेकरी प्रतिष्ठानों, ढाबा संचालकों और स्ट्रीट फूड वेंडर्स — सभी पर समान रूप से लागू होते हैं। इन निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार व्यापार मंडलों, होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशनों, फूड वेंडर एसोसिएशनों, फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स (FSW) और क्षेत्रीय बैठकों के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि स्ट्रीट फूड और ढाबों पर इस्तेमाल होने वाले रंगों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने पर जोर दिया गया है। समोसे, चाट, मोमोज और रोल के साथ परोसी जाने वाली हरी या लाल चटनी में प्रतिबंधित रंगों के स्थान पर टमाटर, चुकंदर, धनिया और पुदीना जैसी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
प्रतिबंधित रंग और उनके खतरे
FSDA के अनुसार रोडामाइन-बी, मेटानिल येलो, बटर येलो, मैलाकाइट ग्रीन, ऑरामाइन, ऑरेंज-टू और सूडान डाइज जैसे गैर-अनुमन्य औद्योगिक रंगों का खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। रोडामाइन-बी — जो मूलतः कपड़ा और कागज रंगने में काम आता है — का अवैध इस्तेमाल कॉटन कैंडी ('बुढ़िया के बाल'), चटनी, तंदूरी चिकन और चमकीले लाल रंग की मिठाइयों में होने की आशंका जताई गई है।
मेटानिल येलो का इस्तेमाल लड्डू, इमरती, बूंदी, हल्दी और अरहर की दाल को पीला रंग देने में किए जाने की आशंका है, जबकि सूडान डाइज के मिर्च पाउडर, करी पाउडर, गरम मसाले और पैकेज्ड सॉस में मिलावट की बात कही गई है। इन रंगों के सेवन से यकृत एवं गुर्दे पर प्रतिकूल प्रभाव, एलर्जी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है।
अनुमन्य रंगों की मात्रा और शर्तें
खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य उत्पादों के मानक एवं खाद्य सहयोज्य) विनियम, 2011 के तहत विभिन्न खाद्य श्रेणियों के लिए अनुमन्य रंगों और उनकी अधिकतम मात्रा निर्धारित है। बूंदी के लड्डू, जलेबी, बर्फी की सजावट और हार्ड कैंडी में अनुमन्य कृत्रिम रंगों की सामान्य अधिकतम सीमा 100 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है। डिब्बाबंद या ग्लेज्ड चेरी के लिए यह सीमा 200 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम और अन्य प्रसंस्कृत फलों के लिए 100 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है।
चिकन टिक्का, कबाब, चाप और तली हुई मछली जैसे तंदूरी व मांसाहारी व्यंजनों में लाल रंग के लिए औद्योगिक डाई के बजाय कश्मीरी लाल मिर्च, देगी मिर्च और पेपरिका एक्सट्रैक्ट के उपयोग की सलाह दी गई है। ब्रेड और बन के मुख्य भाग में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल पूरी तरह निषिद्ध है।
किन खाद्य पदार्थों में रंग की अनुमति नहीं
दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि कच्चे एवं पाश्चुरीकृत दूध, मलाई, सादे दही, बिना फ्लेवर वाले मक्खन, छेना, पनीर, ताजे फल, कच्ची सब्जियों, शिशु आहार, प्राकृतिक फलों के रस, पैकेज्ड पेयजल, पिसे मसालों, चायपत्ती, कॉफी, अनाज, दाल, आटा, सूजी, सादी ब्रेड, खाद्य तेल, गुड़, शहद, सूखे मेवों तथा दाल, सब्जियों, बिरयानी और फ्रेंच फ्राइज जैसे खाद्य पदार्थों में रंग मिलाना अनुमन्य नहीं है।
नियम उल्लंघन पर कार्रवाई
दिशा-निर्देशों के अनुसार, गैर-अनुमन्य रंगों का इस्तेमाल, अनुमति-रहित खाद्य पदार्थ में रंग मिलाना, निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक रंग डालना या पैकेज्ड उत्पाद पर अनिवार्य जानकारी न अंकित करना — ये सभी नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। खाद्य कारोबारियों को निर्देश दिया गया है कि रंगों की खरीद के बिल, इनवॉइस और बैच नंबर सुरक्षित रखें, ताकि निरीक्षण के दौरान प्रस्तुत किए जा सकें।
आगे खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा व्यापक निरीक्षण अभियान चलाने की संभावना है, जिससे यूपी भर के खाद्य प्रतिष्ठानों पर अनुपालन का दबाव बढ़ेगा।