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क्या यूपी की आबकारी नीति राष्ट्रीय मॉडल बन गई है?

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क्या यूपी की आबकारी नीति राष्ट्रीय मॉडल बन गई है?

सारांश

यूपी की आबकारी नीति ने प्रदेश के राजस्व को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। यह नीति अब अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बनकर उभरी है। जानें कैसे इस नीति ने राजस्व में वृद्धि की और कई राज्यों ने इसे अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

मुख्य बातें

यूपी की आबकारी नीति ने राजस्व में रिकॉर्ड वृद्धि की है।
अन्य राज्यों के अधिकारी यूपी की नीति का अध्ययन कर रहे हैं।
पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार का समावेश किया गया है।
अवैध शराब पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं।
डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली और ई-लॉटरी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

लखनऊ, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रदेश सरकार की दूरदर्शी और पारदर्शी आबकारी नीति ने न केवल प्रदेश के राजस्व को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है, बल्कि यह अब देश के अन्य राज्यों के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल के रूप में उभर कर सामने आई है।

आबकारी राजस्व में लगातार रिकॉर्ड वृद्धि के कारण यूपी की आबकारी नीति की चर्चा अब प्रदेश की सीमाओं के बाहर भी होने लगी है। यही कारण है कि कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश के आबकारी आयुक्तों और वरिष्ठ अधिकारियों ने यहां की आबकारी नीति का गहन अध्ययन करने के लिए प्रदेश का दौरा किया।

प्रदेश सरकार द्वारा तैयार की गई यह नीति न केवल राजस्व वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करती है, बल्कि इसमें पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार, अवैध शराब पर प्रभावी नियंत्रण और उपभोक्ता हितों को समान महत्व दिया गया है। इसका परिणाम यह है कि यूपी अब देश के अग्रणी आबकारी राजस्व वाले राज्यों में शामिल हो चुका है।

आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह ने बताया कि पिछले दो वर्षों में विभिन्न राज्यों के आबकारी विभाग के अधिकारियों ने यूपी की आबकारी नीति को समझने और इसे अपने-अपने राज्यों में लागू करने की संभावनाओं को तलाशने के उद्देश्य से प्रदेश का भ्रमण किया। इस दौरान अधिकारियों ने यूपी के आबकारी आयुक्त और विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में यह समझने पर जोर दिया गया कि किस तरह नीति निर्धारण, ई-गवर्नेंस, लाइसेंसिंग प्रक्रिया और निगरानी तंत्र को सुदृढ़ कर राजस्व में निरंतर वृद्धि संभव बनाई गई।

कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों के अधिकारियों ने यूपी की नीति को व्यावहारिक और राजस्व केंद्रित बताते हुए इसकी सराहना की। कई राज्यों ने यह भी स्वीकार किया कि यूपी की आबकारी नीति से प्रेरणा लेकर वे अपने यहां भी आबकारी ढांचे में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं।

प्रदेश दौरे के दौरान विभिन्न राज्यों के आबकारी अधिकारियों ने प्रदेश की आसवनियों (डिस्टिलरीज) और शराब की दुकानों का निरीक्षण भी किया। इस निरीक्षण का उद्देश्य यह जानना था कि उत्पादन से लेकर बिक्री तक किस तरह की निगरानी व्यवस्था लागू की गई है और किस प्रकार अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने यूपी में अपनाई गई डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली, ई-लॉटरी के माध्यम से दुकानों का आवंटन, बारकोडिंग और स्टॉक प्रबंधन प्रणाली की विशेष रूप से सराहना की। अधिकारियों ने माना कि इन उपायों से न केवल राजस्व में वृद्धि हुई है, बल्कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि समस्त देश के लिए लाभकारी है। यह नीति पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के माध्यम से राजस्व में वृद्धि कर रही है, जो कि अन्य राज्यों के लिए भी सीखने का विषय है।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी की आबकारी नीति में क्या खास है?
यूपी की आबकारी नीति में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और अवैध शराब पर नियंत्रण शामिल है।
कौन से राज्य यूपी की नीति का अध्ययन कर रहे हैं?
कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, झारखंड और हिमाचल प्रदेश के अधिकारी इसकी अध्ययन कर रहे हैं।
क्या यूपी की नीति अन्य राज्यों के लिए मॉडल बन सकती है?
हाँ, कई राज्यों ने यूपी की नीति को प्रेरणा स्रोत मानते हुए इसे अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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