उत्तर प्रदेश के वन स्टॉप सेंटर: 3,18,500 महिलाओं को सहायता, लखनऊ की तीन बेटियों की आत्मनिर्भरता की कहानी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित वन स्टॉप सेंटर योजना संकट में फँसी महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा, परामर्श और पुनर्वास की एकीकृत सुविधा दे रही है। लखनऊ की तीन महिलाओं की वास्तविक कहानियाँ इस पहल के ज़मीनी असर को स्पष्ट करती हैं — शोषण और प्रताड़ना से गुज़रने के बाद आज ये तीनों आत्मनिर्भर जीवन की राह पर हैं।
योजना का विस्तार और दायरा
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित यह योजना प्रदेश के सभी 75 जिलों में 124 केंद्रों के माध्यम से संचालित है। अब तक करीब 3,18,500 मामलों में महिलाओं और बालिकाओं को सहायता दी जा चुकी है। प्रत्येक केंद्र पर अस्थायी आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, परामर्श, विधिक मदद और पुलिस सहायता एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाती है।
गौरतलब है कि यह योजना केवल आपातकालीन राहत तक सीमित नहीं है — यह पीड़ित महिलाओं को शिक्षा और रोज़गार के ज़रिये दीर्घकालिक स्वावलंबन की ओर ले जाने का प्रयास करती है।
पारिवारिक बाधाओं से उबरकर प्रतिष्ठित पद तक
लखनऊ की एक 31 वर्षीय युवती ने वन स्टॉप सेंटर को ईमेल के ज़रिये सूचित किया कि उसके परिजन उसे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से रोक रहे हैं। सेंटर की टीम ने उसके घर पहुँचकर परिजनों से संवाद किया और इसके बाद सुरक्षित व गोपनीय वातावरण में काउंसलिंग कराई गई।
परिवार ने टीम की समझाइश पर युवती को स्वतंत्र रूप से पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी। काउंसलिंग से मिले आत्मविश्वास के बल पर उसने अपनी शिक्षा पूरी की और आज एक प्रतिष्ठित पद पर सेवाएँ देकर नई मिसाल कायम कर रही है।
बचपन के शोषण से होटल मैनेजमेंट तक का सफर
लखनऊ की एक बालिका ने 16 वर्ष की आयु में वन स्टॉप सेंटर पहुँचकर बचपन से हो रहे पारिवारिक शोषण की जानकारी दी। सेंटर ने उसे काउंसलिंग और संरक्षण देने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई में भी सहयोग किया।
बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे राजकीय संरक्षण में रखा गया और उसकी शिक्षा बाधित नहीं होने दी गई। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उसे बेंगलुरु के इको संस्थान में होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिलाया गया। आज वह लखनऊ के एक होटल में कार्यरत है और अपने पैरों पर खड़ी है।
घरेलू प्रताड़ना से मुक्ति और नई शुरुआत
लखनऊ की एक अन्य 31 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि उसका पति उसे बंधक बनाकर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना दे रहा था। वन स्टॉप सेंटर की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुँची और महिला को सुरक्षित बाहर निकाला।
सेंटर में 12 दिन के अस्थायी आश्रय के दौरान काउंसलिंग की गई। उसे विवाह संबंधी सामान वापस दिलाने और सुरक्षित रूप से मायके पहुँचाने में भी सहायता मिली। अब वह स्वतंत्र रूप से रहते हुए पढ़ाई और नौकरी दोनों कर रही है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण राष्ट्रीय नीति-विमर्श के केंद्र में हैं। 75 जिलों में फैले इन केंद्रों की पहुँच और 3,18,500 से अधिक मामलों में दी गई सहायता यह दर्शाती है कि एकीकृत सेवा-मॉडल ज़मीनी स्तर पर बदलाव ला सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के केंद्रों की संख्या और गुणवत्ता में और विस्तार होने पर अधिक महिलाएँ आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकती हैं।