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उत्तर प्रदेश के वन स्टॉप सेंटर: 3,18,500 महिलाओं को सहायता, लखनऊ की तीन बेटियों की आत्मनिर्भरता की कहानी

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उत्तर प्रदेश के वन स्टॉप सेंटर: 3,18,500 महिलाओं को सहायता, लखनऊ की तीन बेटियों की आत्मनिर्भरता की कहानी

सारांश

उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में फैले 124 वन स्टॉप सेंटर अब तक 3,18,500 से अधिक महिलाओं की ज़िंदगी बदल चुके हैं। लखनऊ की तीन महिलाओं की कहानियाँ — पारिवारिक बाधा, बचपन का शोषण और घरेलू प्रताड़ना — यह साबित करती हैं कि एकीकृत सहायता मॉडल संकट को अवसर में बदल सकता है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 124 वन स्टॉप सेंटर संचालित हैं, जो केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित हैं।
अब तक करीब 3,18,500 मामलों में महिलाओं और बालिकाओं को सहायता प्रदान की जा चुकी है।
लखनऊ की 31 वर्षीय युवती ने काउंसलिंग के बाद शिक्षा पूरी कर प्रतिष्ठित पद हासिल किया।
16 वर्षीय बालिका को शोषण से मुक्त कर बेंगलुरु में होटल मैनेजमेंट प्रशिक्षण दिलाया गया; अब लखनऊ के होटल में कार्यरत।
घरेलू प्रताड़ना की शिकार 31 वर्षीय महिला को 12 दिन के आश्रय और काउंसलिंग के बाद स्वतंत्र जीवन की राह मिली।
प्रत्येक केंद्र पर अस्थायी आश्रय, चिकित्सकीय, विधिक, पुलिस और परामर्श सहायता एक ही छत के नीचे उपलब्ध है।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित वन स्टॉप सेंटर योजना संकट में फँसी महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा, परामर्श और पुनर्वास की एकीकृत सुविधा दे रही है। लखनऊ की तीन महिलाओं की वास्तविक कहानियाँ इस पहल के ज़मीनी असर को स्पष्ट करती हैं — शोषण और प्रताड़ना से गुज़रने के बाद आज ये तीनों आत्मनिर्भर जीवन की राह पर हैं।

योजना का विस्तार और दायरा

महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित यह योजना प्रदेश के सभी 75 जिलों में 124 केंद्रों के माध्यम से संचालित है। अब तक करीब 3,18,500 मामलों में महिलाओं और बालिकाओं को सहायता दी जा चुकी है। प्रत्येक केंद्र पर अस्थायी आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, परामर्श, विधिक मदद और पुलिस सहायता एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाती है।

गौरतलब है कि यह योजना केवल आपातकालीन राहत तक सीमित नहीं है — यह पीड़ित महिलाओं को शिक्षा और रोज़गार के ज़रिये दीर्घकालिक स्वावलंबन की ओर ले जाने का प्रयास करती है।

पारिवारिक बाधाओं से उबरकर प्रतिष्ठित पद तक

लखनऊ की एक 31 वर्षीय युवती ने वन स्टॉप सेंटर को ईमेल के ज़रिये सूचित किया कि उसके परिजन उसे उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से रोक रहे हैं। सेंटर की टीम ने उसके घर पहुँचकर परिजनों से संवाद किया और इसके बाद सुरक्षित व गोपनीय वातावरण में काउंसलिंग कराई गई।

परिवार ने टीम की समझाइश पर युवती को स्वतंत्र रूप से पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी। काउंसलिंग से मिले आत्मविश्वास के बल पर उसने अपनी शिक्षा पूरी की और आज एक प्रतिष्ठित पद पर सेवाएँ देकर नई मिसाल कायम कर रही है।

बचपन के शोषण से होटल मैनेजमेंट तक का सफर

लखनऊ की एक बालिका ने 16 वर्ष की आयु में वन स्टॉप सेंटर पहुँचकर बचपन से हो रहे पारिवारिक शोषण की जानकारी दी। सेंटर ने उसे काउंसलिंग और संरक्षण देने के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई में भी सहयोग किया।

बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे राजकीय संरक्षण में रखा गया और उसकी शिक्षा बाधित नहीं होने दी गई। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उसे बेंगलुरु के इको संस्थान में होटल मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिलाया गया। आज वह लखनऊ के एक होटल में कार्यरत है और अपने पैरों पर खड़ी है।

घरेलू प्रताड़ना से मुक्ति और नई शुरुआत

लखनऊ की एक अन्य 31 वर्षीय महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि उसका पति उसे बंधक बनाकर शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना दे रहा था। वन स्टॉप सेंटर की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुँची और महिला को सुरक्षित बाहर निकाला।

सेंटर में 12 दिन के अस्थायी आश्रय के दौरान काउंसलिंग की गई। उसे विवाह संबंधी सामान वापस दिलाने और सुरक्षित रूप से मायके पहुँचाने में भी सहायता मिली। अब वह स्वतंत्र रूप से रहते हुए पढ़ाई और नौकरी दोनों कर रही है।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण राष्ट्रीय नीति-विमर्श के केंद्र में हैं। 75 जिलों में फैले इन केंद्रों की पहुँच और 3,18,500 से अधिक मामलों में दी गई सहायता यह दर्शाती है कि एकीकृत सेवा-मॉडल ज़मीनी स्तर पर बदलाव ला सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के केंद्रों की संख्या और गुणवत्ता में और विस्तार होने पर अधिक महिलाएँ आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

18,500 मामलों का आँकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितनी महिलाएँ दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता तक पहुँचीं — और इसकी स्वतंत्र निगरानी कौन करता है। लखनऊ की तीन कहानियाँ मॉडल की संभावना दर्शाती हैं, पर तीन उदाहरण नीतिगत सफलता का प्रमाण नहीं होते। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आँकड़े महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में उत्तर प्रदेश को शीर्ष राज्यों में रखते हैं — जो यह सवाल उठाता है कि 124 केंद्र 24 करोड़ की आबादी के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। केंद्रों की संख्या और पहुँच बढ़ाने के साथ-साथ परिणामों का सत्यापन-योग्य डेटा सार्वजनिक करना ज़रूरी है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वन स्टॉप सेंटर योजना क्या है और यह उत्तर प्रदेश में कैसे काम करती है?
वन स्टॉप सेंटर केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित एक योजना है जो संकटग्रस्त महिलाओं को एक ही स्थान पर आश्रय, चिकित्सा, परामर्श, विधिक और पुलिस सहायता देती है। उत्तर प्रदेश में यह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में 75 जिलों के 124 केंद्रों के ज़रिये संचालित है।
उत्तर प्रदेश के वन स्टॉप सेंटर ने अब तक कितनी महिलाओं की मदद की है?
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इंदुमति के अनुसार, अब तक करीब 3,18,500 मामलों में महिलाओं और बालिकाओं को सहायता प्रदान की जा चुकी है। यह आँकड़ा योजना के व्यापक ज़मीनी प्रभाव को दर्शाता है।
वन स्टॉप सेंटर में कौन-कौन सी सुविधाएँ मिलती हैं?
इन केंद्रों पर अस्थायी आश्रय, चिकित्सकीय सहायता, मनोवैज्ञानिक परामर्श, विधिक मदद और पुलिस सहायता एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जाती है। घरेलू हिंसा, शोषण या अन्य संकट की शिकार महिलाएँ सीधे यहाँ सहायता ले सकती हैं।
लखनऊ की बालिका को वन स्टॉप सेंटर ने कैसे मदद की?
16 वर्षीय बालिका ने बचपन से हो रहे पारिवारिक शोषण की जानकारी सेंटर को दी, जिसके बाद उसे काउंसलिंग, कानूनी सहायता और राजकीय संरक्षण मिला। 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उसे बेंगलुरु के इको संस्थान में होटल मैनेजमेंट प्रशिक्षण दिलाया गया और आज वह लखनऊ के एक होटल में कार्यरत है।
क्या वन स्टॉप सेंटर घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को भी सहायता देता है?
हाँ, घरेलू प्रताड़ना की शिकार महिलाओं के लिए सेंटर की टीम पुलिस के साथ मौके पर पहुँचती है और महिला को सुरक्षित निकालती है। लखनऊ की एक 31 वर्षीय महिला को 12 दिन के अस्थायी आश्रय, काउंसलिंग और विधिक सहायता के बाद स्वतंत्र जीवन की राह मिली।
राष्ट्र प्रेस
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