21 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी मतदाता सूची में 16,554 बदलावों पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, पीलीभीत में 13,150 नामों की अदला-बदली का दावा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी मतदाता सूची में 16,554 बदलावों पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, पीलीभीत में 13,150 नामों की अदला-बदली का दावा

सारांश

यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने बड़ा दावा किया है — पीलीभीत सदर में 16,554 मतदाताओं से जुड़े कथित बदलाव, जिनमें 13,150 नाम बदले गए। जीत का अंतर सिर्फ 6,930 था। पार्टी अदालत जाने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

कांग्रेस ने 21 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में प्रेसवार्ता कर यूपी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी का खुलासा करने का दावा किया।
पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में कथित तौर पर 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, 884 नाम हटाए गए और 2,600 नए नाम जोड़े गए — कुल 16,554 बदलाव।
2022 में इसी सीट पर BJP मंत्री संजय गंगवार की जीत का अंतर केवल 6,930 मत था, जो कथित बदलावों से आधे से भी कम।
सुप्रिया श्रीनेत ने ईपीआईसी नंबर 4जी-एमसीएम-4746 का उदाहरण देते हुए नाम-बदलाव का विशिष्ट मामला प्रस्तुत किया।
कांग्रेस ने 2024 में यूपी में 15.41 करोड़ मतदाताओं का हवाला देते हुए बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए।
पार्टी ने अदालत जाने और प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी जाँच जारी रखने की घोषणा की; चुनाव आयोग का पक्ष अभी सामने नहीं आया।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 21 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का दावा है कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, 884 के नाम हटाए गए और 2,600 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए — इस प्रकार कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़े बदलावों का कथित तौर पर पर्दाफाश हुआ। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेगी।

मुख्य आरोप और विवरण

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के अंतिम ड्राफ्ट में नाम दर्ज होने के बाद भी मतदाताओं के विवरण में बदलाव किए गए। उनके अनुसार, 13,150 मतदाताओं के ईपीआईसी नंबर और सीरियल नंबर समान रहने के बावजूद उनके नाम बदल दिए गए — जो प्रक्रियागत दृष्टि से अनुचित है।

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सोशल मीडिया विभाग की चेयरमैन सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेसवार्ता में एक उदाहरण पेश करते हुए दावा किया कि ईपीआईसी नंबर 4जी-एमसीएम-4746 पर पहले मोहम्मद यूसुफ (उम्र 35 वर्ष, पुरुष) का नाम दर्ज था, जबकि अब उसी नंबर पर रमजान अली के पुत्र हसरत (उम्र 35 वर्ष, पुरुष) का विवरण दर्ज है। ईपीआईसी नंबर, उम्र और लिंग समान हैं, परंतु मतदाता और पिता का नाम अलग है।

चुनावी संदर्भ और राजनीतिक महत्व

श्रीनेत ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री संजय गंगवार ने केवल 6,930 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। कांग्रेस का तर्क है कि इसी निर्वाचन क्षेत्र में 16 हजार से अधिक मतदाताओं से संबंधित कथित बदलाव — जीत के अंतर से दोगुने से भी अधिक — लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं, और मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण उसी के मद्देनजर हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल देशभर में एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

सॉफ्टवेयर और प्रक्रियागत सवाल

श्रीनेत ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में ये बदलाव अलग-अलग समय पर समूहों में किए गए। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों की ओर से सॉफ्टवेयर तक पहुँच नहीं होने की बात कही जा रही है, जिससे जवाबदेही का सवाल और गहरा हो जाता है। उन्होंने जिलाधिकारियों और उपजिलाधिकारियों से कथित विसंगतियों पर स्थिति स्पष्ट करने की माँग की।

उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में करीब 15.41 करोड़ मतदाता थे, और इस अवधि में नए मतदाताओं के जुड़ने की अपेक्षा के मुकाबले बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और चुनाव आयोग का पक्ष इस प्रेसवार्ता में सामने नहीं आया।

पार्टी की आगामी रणनीति

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने कहा कि मतदाता पहचान पत्र होने के बावजूद मतदान के दिन सूची में नाम नहीं मिलना लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट है। उन्होंने घोषणा की कि पार्टी कानूनी राय लेगी और एसआईआर से जुड़ी आपत्तियों पर संगठन के स्तर पर संघर्ष करेगी।

कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पार्टी इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने और श्रीनेत ने मतदाताओं से अपील की कि वे निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर अपना ईपीआईसी नंबर डालकर सूची में अपना विवरण जाँचें और किसी भी गड़बड़ी की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें। कांग्रेस ने यह भी कहा कि प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह की जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसका ऑडिट ट्रेल कहाँ है। चुनाव आयोग की चुप्पी — कम से कम इस प्रेसवार्ता के समय तक — ने कांग्रेस के आरोपों को और अधिक हवा दी है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर छूट जाती है वह यह है कि मतदाता सूची में इस तरह की 'डेटा एंट्री त्रुटियाँ' अगर व्यापक पैमाने पर होती हैं, तो वे बिना किसी बड़े षड्यंत्र के भी मतदान के दिन वैध मतदाताओं को बाहर कर सकती हैं — और यही असली लोकतांत्रिक खतरा है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी मतदाता सूची में कांग्रेस ने क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस ने दावा किया है कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के ईपीआईसी नंबर समान रहते हुए नाम बदल दिए गए, 884 नाम हटाए गए और 2,600 नए नाम जोड़े गए — कुल 16,554 कथित बदलाव। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर खतरा बताया है।
एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) क्या होता है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाने की प्रक्रिया है, जिसमें नाम जोड़े, हटाए और संशोधित किए जाते हैं। इसे आमतौर पर चुनाव से पहले चलाया जाता है ताकि सूची में केवल पात्र और वास्तविक मतदाता ही दर्ज हों।
कांग्रेस इस मामले में आगे क्या करेगी?
कांग्रेस ने घोषणा की है कि पार्टी अदालत का दरवाजा खटखटाएगी और कानूनी राय लेगी। इसके अलावा, प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी मतदाता सूची की जाँच जारी है।
पीलीभीत सदर सीट चुनावी दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है?
2022 के विधानसभा चुनाव में पीलीभीत सदर से BJP मंत्री संजय गंगवार ने केवल 6,930 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। कांग्रेस का तर्क है कि इस सीट पर 16,554 कथित बदलाव — जीत के अंतर से दोगुने — चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर क्या कहा है?
इस प्रेसवार्ता के समय तक चुनाव आयोग की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले