यूपी मतदाता सूची में 16,554 बदलावों पर कांग्रेस का बड़ा आरोप, पीलीभीत में 13,150 नामों की अदला-बदली का दावा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 21 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी का दावा है कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, 884 के नाम हटाए गए और 2,600 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए — इस प्रकार कुल 16,554 मतदाताओं से जुड़े बदलावों का कथित तौर पर पर्दाफाश हुआ। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
मुख्य आरोप और विवरण
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के अंतिम ड्राफ्ट में नाम दर्ज होने के बाद भी मतदाताओं के विवरण में बदलाव किए गए। उनके अनुसार, 13,150 मतदाताओं के ईपीआईसी नंबर और सीरियल नंबर समान रहने के बावजूद उनके नाम बदल दिए गए — जो प्रक्रियागत दृष्टि से अनुचित है।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सोशल मीडिया विभाग की चेयरमैन सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेसवार्ता में एक उदाहरण पेश करते हुए दावा किया कि ईपीआईसी नंबर 4जी-एमसीएम-4746 पर पहले मोहम्मद यूसुफ (उम्र 35 वर्ष, पुरुष) का नाम दर्ज था, जबकि अब उसी नंबर पर रमजान अली के पुत्र हसरत (उम्र 35 वर्ष, पुरुष) का विवरण दर्ज है। ईपीआईसी नंबर, उम्र और लिंग समान हैं, परंतु मतदाता और पिता का नाम अलग है।
चुनावी संदर्भ और राजनीतिक महत्व
श्रीनेत ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री संजय गंगवार ने केवल 6,930 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी। कांग्रेस का तर्क है कि इसी निर्वाचन क्षेत्र में 16 हजार से अधिक मतदाताओं से संबंधित कथित बदलाव — जीत के अंतर से दोगुने से भी अधिक — लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में प्रस्तावित हैं, और मतदाता सूची का यह पुनरीक्षण उसी के मद्देनजर हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल देशभर में एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
सॉफ्टवेयर और प्रक्रियागत सवाल
श्रीनेत ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में ये बदलाव अलग-अलग समय पर समूहों में किए गए। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों की ओर से सॉफ्टवेयर तक पहुँच नहीं होने की बात कही जा रही है, जिससे जवाबदेही का सवाल और गहरा हो जाता है। उन्होंने जिलाधिकारियों और उपजिलाधिकारियों से कथित विसंगतियों पर स्थिति स्पष्ट करने की माँग की।
उन्होंने यह भी दावा किया कि वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश में करीब 15.41 करोड़ मतदाता थे, और इस अवधि में नए मतदाताओं के जुड़ने की अपेक्षा के मुकाबले बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है और चुनाव आयोग का पक्ष इस प्रेसवार्ता में सामने नहीं आया।
पार्टी की आगामी रणनीति
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने कहा कि मतदाता पहचान पत्र होने के बावजूद मतदान के दिन सूची में नाम नहीं मिलना लोकतांत्रिक अधिकारों पर चोट है। उन्होंने घोषणा की कि पार्टी कानूनी राय लेगी और एसआईआर से जुड़ी आपत्तियों पर संगठन के स्तर पर संघर्ष करेगी।
कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पार्टी इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने और श्रीनेत ने मतदाताओं से अपील की कि वे निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर अपना ईपीआईसी नंबर डालकर सूची में अपना विवरण जाँचें और किसी भी गड़बड़ी की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें। कांग्रेस ने यह भी कहा कि प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तरह की जाँच जारी है।