22 अक्टूबर 2026
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पीलीभीत में 13,000 मतदाताओं के EPIC डेटा से छेड़छाड़: कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

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पीलीभीत में 13,000 मतदाताओं के EPIC डेटा से छेड़छाड़: कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल

सारांश

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में 13,000 मतदाताओं के EPIC नंबर से जुड़े फोन नंबर और नाम बदले जाने का आरोप — एक संयोग से शुरू हुई जाँच ने बड़ा मामला खड़ा किया। कांग्रेस का दावा है कि यह गलती नहीं, बल्कि सुनियोजित छेड़छाड़ है। चुनाव आयोग ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि पीलीभीत में 13,000 से अधिक मतदाताओं के EPIC नंबर से जुड़े विवरण बदले गए।
कथित बदलाव 10 अप्रैल को SIR की अंतिम सूची जारी होने के बाद हुए; EPIC नंबर वही रहा, नाम और फोन नंबर बदले गए।
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा के अनुसार निर्वाचन आयोग ने मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
कांग्रेस ने दस्तावेज़ी सबूतों के आधार पर आरोप लगाए और हर जिले में स्वतंत्र मतदाता सूची सत्यापन की घोषणा की।
मसूद ने NDA पर आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के माध्यम से लोकतंत्र को कमज़ोर किया जा रहा है।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 22 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में 13,000 से अधिक मतदाताओं के EPIC नंबर से जुड़े टेलीफोन नंबर और व्यक्तिगत विवरण में बदलाव किए गए हैं। यह मामला इंडी गठबंधन की उस बैठक में उठा जो विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर बुलाई गई थी।

मुख्य आरोप और दस्तावेज़ी सबूत

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब एक मतदाता अपना वोट ऑनलाइन जाँच रहा था और उसी EPIC नंबर पर दर्ज नाम व अन्य विवरण बदले हुए पाए। मसूद ने कहा, 'हम आरोप नहीं लगा रहे हैं बल्कि सबूत पेश कर रहे हैं... 13,000 वोटों के साथ छेड़छाड़ होना कोई गलती नहीं हो सकती।'

उन्होंने बताया कि चार-पाँच दिनों की गहन जाँच के बाद यह आँकड़े सामने आए। उनका कहना है कि 13,000 मतदाताओं के EPIC नंबरों से जुड़े फोन नंबर बदले गए और यह काम कथित तौर पर केंद्रीकृत तरीके से किया गया।

SIR प्रक्रिया और गड़बड़ी का संदर्भ

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने बताया कि पीलीभीत में यह बदलाव 10 अप्रैल को SIR की अंतिम सूची जारी होने के बाद हुए। उन्होंने कहा कि EPIC नंबर वही रहा, लेकिन उस नंबर पर दर्ज नाम और पिता का नाम बदल दिया गया। पार्टी ने अपने संगठन के माध्यम से इसका सत्यापन किया और इसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रस्तुत किया।

चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

आराधना मिश्रा के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया है और कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। हालाँकि, आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया है।

राजनीतिक आरोप और विपक्ष का रुख

मसूद ने NDA पर निशाना साधते हुए कहा कि मतदाता सूचियों के जरिए लोकतंत्र को नष्ट किया जा रहा है और इसकी जाँच होनी चाहिए कि यह काम किसके इशारे पर हो रहा है। उन्होंने राहुल गांधी का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता पहले ही इस तरह की संभावनाओं पर चेतावनी दे चुके थे।

आगे की कार्रवाई

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने घोषणा की कि आने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी अब हर जिले में मतदाता सूचियों का स्वतंत्र सत्यापन करेगी। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया जाएगा कि किसी भी मतदाता का डेटा अनधिकृत रूप से न बदला जाए।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया जारी है और विपक्षी दलों की इस प्रक्रिया की पारदर्शिता पर नज़र बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह महज स्थानीय गड़बड़ी नहीं — यह डिजिटल मतदाता डेटाबेस की संरचनागत कमज़ोरी का संकेत है। गौरतलब है कि EPIC नंबर बनाए रखकर नाम और फोन बदलने की यह कथित तकनीक परिष्कृत है, न कि आकस्मिक। असली सवाल यह है कि निर्वाचन आयोग ने केवल 'आश्वासन' दिया, ठोस जाँच या FIR की घोषणा नहीं — जो विपक्ष के दबाव को स्वीकार करता है लेकिन जवाबदेही से बचता भी दिखता है। आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले यदि यह पैटर्न अन्य जिलों में भी सामने आया, तो यह मामला राष्ट्रीय चुनावी अखंडता की बहस का केंद्र बन सकता है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीलीभीत मतदाता EPIC डेटा छेड़छाड़ मामला क्या है?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के अनुसार, उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में 13,000 से अधिक मतदाताओं के EPIC नंबर पर दर्ज नाम, पिता का नाम और फोन नंबर बदल दिए गए। यह बदलाव 10 अप्रैल को SIR की अंतिम सूची जारी होने के बाद कथित तौर पर केंद्रीकृत तरीके से किए गए।
यह मामला कैसे सामने आया?
एक मतदाता अपना वोट ऑनलाइन जाँच रहा था तभी उसने पाया कि उसके EPIC नंबर पर दर्ज विवरण बदल गया है। इससे कांग्रेस की टीम सतर्क हुई और चार-पाँच दिनों की जाँच के बाद 13,000 ऐसे मामले सामने आए।
निर्वाचन आयोग ने इस पर क्या कदम उठाया?
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा के अनुसार, निर्वाचन आयोग ने मामले का संज्ञान लिया और कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालाँकि, आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान नहीं आया है।
कांग्रेस आगे क्या करने की योजना बना रही है?
पार्टी ने घोषणा की है कि वह आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले हर जिले में अपने संगठन के माध्यम से मतदाता सूचियों का स्वतंत्र सत्यापन करेगी। इसका उद्देश्य इस तरह की संभावित गड़बड़ियों को समय रहते उजागर करना है।
SIR प्रक्रिया क्या है और इसका इस मामले से क्या संबंध है?
SIR यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूचियों को अद्यतन किया जाता है। कांग्रेस का आरोप है कि इसी प्रक्रिया की आड़ में पीलीभीत में 10 अप्रैल की अंतिम सूची जारी होने के बाद डेटा में फेरबदल किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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