21 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीलीभीत मतदाता सूची विवाद: निर्वाचन आयोग ने ERO और VRC ऑपरेटर को हटाया, UP में व्यापक जांच के आदेश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीलीभीत मतदाता सूची विवाद: निर्वाचन आयोग ने ERO और VRC ऑपरेटर को हटाया, UP में व्यापक जांच के आदेश

सारांश

पीलीभीत की मतदाता सूची में EPIC नंबर पर गलत विवरण दिखने की पुष्टि के बाद UP निर्वाचन आयोग ने ERO और VRC ऑपरेटर को हटाया और कानूनी कार्रवाई के आदेश दिए। कांग्रेस का दावा है कि 16,554 मतदाताओं के विवरण बदले गए। अब पूरे प्रदेश में जांच होगी।

मुख्य बातें

UP मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने विधानसभा क्षेत्र 127-पीलीभीत की मतदाता सूची में EPIC नंबर से जुड़ी त्रुटियों की पुष्टि की।
ERO और VRC ऑपरेटर को तत्काल मतदाता सूची कार्यों से हटाया गया; लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 व BNS की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई के आदेश।
जनपद पीलीभीत के सभी विधानसभा क्षेत्रों की जांच कर दो दिनों में रिपोर्ट देने का निर्देश; पूरे UP के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों से भी रिपोर्ट तलब।
कांग्रेस का आरोप — पीलीभीत सदर में 13,150 नाम बदले , 884 नाम हटाए , 2,600 नए नाम जोड़े ; कुल 16,554 मतदाताओं के विवरण प्रभावित।
कांग्रेस नेताओं राजेंद्र पाल गौतम , आराधना मिश्रा 'मोना' , सुप्रिया श्रीनेत और इमरान मसूद ने स्वतंत्र जांच व न्यायालय जाने की चेतावनी दी।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने विधानसभा क्षेत्र 127-पीलीभीत की मतदाता सूची में सामने आई गंभीर त्रुटियों को स्वीकार करते हुए 21 अक्टूबर 2026 को जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश जारी किए। आयोग ने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और VRC ऑपरेटर को तत्काल मतदाता सूची से जुड़े कार्यों से हटाने तथा उनके विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि और प्रारंभिक जांच

शिकायतें सामने आई थीं कि पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज कुछ मतदाताओं के EPIC नंबर ऑनलाइन खोजने पर संबंधित मतदाता की जानकारी के स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति का विवरण दिखाई दे रहा था। इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मामला जिला निर्वाचन अधिकारी, पीलीभीत को जांच के लिए सौंपा।

जिला निर्वाचन अधिकारी की प्रस्तुत रिपोर्ट में इन त्रुटियों की पुष्टि हो गई — जिसके बाद आयोग ने सुधारात्मक और दंडात्मक, दोनों कदम एक साथ उठाए। गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग का यह कदम ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चल रहा है।

आयोग के आदेश: क्या-क्या निर्देश जारी हुए

निर्वाचन विभाग ने त्रुटियों को तत्काल सुधारने के साथ-साथ सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO) की भूमिका और उत्तरदायित्व पर स्पष्ट रिपोर्ट भी माँगी है। जनपद पीलीभीत के सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की गहन जांच कर दो दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

इससे भी आगे जाते हुए आयोग ने प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने जिलों की समस्त विधानसभा मतदाता सूचियों की इसी आधार पर जांच करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है — यानी यह जांच अब केवल पीलीभीत तक सीमित नहीं रही।

कांग्रेस के आरोप और दावे

लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता में कांग्रेस नेताओं राजेंद्र पाल गौतम, आराधना मिश्रा 'मोना', सुप्रिया श्रीनेत और इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि SIR अभियान के दौरान पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, 884 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और 2,600 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए।

कांग्रेस के अनुसार, इन तीनों श्रेणियों में कुल मिलाकर 16,554 मतदाताओं से जुड़े बदलाव हुए हैं। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि कई मामलों में EPIC नंबर समान रहने के बावजूद मतदाता का नाम और अन्य विवरण बदल दिए गए। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने, दोषियों पर कार्रवाई करने और मतदाता सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को न्यायालय में भी ले जा सकती है।

आम मतदाताओं पर असर और आगे की राह

EPIC नंबर किसी मतदाता की प्राथमिक पहचान होती है — यदि इसी से जुड़े विवरण गलत हों, तो मतदान के दिन मतदाता को बूथ पर पहचान संबंधी परेशानियाँ हो सकती हैं। यह ऐसे समय में विशेष चिंता का विषय है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव निकट हैं। पूरे प्रदेश में जांच का आदेश इस बात का संकेत है कि त्रुटियाँ अन्य जिलों में भी हो सकती हैं।

आयोग की त्वरित प्रतिक्रिया और दो दिनों की समय-सीमा तय करना दर्शाता है कि इस मामले को चुनावी विश्वसनीयता के लिए सीधा खतरा माना जा रहा है। आगामी दिनों में AERO की रिपोर्ट और प्रदेशव्यापी समीक्षा के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या यह समस्या प्रणालीगत है या पीलीभीत तक सीमित।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उतना ही बड़ा सवाल खड़ा करता है — अगर एक शिकायत पर EPIC नंबर की इतनी बड़ी गड़बड़ी सामने आ गई, तो SIR जैसे व्यापक अभियान में बिना शिकायत के कितनी त्रुटियाँ दबी रह गई होंगी? पूरे UP में जांच का आदेश खुद यह स्वीकार करता है कि समस्या स्थानीय नहीं, संभावित रूप से प्रणालीगत है। कांग्रेस के 16,554 मतदाताओं के आँकड़े अभी दावे के स्तर पर हैं, लेकिन आयोग की जांच इन्हें सत्यापित या खारिज करेगी — और उसका नतीजा 2027 के UP चुनाव की विश्वसनीयता पर सीधा असर डालेगा। असली परीक्षा यह है कि क्या यह जवाबदेही एक अधिकारी तक सीमित रहती है, या निगरानी के ढाँचे में भी सुधार होता है।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीलीभीत मतदाता सूची विवाद क्या है?
विधानसभा क्षेत्र 127-पीलीभीत की मतदाता सूची में कुछ मतदाताओं का EPIC नंबर ऑनलाइन खोजने पर उनकी जगह किसी अन्य व्यक्ति का विवरण दिखाई दे रहा था। जिला निर्वाचन अधिकारी की जांच में इस त्रुटि की पुष्टि हुई, जिसके बाद UP निर्वाचन आयोग ने कार्रवाई शुरू की।
निर्वाचन आयोग ने दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की है?
आयोग ने ERO और VRC ऑपरेटर को तत्काल मतदाता सूची से जुड़े कार्यों से हटाने का आदेश दिया है। उनके विरुद्ध लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई भी होगी।
कांग्रेस ने मतदाता सूची को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस का दावा है कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, 884 नाम हटाए गए और 2,600 नए नाम जोड़े गए — कुल 16,554 मतदाता प्रभावित हुए। पार्टी ने स्वतंत्र जांच और न्यायालय जाने का संकेत भी दिया है।
क्या यह जांच केवल पीलीभीत तक सीमित है?
नहीं। निर्वाचन आयोग ने जनपद पीलीभीत के सभी विधानसभा क्षेत्रों की जांच के साथ-साथ UP के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी उनके जिलों की समस्त विधानसभा मतदाता सूचियों की जांच कर दो दिनों में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
EPIC नंबर क्यों महत्वपूर्ण है और इसमें गड़बड़ी का क्या असर होता है?
EPIC नंबर किसी मतदाता की प्राथमिक पहचान संख्या होती है, जिससे मतदान के दिन उसकी पहचान सत्यापित की जाती है। यदि इस नंबर से जुड़ा विवरण गलत हो, तो मतदाता को बूथ पर मतदान करने में बाधा आ सकती है — जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सीधा असर डालती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 5 घंटे पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले