22 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीलीभीत में 13,150 वोटरों के नाम बदले, EPIC नंबर वही — चुनाव आयोग पर कांग्रेस का गंभीर आरोप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीलीभीत में 13,150 वोटरों के नाम बदले, EPIC नंबर वही — चुनाव आयोग पर कांग्रेस का गंभीर आरोप

सारांश

पीलीभीत की 127 नंबर विधानसभा में 13,150 वोटरों के EPIC नंबर वही, लेकिन नाम बदल दिए गए — यह आरोप अगर सही निकला तो यह महज तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा प्रहार है। कांग्रेस अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि पीलीभीत की 127 नंबर विधानसभा में 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर समान रखते हुए नाम बदल दिए गए।
कथित तौर पर यह बदलाव 10 अप्रैल के बाद हुआ, जब SIR लागू होने के बाद मतदाता सूची में कोई बदलाव वर्जित था।
इस विधानसभा क्षेत्र से योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री संजय गंगवार निर्वाचित होते हैं।
यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और सांसद इमरान मसूद ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भी BJP पर वोट चोरी का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय से SIR को शीघ्र खारिज करने और सभी मतदाताओं से अपना EPIC नंबर जाँचने की अपील की।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने 21 अक्टूबर 2026 को पीलीभीत की 127 नंबर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदले जाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर निशाना साधा। श्रीनेत के अनुसार इन मतदाताओं के EPIC नंबर यथावत हैं, किंतु उनके नाम और पिता के नाम बदल दिए गए — जो कथित तौर पर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद किया गया। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को शीघ्र खारिज करने की अपील की है।

मुख्य आरोप क्या है

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि 10 अप्रैल को SIR लागू होने के बाद मतदाता सूची में न नाम जोड़े जा सकते थे और न हटाए जा सकते थे। लेकिन कथित तौर पर इसी प्रतिबंधित अवधि में 127 नंबर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर अपरिवर्तित रखते हुए उनके नाम बदल दिए गए।

श्रीनेत ने सवाल उठाया, 'इनके साथ खिलवाड़ किसने किया — डीएम, एसडीएम और ज्ञानेश कुमार? सॉफ्टवेयर पर एकछत्र राज चुनाव आयोग का है।' उन्होंने इसे महज तकनीकी चूक नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश बताया।

विपक्ष की व्यापक प्रतिक्रिया

यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो जाने के बाद एक ही विधानसभा में 13,150 लोगों के नाम बदले जाना 'चिंताजनक' है। उनके अनुसार ऐसा मतदाता, जो मानता है कि उसका नाम सूची में है और EPIC नंबर सही है, मतदान के दिन वोट देने से वंचित हो सकता है।

गौतम ने कहा, 'अगर एक ही विधानसभा क्षेत्र में 13,150 लोगों को उनके नाम बदलकर उनके मत के अधिकार से वंचित किया जा रहा है, तो चुनाव को निष्पक्ष कैसे माना जा सकता है?'

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर कहा कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा, '13 हजार से ज्यादा वोटों के साथ एक ही विधानसभा के अंदर खेल हुआ है। देश में अगर इस तरह से काम होगा तो लोकतंत्र और चुनाव के कोई मायने नहीं बचेंगे।'

सपा का रुख

समाजवादी पार्टी विधायक रविदास मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि जहाँ-जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारें हैं, वहाँ वोट चोरी होती है। उन्होंने लखनऊ और बनारस का उदाहरण देते हुए कहा कि यूपी और केंद्र की दोनों सरकारें उनके अनुसार 'अवैध' हैं।

मेहरोत्रा ने दावा किया कि अखिलेश यादव का जनाधार लगातार बढ़ रहा है और उत्तर प्रदेश की जनता सत्ता परिवर्तन के लिए संकल्पबद्ध है।

गौरतलब पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दल पहले से ही चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। पीलीभीत की 127 नंबर विधानसभा से योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री संजय गंगवार निर्वाचित होते हैं, जिससे विपक्ष इस मामले को राजनीतिक रंग दे रहा है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लगे हों — लेकिन इस बार आरोप विशेष रूप से EPIC नंबर अपरिवर्तित रखते हुए नाम बदलने पर केंद्रित हैं, जो तकनीकी रूप से अधिक सूक्ष्म और जटिल मसला है।

आगे क्या होगा

कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले को सर्वोच्च न्यायालय में उठाया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे अपना EPIC नंबर और नाम तुरंत जाँचें। चुनाव आयोग की ओर से इस मुद्दे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मुख्यधारा कवरेज चुनाव आयोग से स्पष्ट खंडन या स्वीकृति माँगने में पीछे रह गई है — वह पक्ष सुने बिना तस्वीर अधूरी है। SIR पर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीलीभीत में 13,150 वोटरों के नाम बदलने का मामला क्या है?
कांग्रेस के अनुसार पीलीभीत की 127 नंबर विधानसभा में 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर वही रखे गए, लेकिन उनके नाम और पिता के नाम बदल दिए गए। कांग्रेस का दावा है कि यह अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद और SIR लागू होने के बाद हुआ, जब ऐसे बदलाव वर्जित थे।
SIR क्या है और इसे क्यों खारिज करने की माँग हो रही है?
SIR यानी Special Intensive Revision — मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया है। 10 अप्रैल को SIR लागू होने के बाद मतदाता सूची में बदलाव पर रोक लगती है। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रतिबंधित अवधि के बाद भी नाम बदले गए, इसलिए सुप्रीम कोर्ट से इसे खारिज करने की माँग की गई है।
इस विवाद में चुनाव आयोग की क्या भूमिका बताई जा रही है?
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर पर एकछत्र नियंत्रण चुनाव आयोग का है। उन्होंने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और चुनाव आयोग के अधिकारी ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर जवाबदेही माँगी। चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
इस मामले का मतदाताओं पर क्या असर पड़ सकता है?
यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के अनुसार जिस मतदाता का EPIC नंबर सही दिखता है, वह मान लेता है कि सब ठीक है — लेकिन मतदान के दिन उसका नाम सूची में न होने के कारण वह वोट देने से वंचित हो सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए कांग्रेस ने सभी मतदाताओं से अपना EPIC नंबर और नाम तुरंत जाँचने की अपील की है।
पीलीभीत की 127 नंबर विधानसभा राजनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?
यह विधानसभा क्षेत्र योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्री संजय गंगवार का निर्वाचन क्षेत्र है। इसी वजह से कांग्रेस इस मामले को सत्तारूढ़ BJP की कथित राजनीतिक मंशा से जोड़ते हुए देख रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 6 घंटे पहले
  3. 3 दिन पहले
  4. 5 दिन पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 2 सप्ताह पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 1 साल पहले