3 अक्टूबर 2026
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एसआईआर पर सलीम इंजीनियर का चुनाव आयोग पर हमला: '13 करोड़ वोटर्स के नाम हटाना गंभीर अपराध'

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एसआईआर पर सलीम इंजीनियर का चुनाव आयोग पर हमला: '13 करोड़ वोटर्स के नाम हटाना गंभीर अपराध'

सारांश

जमात-ए-इस्लामी हिंद के वाइस प्रेसिडेंट सलीम इंजीनियर का आरोप — एसआईआर के नाम पर 13 करोड़ से अधिक योग्य मतदाताओं को वोट के अधिकार से वंचित किया गया। बिहार से बंगाल तक फैली इस विवादित प्रक्रिया और चुनाव आयोग के भीतर कथित आंतरिक शिकायतों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

मुख्य बातें

जमात-ए-इस्लामी हिंद के वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने 3 अक्टूबर 2026 को चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के तहत 13 करोड़ से अधिक वैध मतदाताओं के नाम अवैध तरीके से सूची से हटाए गए।
एसआईआर प्रक्रिया सबसे पहले बिहार में लागू हुई, इसके बाद पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में भी नाम हटाए जाने के आरोप लगे।
चुनाव आयोग के दो सदस्यों के बीच कथित पत्राचार और शिकायतों को नज़रअंदाज़ किए जाने का भी उल्लेख किया गया।
सीईसी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों पर BNS धारा 163 लगाए जाने को सलीम इंजीनियर ने नागरिक अधिकारों का दमन बताया।
उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता की माँग की।

जमात-ए-इस्लामी हिंद के वाइस प्रेसिडेंट प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने 3 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 13 करोड़ से अधिक योग्य मतदाताओं के नाम अवैध तरीके से सूची से काटे गए हैं, जिसे उन्होंने 'गंभीर अपराध' बताया।

एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए सवाल

सलीम इंजीनियर ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया सबसे पहले बिहार में लागू की गई, जहाँ चुनाव की तारीखें नज़दीक थीं और बेहद कम समय में इसे निपटाने की कोशिश की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जल्दबाज़ी के कारण बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए। उनके अनुसार, इसके बाद कई अन्य राज्यों में भी यही स्थिति दोहराई गई और पश्चिम बंगाल में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की शिकायतें सामने आईं।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया चयनात्मक और पक्षपातपूर्ण रही, जिसमें पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की गई। साथ ही, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कुछ ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची में जोड़े गए हैं, जिनकी वैधता की जाँच की जानी चाहिए।

चुनाव आयोग के भीतर कथित आंतरिक विवाद

सलीम इंजीनियर ने चुनाव आयोग के दो सदस्यों के बीच हुए कथित पत्राचार और उनकी शिकायतों को नज़रअंदाज़ किए जाने का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, इस आंतरिक विवाद ने एसआईआर की निष्पक्षता और संस्थागत विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। गौरतलब है कि इस प्रक्रिया की शुरुआत से ही विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों द्वारा इस पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

सीईसी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन का समर्थन

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हुए विरोध-प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए सलीम इंजीनियर ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों और फैसलों के विरुद्ध असहमति जताना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस अधिकार को दबाने की कोशिश से समस्याएँ और बढ़ेंगी।

प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा रोके जाने और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 163 लागू किए जाने पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विरोध का दायरा अब जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे देश में फैल चुका है।

पारदर्शिता की माँग

सलीम इंजीनियर ने एसआईआर की संपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष, खुली और जवाबदेह होनी चाहिए। उनके अनुसार, चुनाव आयोग की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है कि वह हर पात्र नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करे, न कि उन्हें इससे वंचित करे।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में अगले कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं और मतदाता सूची की शुद्धता का मुद्दा राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले दिनों में विभिन्न दल और नागरिक संगठन इस मुद्दे पर चुनाव आयोग से जवाब माँगते रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर संदेह बना रहेगा।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) क्या है और यह विवाद में क्यों है?
एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है जिसमें अपात्र नामों को हटाया और नए पात्र नागरिकों को जोड़ा जाता है। यह इसलिए विवाद में है क्योंकि आलोचकों का दावा है कि इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वैध मतदाताओं के नाम भी काटे गए, विशेषकर बिहार और पश्चिम बंगाल में।
सलीम इंजीनियर ने 13 करोड़ वोटर्स के नाम हटाए जाने का क्या आधार बताया?
प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने यह दावा किया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम अवैध और पक्षपातपूर्ण तरीके से सूची से हटाए गए। हालाँकि यह उनका अपना दावा है और इसका स्वतंत्र सत्यापन अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
चुनाव आयोग के भीतर कथित आंतरिक विवाद क्या है?
सलीम इंजीनियर ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों के बीच एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पत्राचार हुआ और शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिन्हें नज़रअंदाज़ किया गया। उनके अनुसार, यह संस्थागत असहमति एसआईआर की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सीईसी के खिलाफ प्रदर्शनकारियों पर BNS धारा 163 क्यों लगाई गई?
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू कर प्रदर्शनकारियों को रोका। यह धारा सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका में सभा पर प्रतिबंध लगाती है। सलीम इंजीनियर ने इसे नागरिक असहमति के अधिकार का दमन बताया।
इस विवाद का आगामी चुनावों पर क्या असर हो सकता है?
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब देश में कई राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं। अगर मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल बने रहे और चुनाव आयोग पारदर्शी जवाब नहीं देता, तो चुनावी प्रक्रिया की स्वीकार्यता पर व्यापक असर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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