24 सितंबर 2026
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एसआईआर विवाद: कांग्रेस का आरोप — 19 राज्यों में 13 करोड़ वोटर हटाए, CEC हटाने की मांग

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एसआईआर विवाद: कांग्रेस का आरोप — 19 राज्यों में 13 करोड़ वोटर हटाए, CEC हटाने की मांग

सारांश

कांग्रेस महासचिव सुरजेवाला ने चुनाव आयोग पर सबसे तीखा हमला बोला — एसआईआर अभियान के ज़रिए 19 राज्यों में 13 करोड़ वोटर हटाने का आरोप, CEC को हटाने और संसद का विशेष सत्र बुलाने की माँग। आयोग ने सभी आरोप खारिज किए।

मुख्य बातें

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने 24 सितंबर 2026 को आरोप लगाया कि एसआईआर अभियान के तहत 19 राज्यों में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर सूची से हटाए गए।
अकेले कर्नाटक में कथित तौर पर 1.43 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का दावा।
कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, साइबर फॉरेंसिक ऑडिट और संसद का विशेष सत्र बुलाने की माँग की।
चुनाव आयोग ने सभी आरोप खारिज करते हुए कहा एसआईआर के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
पश्चिम बंगाल में 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुईं — 22.21 लाख नाम जोड़ने और 16.10 लाख नाम हटाने से संबंधित, जो चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया।
कांग्रेस ने बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों की वैधता की समीक्षा की भी माँग की।

कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने 24 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में एक प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के ज़रिए 19 राज्यों में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर चुनाव आयोग (ECI) को 'हाइजैक' करने का गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की।

एसआईआर अभियान पर आरोप

सुरजेवाला के अनुसार, जून 2025 से चुनाव आयोग ने 19 राज्यों में एसआईआर अभियान चलाया, जिसके तहत कथित तौर पर करीब 13 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उनका दावा है कि इनमें अकेले कर्नाटक के 1.43 करोड़ मतदाता शामिल हैं।

कांग्रेस नेता ने इसे अभूतपूर्व कार्रवाई बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के ज़रिए पात्र मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है — पात्र नागरिकों के नाम सूची से हटाना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करना है।'

चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का दावा

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली CEC ज्ञानेश कुमार के हाथों में केंद्रीकृत हो गई है। उनका कहना है कि अन्य दो चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और संचार पर आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं।

हालाँकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आयोग के भीतर किसी प्रकार का मतभेद नहीं है।

फॉर्म-6 और पश्चिम बंगाल पर सवाल

सुरजेवाला ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित बदलावों की भी आलोचना की। उनका कहना है कि पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए अतिरिक्त शर्तें जोड़ी गई हैं, जिससे पंजीकरण में बाधाएँ पैदा हो सकती हैं।

पश्चिम बंगाल का ज़िक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि पहले से सूची में शामिल मतदाताओं के खिलाफ 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि राज्य में कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुईं — जिनमें 22.21 लाख नाम जोड़ने और 16.10 लाख नाम हटाने से संबंधित हैं।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

सुरजेवाला ने कई ठोस माँगें रखीं — कर्नाटक समेत सभी राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए; जून 2025 से अब तक हटाए गए मतदाताओं की व्यापक समीक्षा हो; विभिन्न अधिकारियों की वैधानिक शक्तियाँ बहाल की जाएँ; और निर्वाचन नामावली डेटाबेस का स्वतंत्र आईटी एवं साइबर फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।

इसके अलावा, उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, आरोप साबित होने पर आपराधिक कार्रवाई करने और एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की माँग की। उनका यह भी कहना था कि बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों की वैधता की समीक्षा की जानी चाहिए।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ जारी हैं और मतदाता सूची की शुद्धता पर बहस पहले से तेज़ है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही पश्चिम बंगाल के मामले में चुनाव आयोग से जानकारी ले चुका है, जिससे इस मामले की न्यायिक निगरानी की संभावना बनी हुई है। कांग्रेस के आरोपों पर BJP और चुनाव आयोग की आगामी प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्यापित तथ्य नहीं, और इस फर्क को नज़रअंदाज़ करना पत्रकारिता की चूक होगी। असली सवाल यह है कि क्या एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता और अपील की पर्याप्त व्यवस्था है — सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पश्चिम बंगाल के आँकड़े बताते हैं कि मामला सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग का 'सर्वसम्मति' का दावा और आयुक्तों की कथित आपत्तियों के बीच की खाई को स्वतंत्र जाँच के बिना नहीं भरा जा सकता। चुनावी लोकतंत्र में मतदाता सूची की शुद्धता और उसकी प्रक्रिया की जवाबदेही — दोनों समान रूप से ज़रूरी हैं।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (SIR) अभियान क्या है और इसका विवाद क्यों है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची की सफाई के लिए चलाया जाने वाला अभियान है। कांग्रेस का आरोप है कि जून 2025 से इस अभियान के तहत 19 राज्यों में करीब 13 करोड़ पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिसे पार्टी लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रही है।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग से क्या-क्या माँगें रखी हैं?
कांग्रेस ने एसआईआर प्रक्रिया तत्काल रोकने, हटाए गए मतदाताओं की व्यापक समीक्षा, CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, निर्वाचन नामावली डेटाबेस का साइबर फॉरेंसिक ऑडिट कराने और एसआईआर पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की माँग की है।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने आयोग के भीतर मतभेद की बात से इनकार किया है और स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग ने कांग्रेस के अन्य आरोपों पर सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया अभी तक नहीं दी है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता अपीलों की स्थिति क्या है?
चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि पश्चिम बंगाल में कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुईं — जिनमें 22.21 लाख नाम जोड़ने और 16.10 लाख नाम हटाने से संबंधित हैं। कांग्रेस ने इसी आधार पर वहाँ के हालिया चुनावों की वैधता की समीक्षा की माँग की है।
क्या बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं?
कांग्रेस ने माँग की है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों की वैधता की समीक्षा हो, क्योंकि उनके अनुसार मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हुई हैं। हालाँकि यह एक राजनीतिक माँग है और इस पर किसी न्यायिक या संवैधानिक प्रक्रिया का निर्णय अभी नहीं हुआ है।
राष्ट्र प्रेस
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