एसआईआर विवाद: कांग्रेस का आरोप — 19 राज्यों में 13 करोड़ वोटर हटाए, CEC हटाने की मांग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने 24 सितंबर 2026 को बेंगलुरु में एक प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के ज़रिए 19 राज्यों में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर चुनाव आयोग (ECI) को 'हाइजैक' करने का गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की।
एसआईआर अभियान पर आरोप
सुरजेवाला के अनुसार, जून 2025 से चुनाव आयोग ने 19 राज्यों में एसआईआर अभियान चलाया, जिसके तहत कथित तौर पर करीब 13 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उनका दावा है कि इनमें अकेले कर्नाटक के 1.43 करोड़ मतदाता शामिल हैं।
कांग्रेस नेता ने इसे अभूतपूर्व कार्रवाई बताते हुए कहा कि इस प्रक्रिया के ज़रिए पात्र मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'मतदान का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है — पात्र नागरिकों के नाम सूची से हटाना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित करना है।'
चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का दावा
सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली CEC ज्ञानेश कुमार के हाथों में केंद्रीकृत हो गई है। उनका कहना है कि अन्य दो चुनाव आयुक्तों — सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी — ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े फैसलों और संचार पर आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं।
हालाँकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं और आयोग के भीतर किसी प्रकार का मतभेद नहीं है।
फॉर्म-6 और पश्चिम बंगाल पर सवाल
सुरजेवाला ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित बदलावों की भी आलोचना की। उनका कहना है कि पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए अतिरिक्त शर्तें जोड़ी गई हैं, जिससे पंजीकरण में बाधाएँ पैदा हो सकती हैं।
पश्चिम बंगाल का ज़िक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि पहले से सूची में शामिल मतदाताओं के खिलाफ 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं। गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि राज्य में कुल 38.31 लाख अपीलें दाखिल हुईं — जिनमें 22.21 लाख नाम जोड़ने और 16.10 लाख नाम हटाने से संबंधित हैं।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
सुरजेवाला ने कई ठोस माँगें रखीं — कर्नाटक समेत सभी राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए; जून 2025 से अब तक हटाए गए मतदाताओं की व्यापक समीक्षा हो; विभिन्न अधिकारियों की वैधानिक शक्तियाँ बहाल की जाएँ; और निर्वाचन नामावली डेटाबेस का स्वतंत्र आईटी एवं साइबर फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
इसके अलावा, उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, आरोप साबित होने पर आपराधिक कार्रवाई करने और एसआईआर प्रक्रिया पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की माँग की। उनका यह भी कहना था कि बिहार और पश्चिम बंगाल में हुए चुनावों की वैधता की समीक्षा की जानी चाहिए।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ जारी हैं और मतदाता सूची की शुद्धता पर बहस पहले से तेज़ है। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही पश्चिम बंगाल के मामले में चुनाव आयोग से जानकारी ले चुका है, जिससे इस मामले की न्यायिक निगरानी की संभावना बनी हुई है। कांग्रेस के आरोपों पर BJP और चुनाव आयोग की आगामी प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।