16 अक्टूबर 2026
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यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा का सरकार पर हमला: '13.50 करोड़ नाम काटे, लोकतंत्र खतरे में'

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यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा का सरकार पर हमला: '13.50 करोड़ नाम काटे, लोकतंत्र खतरे में'

सारांश

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने राजनाथ सिंह के आरोपों का जवाब देते हुए SIR प्रक्रिया में 13.50 करोड़ नाम काटे जाने को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँगा। उनका तीखा सवाल — 'अगर मताधिकार ही नहीं रहेगा तो लोकतंत्र कैसे बचेगा?'

मुख्य बातें

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने 16 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के तहत 13.50 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से काटे गए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उनके दो वरिष्ठ सहयोगियों द्वारा लगाए गए आरोपों का हवाला देते हुए उनके इस्तीफे की माँग की।
मिश्रा ने कहा कि चुनाव आयोग (ECI) जैसी संवैधानिक संस्था ने अपनी विश्वसनीयता खोई है और इसकी जिम्मेदारी सरकार पर है।
इंडिया गठबंधन को मज़बूत बताते हुए आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में जनादेश का दावा किया।

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने 16 अक्टूबर 2026 को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला, यह कहते हुए कि जब 13.50 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हों, तो लोकतंत्र की रक्षा की बात बेमानी हो जाती है। उनकी यह प्रतिक्रिया रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर सत्ता परिवर्तन की साजिश करने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने और युवाओं को अराजकता की ओर धकेलने के आरोप लगाए थे।

मुख्य आरोप और बयान

मिश्रा ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी (BJP) लोकतंत्र और संविधान बचाने में पूरी तरह से विफल रही है।' उन्होंने दिल्ली में जारी आंदोलन का हवाला देते हुए इसे सरकार की विफलता का स्पष्ट संकेत बताया और कहा कि BJP इसी कारण 'घबराई हुई' है।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मसले को सीधे उठाया और कहा, 'ज्ञानेश कुमार पर आरोप उन्हीं के दो वरिष्ठ सहयोगियों की ओर से लगाए गए थे। सरकार को जनता के बीच विश्वास पैदा करने के बजाय आरोप लगाने से बचना चाहिए। सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को पद से इस्तीफा देना चाहिए और देश की जनता से माफी माँगनी चाहिए।'

चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव आयोग (ECI) की साख पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था, 'जब चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था ने अपनी विश्वसनीयता खोई है, तो उसकी जिम्मेदारी किस पर है? ज्ञानेश कुमार और उनके दो सहयोगियों की नियुक्ति किसने की?' उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस नियुक्ति प्रक्रिया पर पहले ही आपत्ति जताई थी, फिर भी सरकार ने अपना निर्णय नहीं बदला।

ऐतिहासिक संदर्भ और लोकतंत्र की दलील

मिश्रा ने अपनी बात को व्यापक संदर्भ में रखते हुए कहा कि दुनिया भर में जब सरकारें जनता की आवाज़ सुनना बंद कर देती हैं और केवल अपना एजेंडा चलाती हैं, तभी अराजकता की स्थिति बनती है। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा, 'उस समय युवा, महिलाएँ, किसान, मज़दूर और पढ़े-लिखे लोग सब एकजुट हुए थे। आज पूरे देश में अविश्वास का माहौल है।'

उनका केंद्रीय सवाल था: 'अगर मताधिकार ही नहीं रहेगा तो लोकतंत्र कैसे बचेगा?'

इंडिया गठबंधन और उत्तर प्रदेश चुनाव

आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के संदर्भ में मिश्रा ने कहा कि इंडिया गठबंधन पूरी तरह मज़बूत है। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने BJP को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी। उनका दावा था, 'देश की जनता जनादेश देकर कांग्रेस पर अपना विश्वास जताएगी।'

आगे क्या

यह बयानबाज़ी ऐसे समय में आई है जब SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की समीक्षा और चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ है। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के दल इस मुद्दे को आने वाले चुनावों में प्रमुखता से उठाने की रणनीति बना रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह किसी भी लोकतंत्र में गंभीर प्रश्न उठाता है — और इसी लिए सरकार की चुप्पी और पलटवार की रणनीति उल्टी पड़ सकती है। गौरतलब है कि ज्ञानेश कुमार विवाद पहले से ही राष्ट्रीय राजनीति में तूफ़ान खड़ा कर चुका है, और इस पर राहुल गांधी की पहले से जताई आपत्ति को नज़रअंदाज़ करने का ज़िक्र विपक्ष को नैतिक बढ़त देता है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार इन आरोपों का पारदर्शी जवाब देगी या आरोप-प्रत्यारोप के इस चक्र को और गहरा करेगी।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आराधना मिश्रा ने SIR प्रक्रिया पर क्या आरोप लगाए?
आराधना मिश्रा ने आरोप लगाया कि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के तहत 13.50 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है। उनका कहना था कि जब मताधिकार ही सुरक्षित न हो तो लोकतंत्र की बात बेमानी हो जाती है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग क्यों की जा रही है?
मिश्रा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप खुद उन्हीं के दो वरिष्ठ सहयोगियों ने लगाए थे, जिससे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पर पहले ही आपत्ति जताई थी, फिर भी सरकार ने कदम नहीं उठाया।
राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर क्या आरोप लगाए थे?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर सत्ता परिवर्तन की साजिश करने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर करने और युवाओं को अराजकता की ओर धकेलने के आरोप लगाए थे। आराधना मिश्रा की प्रतिक्रिया इन्हीं आरोपों के जवाब में आई।
उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन की स्थिति क्या है?
आराधना मिश्रा ने दावा किया कि इंडिया गठबंधन पूरी तरह मज़बूत है। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का उदाहरण दिया जिसमें उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने BJP को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का मामला कितना गंभीर है?
कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था ने मतदाता सूची प्रबंधन और आयुक्त नियुक्ति विवाद के कारण अपनी विश्वसनीयता खोई है। इस मामले में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी जारी है और यह मुद्दा आगामी चुनावों में प्रमुख भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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