यूपी में बेटियाँ असुरक्षित: कांग्रेस की आराधना मिश्रा का सरकार पर तीखा हमला, एक सप्ताह में 11 जिलों की घटनाएँ गिनाईं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने 4 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में बेटियाँ दिनों-दिन असुरक्षित होती जा रही हैं। उन्होंने पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के 11 से अधिक जिलों में सामने आए दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म और नाबालिगों के उत्पीड़न की घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
आराधना मिश्रा ने कहा, 'घर से स्कूल निकली बेटियाँ लौटकर घर नहीं आतीं, दुष्कर्म का शिकार हो जाती हैं और फिर मौत के घाट उतार दी जाती हैं। अगर बच गईं तो गर्भवती हो जाती हैं और प्रसव पीड़ा से नाबालिग और उसके बच्चे की मौत हो जाती है।' उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में सरकार की विफलता की ऐसी दर्दनाक घटनाएँ पूरे प्रदेश में सामने आती रही हैं।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राजनीतिक सवाल भी उठाया — 'जिसने उत्तर प्रदेश का यह हाल किया, उसे और पाँच साल क्यों दिए जाएँ?' — इसे उन्होंने जनता की आवाज़ बताया।
एक सप्ताह की घटनाओं की सूची
कांग्रेस ने जिन घटनाओं का हवाला दिया, वे इस प्रकार हैं: बुलंदशहर में 16 वर्षीय छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप; बस्ती में 15 वर्षीय छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म और गन्ने के खेत में ले जाकर दुष्कर्म का आरोप; बांदा में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म; सोनभद्र में 14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की प्रसव के दौरान मौत; कौशांबी में किशोरी से दुष्कर्म और गर्भवती होने की घटना; ललितपुर में पाँच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म; तथा मुजफ्फरनगर में 16 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म का आरोप।
इसके अतिरिक्त पार्टी ने गोरखपुर में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म, मेरठ में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म और वीडियो वायरल करने की धमकी, प्रयागराज में 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म, तथा लखनऊ के निगोहां क्षेत्र में 15 वर्षीय किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म के आरोपों का भी उल्लेख किया।
आँकड़ों के आधार पर सवाल
आराधना मिश्रा ने उपलब्ध आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में एक वर्ष में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 66,381 मामले दर्ज हुए, यानी औसतन 182 मामले प्रतिदिन। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में दुष्कर्म के 3,516 मामले दर्ज हुए, जो प्रतिदिन औसतन 9.6 मामले हैं। हत्या के 3,206 मामले दर्ज हुए, अर्थात प्रतिदिन करीब 8.8 हत्याएँ। पार्टी के अनुसार, इसी अवधि में एसिड अटैक के 31 मामले भी दर्ज हुए।
उन्होंने 30 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर की गई कड़ी टिप्पणी का भी संदर्भ दिया और कहा कि शीर्ष अदालत की टिप्पणी के बावजूद प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली में कोई प्रभावी बदलाव नज़र नहीं आ रहा।
सरकार पर जवाबदेही की माँग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सवाल केवल अलग-अलग घटनाओं का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का है। उन्होंने पूछा कि जब स्कूल से घर लौटने वाली बच्चियाँ, पाँच और दस साल की बच्चियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो सरकार हाथ पर हाथ रखकर क्यों बैठी है।
उन्होंने कहा, 'जो सत्ता बेटियों को सुरक्षित स्कूल, सड़क और घर नहीं दे सकती, उसे जनता जवाब देगी।' आराधना मिश्रा ने यह भी कहा कि 'बेटी बचाओ' केवल नारा नहीं होना चाहिए, बल्कि सरकार की प्राथमिकता और ज़मीन पर दिखाई देने वाली सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ चर्चा में हैं और महिला सुरक्षा एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है।