4 अक्टूबर 2026
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यूपी में बेटियाँ असुरक्षित: कांग्रेस की आराधना मिश्रा का सरकार पर तीखा हमला, एक सप्ताह में 11 जिलों की घटनाएँ गिनाईं

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यूपी में बेटियाँ असुरक्षित: कांग्रेस की आराधना मिश्रा का सरकार पर तीखा हमला, एक सप्ताह में 11 जिलों की घटनाएँ गिनाईं

सारांश

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने 11 जिलों की नाबालिग दुष्कर्म घटनाओं और 66,381 सालाना महिला अपराध के आँकड़ों के साथ सरकार पर सीधा हमला बोला — और सवाल किया कि जिसने यूपी का यह हाल किया, उसे और पाँच साल क्यों दिए जाएँ।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने 4 अक्टूबर 2026 को प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला बोला।
पार्टी ने एक सप्ताह में बुलंदशहर, बस्ती, बांदा, सोनभद्र, कौशांबी, ललितपुर, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज और लखनऊ सहित 11 जिलों की दुष्कर्म घटनाएँ गिनाईं।
आँकड़ों के अनुसार यूपी में एक वर्ष में महिलाओं के खिलाफ 66,381 मामले — यानी 182 मामले प्रतिदिन — दर्ज हुए।
दुष्कर्म के 3,516 मामले (प्रतिदिन औसतन 9.6 ), हत्या के 3,206 मामले और एसिड अटैक के 31 मामले भी उद्धृत किए गए।
30 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की पीठ द्वारा यूपी पुलिस की कार्यशैली पर की गई कड़ी टिप्पणी का भी हवाला दिया गया।
कांग्रेस ने माँग की कि 'बेटी बचाओ' नारा नहीं बल्कि ज़मीनी सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाए।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने 4 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में बेटियाँ दिनों-दिन असुरक्षित होती जा रही हैं। उन्होंने पिछले एक सप्ताह में प्रदेश के 11 से अधिक जिलों में सामने आए दुष्कर्म, सामूहिक दुष्कर्म और नाबालिगों के उत्पीड़न की घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

आराधना मिश्रा ने कहा, 'घर से स्कूल निकली बेटियाँ लौटकर घर नहीं आतीं, दुष्कर्म का शिकार हो जाती हैं और फिर मौत के घाट उतार दी जाती हैं। अगर बच गईं तो गर्भवती हो जाती हैं और प्रसव पीड़ा से नाबालिग और उसके बच्चे की मौत हो जाती है।' उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दस वर्षों में सरकार की विफलता की ऐसी दर्दनाक घटनाएँ पूरे प्रदेश में सामने आती रही हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राजनीतिक सवाल भी उठाया — 'जिसने उत्तर प्रदेश का यह हाल किया, उसे और पाँच साल क्यों दिए जाएँ?' — इसे उन्होंने जनता की आवाज़ बताया।

एक सप्ताह की घटनाओं की सूची

कांग्रेस ने जिन घटनाओं का हवाला दिया, वे इस प्रकार हैं: बुलंदशहर में 16 वर्षीय छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का आरोप; बस्ती में 15 वर्षीय छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म और गन्ने के खेत में ले जाकर दुष्कर्म का आरोप; बांदा में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म; सोनभद्र में 14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की प्रसव के दौरान मौत; कौशांबी में किशोरी से दुष्कर्म और गर्भवती होने की घटना; ललितपुर में पाँच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म; तथा मुजफ्फरनगर में 16 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म का आरोप।

इसके अतिरिक्त पार्टी ने गोरखपुर में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म, मेरठ में नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म और वीडियो वायरल करने की धमकी, प्रयागराज में 10 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म, तथा लखनऊ के निगोहां क्षेत्र में 15 वर्षीय किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म के आरोपों का भी उल्लेख किया।

आँकड़ों के आधार पर सवाल

आराधना मिश्रा ने उपलब्ध आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में एक वर्ष में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 66,381 मामले दर्ज हुए, यानी औसतन 182 मामले प्रतिदिन। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में दुष्कर्म के 3,516 मामले दर्ज हुए, जो प्रतिदिन औसतन 9.6 मामले हैं। हत्या के 3,206 मामले दर्ज हुए, अर्थात प्रतिदिन करीब 8.8 हत्याएँ। पार्टी के अनुसार, इसी अवधि में एसिड अटैक के 31 मामले भी दर्ज हुए।

उन्होंने 30 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ द्वारा उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर की गई कड़ी टिप्पणी का भी संदर्भ दिया और कहा कि शीर्ष अदालत की टिप्पणी के बावजूद प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली में कोई प्रभावी बदलाव नज़र नहीं आ रहा।

सरकार पर जवाबदेही की माँग

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सवाल केवल अलग-अलग घटनाओं का नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का है। उन्होंने पूछा कि जब स्कूल से घर लौटने वाली बच्चियाँ, पाँच और दस साल की बच्चियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो सरकार हाथ पर हाथ रखकर क्यों बैठी है।

उन्होंने कहा, 'जो सत्ता बेटियों को सुरक्षित स्कूल, सड़क और घर नहीं दे सकती, उसे जनता जवाब देगी।' आराधना मिश्रा ने यह भी कहा कि 'बेटी बचाओ' केवल नारा नहीं होना चाहिए, बल्कि सरकार की प्राथमिकता और ज़मीन पर दिखाई देने वाली सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ चर्चा में हैं और महिला सुरक्षा एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके उद्धृत आँकड़े — 66,381 सालाना महिला अपराध, 9.6 दैनिक दुष्कर्म — उस व्यापक सवाल की ओर इशारा करते हैं जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है: क्या एफआईआर दर्ज होने के बाद जाँच, अभियोजन और सज़ा की दर उसी अनुपात में है? सर्वोच्च न्यायालय की 30 सितंबर की टिप्पणी केवल विपक्षी हमले का मोहरा नहीं, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्र चेतावनी है। असली जवाबदेही तब बनेगी जब अपराध दर्ज होने से लेकर दोषसिद्धि तक की पूरी श्रृंखला सार्वजनिक हो — केवल एफआईआर की गिनती नहीं।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि यूपी में बेटियाँ लगातार असुरक्षित हो रही हैं और सरकार कानून-व्यवस्था सुधारने में विफल रही है। पार्टी ने एक सप्ताह में 11 जिलों की दुष्कर्म और नाबालिग उत्पीड़न की घटनाओं को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया।
आराधना मिश्रा ने कौन-से आँकड़े पेश किए?
उन्होंने उपलब्ध आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि यूपी में एक वर्ष में महिलाओं के खिलाफ 66,381 मामले (182 प्रतिदिन), दुष्कर्म के 3,516 मामले (9.6 प्रतिदिन), हत्या के 3,206 मामले और एसिड अटैक के 31 मामले दर्ज हुए।
सर्वोच्च न्यायालय ने यूपी पुलिस पर क्या टिप्पणी की थी?
30 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की एक पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की थी। आराधना मिश्रा ने इसका हवाला देते हुए कहा कि इसके बावजूद सरकार की प्रणाली में कोई प्रभावी बदलाव नज़र नहीं आ रहा।
कांग्रेस ने किन जिलों की घटनाओं का उल्लेख किया?
कांग्रेस ने बुलंदशहर, बस्ती, बांदा, सोनभद्र, कौशांबी, ललितपुर, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज और लखनऊ के निगोहां क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह में सामने आई घटनाओं का हवाला दिया। इनमें 5 से 16 वर्ष आयु की नाबालिगों से जुड़े आरोप शामिल हैं।
इस बयान का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की चर्चा शुरू हो चुकी है और महिला सुरक्षा एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बन रहा है। 'जिसने यूपी का यह हाल किया, उसे पाँच साल और क्यों दिए जाएँ' — यह सवाल सीधे मतदाताओं को संबोधित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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