4 नवंबर 2026
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यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा का दावा: भाजपा 'दिल्ली चलो' रैली से घबराई, इसलिए सड़कों पर उतरी

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यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा का दावा: भाजपा 'दिल्ली चलो' रैली से घबराई, इसलिए सड़कों पर उतरी

सारांश

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' रैली को इंडिया गुट की दिल्ली रैली से उपजी 'हताशा' करार दिया। साथ ही प्रियंका गांधी की अगुवाई में यूपी चुनाव की तैयारियाँ भी शुरू — सपा से सीट बंटवारे की बातचीत की धुरी।

मुख्य बातें

यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना 'मोना' मिश्रा ने 4 नवंबर 2026 को दावा किया कि भाजपा की रैली इंडिया गुट की रामलीला मैदान रैली से पैदा हुई हताशा की प्रतिक्रिया है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली की।
इंडिया गुट सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन कर रहा है।
प्रियंका गांधी वाड्रा की अध्यक्षता में दिल्ली बैठक में यूपी चुनाव समितियों पर चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार प्रियंका गांधी अखिलेश यादव के साथ सीट बंटवारे की बातचीत में अहम भूमिका निभाएंगी।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना 'मोना' मिश्रा ने 4 नवंबर 2026 को लखनऊ में कहा कि यह संभवतः पहली बार है जब कोई सत्ताधारी दल विपक्ष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरा है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) इंडिया गुट की दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई रैली से बौखलाई हुई है और यही उसकी हताशा की असली वजह है।

मुख्य घटनाक्रम

मिश्रा की यह टिप्पणी भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर में आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली के तुरंत बाद आई। भाजपा यह रैली इंडिया गुट के उन विरोध-प्रदर्शनों के जवाब में आयोजित कर रही है, जो कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे हैं।

आराधना मिश्रा ने कहा, 'मुझे लगता है कि यह पहली बार है जब सत्ताधारी पार्टी विपक्ष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरी है। यह कहीं न कहीं उनकी हताशा को भी दर्शाता है — दिल्ली के रामलीला मैदान में ऐतिहासिक रैली के बाद भाजपा के भीतर पैदा हुई अशांति को।'

प्रियंका गांधी की अगुवाई में यूपी चुनाव की तैयारी

इसी बीच मिश्रा ने बताया कि आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की अध्यक्षता में दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि बैठक में घोषणापत्र समिति, प्रबंधन समिति, समन्वय समिति और मीडिया समिति के गठन पर विस्तृत चर्चा हुई।

मिश्रा के अनुसार, 'यह एक बहुत ही सकारात्मक और ऊर्जावान शुरुआत रही। पार्टी ने पहले ही तैयारियां शुरू कर दी हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस केवल चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि जीतने और सरकार बनाने के लिए मैदान में उतरेगी।

सीट बंटवारे में प्रियंका की भूमिका

पार्टी के सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, प्रियंका गांधी वाड्रा समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ सीट बंटवारे की बातचीत में अहम भूमिका निभाएंगी। गौरतलब है कि इंडिया गुट की उत्तर प्रदेश रणनीति में सपा-कांग्रेस गठबंधन की धुरी पर काफी कुछ टिका है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब इंडिया गुट और भाजपा के बीच चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर तनाव अपने चरम पर है। इंडिया गुट के घटक दलों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी 'दिल्ली चलो' आंदोलन छेड़ा हुआ है, जिसमें कथित चुनावी पक्षपात के आरोप लगाए जा रहे हैं। भाजपा ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बताते हुए पलटवार के रूप में 'लोकतंत्र बचाओ' रैलियों की श्रृंखला शुरू की है।

आलोचकों का कहना है कि दोनों दलों की 'लोकतंत्र बचाओ' शब्दावली एक जैसी है, परंतु दिशाएं परस्पर विरोधी हैं — जो आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव की सियासी तपिश का संकेत है।

आगे क्या

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की संभावित तारीखों को देखते हुए, इंडिया गुट और भाजपा दोनों की जमीनी तैयारियाँ तेज हो रही हैं। प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव के बीच सीट बंटवारे की बातचीत का नतीजा इंडिया गुट की उत्तर प्रदेश रणनीति की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक असुविधाजनक सच्चाई भी है — भाजपा का विपक्षी शैली में सड़क पर उतरना उसकी परंपरागत 'सरकार है तो काम करेंगे' की छवि से हटकर है। दूसरी तरफ, इंडिया गुट का सीईसी-विरोध अभियान भी तब तक प्रभावी नहीं होगा जब तक वह संस्थागत सुधार की ठोस माँग के साथ नहीं आता। उत्तर प्रदेश में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे की बातचीत का इतिहास उलझनों भरा रहा है — 2022 में गठबंधन बना, लेकिन परिणाम निराशाजनक रहे। असली परीक्षा यह है कि प्रियंका गांधी की भूमिका इस बार कोई नई जमीन तोड़ पाती है या यह भी चुनावी मौसम की एक और 'सकारात्मक शुरुआत' बनकर रह जाती है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आराधना मिश्रा ने भाजपा की रैली को लेकर क्या कहा?
यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने कहा कि यह संभवतः पहली बार है जब कोई सत्ताधारी दल विपक्ष के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने सड़कों पर उतरा है। उनके अनुसार यह भाजपा की इंडिया गुट की दिल्ली रैली से उपजी हताशा का प्रमाण है।
भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ' रैली किसलिए आयोजित की गई?
भाजपा ने यह रैली इंडिया गुट के उन प्रदर्शनों के जवाब में आयोजित की जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर हो रहे हैं। गोरखपुर में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस रैली की अगुवाई की।
इंडिया गुट की दिल्ली रैली का क्या महत्व था?
इंडिया गुट ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 'दिल्ली चलो' रैली की, जिसे विपक्षी नेताओं ने ऐतिहासिक बताया। इस रैली का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दबाव बनाना और कथित चुनावी पक्षपात का विरोध करना था।
प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश चुनाव में क्या भूमिका निभाएंगी?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के साथ सीट बंटवारे की बातचीत में अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने पहले ही दिल्ली में एक बैठक की अध्यक्षता की जिसमें चुनाव समितियों के गठन पर चर्चा हुई।
यूपी कांग्रेस ने चुनाव की तैयारी के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं?
प्रियंका गांधी वाड्रा की अध्यक्षता में दिल्ली में बैठक हुई जिसमें घोषणापत्र समिति, प्रबंधन समिति, समन्वय समिति और मीडिया समिति जैसी चुनावी संरचनाओं पर चर्चा हुई। आराधना मिश्रा ने इसे 'सकारात्मक और ऊर्जावान शुरुआत' बताया।
राष्ट्र प्रेस
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