यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा का ऐलान: 'जीत जरूरी है, सीट नहीं', 2027 में सरकार बनाने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस की नवनियुक्त अध्यक्ष आराधना मिश्रा 'मोना' ने पदभार संभालने के बाद 5 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पार्टी की रणनीति स्पष्ट करते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव 2027 में जीत प्राथमिकता है, सीटों की संख्या नहीं। उन्होंने साफ किया कि इंडिया गठबंधन के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को यूपी की सत्ता से बाहर करना उनका सर्वोच्च लक्ष्य है।
विरासत और नई जिम्मेदारी
आराधना मिश्रा ने अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा, 'मेरी चार पीढ़ियाँ कांग्रेस पार्टी में रही हैं, जिनमें दो पीढ़ियाँ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रही हैं। मेरे पिता पिछले 45-46 सालों से कांग्रेस और देश की सेवा में लगे हैं। मुझे खुद भी 25 साल हो गए हैं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि इस विरासत को आगे बढ़ाना और संगठन को मज़बूत करना उनकी पहली प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी के साथ चुनौतियाँ भी आती हैं, लेकिन वे चुनौतियों से कभी नहीं डरीं और इस बार भी उन्हें स्वीकार कर परास्त करेंगी।
इंडिया गठबंधन और सीट बंटवारे पर रुख
समाजवादी पार्टी (SP) के साथ गठबंधन और सीट-बंटवारे पर आराधना मिश्रा ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय नेतृत्व का है, न कि प्रदेश स्तर का। उन्होंने स्पष्ट किया कि इंडिया गठबंधन का गठन राष्ट्रीय स्तर पर हुआ था और गठबंधन की शर्तें, समय और तौर-तरीके वरिष्ठ राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा।
अखिलेश यादव के 'जीत जरूरी है' वाले बयान से सहमति जताते हुए उन्होंने कहा, 'हम भी यही कह रहे हैं — जीत जरूरी है, सीट नहीं। जहाँ SP के प्रत्याशी होंगे, कांग्रेस पूरी ताकत से गठबंधन धर्म निभाएगी, और जहाँ कांग्रेस के प्रत्याशी होंगे, वहाँ गठबंधन के साथी पूरी ताकत लगाएंगे।'
2024 का हवाला, 2027 का भरोसा
उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि BJP का 'अहंकार का रथ' कहीं रुका था तो वह उत्तर प्रदेश की धरती पर रुका था। उनके अनुसार, 'आज मोदी सरकार बैसाखी पर है — एक तरफ चंद्रबाबू नायडू हैं, दूसरी तरफ नीतीश कुमार हैं। जिस दिन यह बैसाखी हट जाएगी, सरकार भी गिर जाएगी।' उन्होंने भरोसा जताया कि 2027 में 2024 से भी बेहतर परिणाम आएंगे।
ओवैसी और वोट-बैंक की राजनीति पर तीखी प्रतिक्रिया
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के इस बयान पर कि यूपी में किसी पार्टी ने मुसलमानों को आगे नहीं बढ़ाया, आराधना मिश्रा ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'यह वोट बैंक की राजनीति है। कांग्रेस के लिए ऐसी राजनीति न थी, न है और न होगी।' उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन से अब तक कांग्रेस ने हर जाति, धर्म और समुदाय को साथ लेकर चला है — और इसका नुकसान भी उठाया, लेकिन सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब 'संकीर्ण विचारधारा की राजनीति का दौर खत्म हो चुका है — चाहे ओवैसी हों या BJP।' 2027 का चुनाव रोजगार, महंगाई, किसानों की उन्नति और संविधान की रक्षा के मुद्दों पर लड़ा जाएगा।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस की रणनीतिक बैठक पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक पार्टी की बैठक नहीं, बल्कि देश की आवाज है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर (SIR) के नाम पर मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और 13 करोड़ से अधिक नाम मतदाता सूची से काटे जा चुके हैं।
उनका कहना था कि यह संवैधानिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की अगुवाई में पूरा देश — और खासकर उत्तर प्रदेश — एकजुट होकर मतों की, संविधान की और लोकतंत्र की रक्षा करेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में गठबंधन की रूपरेखा अभी तय होनी बाकी है और कांग्रेस अपनी जमीन फिर से मजबूत करने की कोशिश में है।