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क्या पराक्रम दिवस पर उपराष्ट्रपति ओडिशा पहुंचे और स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया?

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क्या पराक्रम दिवस पर उपराष्ट्रपति ओडिशा पहुंचे और स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया?

सारांश

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की ओडिशा यात्रा पर पराक्रम दिवस समारोह ने स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रेरक बातें आज भी भारतीयों में साहस भरती हैं। जानिए इस खास मौके पर क्या कुछ हुआ और नेताजी के योगदान का महत्व क्या है।

मुख्य बातें

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था।
उपराष्ट्रपति ने स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया।
पराक्रम दिवस समारोह ने भारतीयों में साहस और संकल्प की प्रेरणा प्रदान की।
विकसित भारत@2047 के लिए सामूहिक संकल्प लेने का आग्रह किया गया।
कटक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जन्मस्थान संग्रहालय का उद्घाटन किया गया।

भुवनेश्वर, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को ओडिशा की अपनी पहली यात्रा के दौरान कटक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मस्थान पर पराक्रम दिवस समारोह में भाग लिया। उन्होंने कहा कि नेताजी की पुकार आज भी भारतीयों में साहस और संकल्प की प्रेरणा देती है।

भुवनेश्वर के बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कम्भमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और अन्य गण्यमान्य व्यक्तियों ने उनका स्वागत किया। आगमन पर उपराष्ट्रपति को गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मस्थान पर पराक्रम दिवस समारोह में इंडियन नेशनल आर्मी का मार्चिंग गीत "कदम कदम बढ़ाए जा" की जोश भरी धुन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि नेताजी की पुकार आज भी भारतीयों में साहस और संकल्प की प्रेरणा देती है।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नागरिकों से नेताजी के एक मजबूत, आत्मनिर्भर और शक्तिशाली राष्ट्र के विजन से प्रेरणा लेकर, विकसित भारत@2047 की दिशा में काम करने का सामूहिक संकल्प लेने का आग्रह किया।

इसके बाद उपराष्ट्रपति ने कटक में पराक्रम दिवस समारोह में स्वतंत्रता सेनानी मयाधर मल्लिक और विंग कमांडर बीएस सिंह देव (रिटायर्ड) को सम्मानित किया और आईएनए के पूर्व सैनिकों के परिवार वालों को भी सम्मानित किया।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि देश स्वतंत्रता सेनानियों और हमारे बहादुर सैनिकों के साहस, बलिदान और निस्वार्थ सेवा के लिए हमेशा उनका ऋणी रहेगा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक असाधारण व्यक्तित्व थे। ओडिशा समृद्ध कला, संस्कृति और इतिहास की भूमि है। नेताजी जैसे नायकों की वजह से ही भारत आजादी की सांस ले रहा है।

उसके बाद उपराष्ट्रपति ने कटक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जन्मस्थान संग्रहालय में आईएनए पोस्टल स्टैम्प गैलरी, नेताजी संस्कृति भवन और संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि ऐसी पहलें युवा पीढ़ियों को नेताजी के जीवन, बलिदानों और स्थायी विरासत के बारे में जानने के लिए प्रेरित करेंगी।

इस कार्यक्रम में क्यूरेटेड प्रदर्शनियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल थीं, जिनमें एक मजबूत, एकजुट और आत्मनिर्भर भारत के लिए नेताजी के विजन को दिखाया गया।

आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक में हुआ था।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह न केवल उनके प्रति हमारी श्रद्धांजलि है, बल्कि यह वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पराक्रम दिवस कब मनाया जाता है?
पराक्रम दिवस हर साल 23 जनवरी को मनाया जाता है, जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती है।
उपराष्ट्रपति ने किस कार्यक्रम में भाग लिया?
उपराष्ट्रपति ने ओडिशा के कटक में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जन्मस्थान पर पराक्रम दिवस समारोह में भाग लिया।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का क्या महत्व है?
नेताजी सुभाष चंद्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नायकों में से एक थे, जिनका योगदान आज भी प्रेरणादायक है।
राष्ट्र प्रेस
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