क्या मुंबई के विकास में उत्तर भारत के लोगों का योगदान महत्वपूर्ण है: नीरज कुमार?
सारांश
Key Takeaways
- मुंबई के विकास में उत्तर भारत के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है।
- चंपारण अब एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन चुका है।
- राजनीतिक भाषाशुद्धता का महत्व है।
- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विकास में योगदान उल्लेखनीय है।
- जाति के चश्मे से मामलों को नहीं देखना चाहिए।
पटना, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि बृहन्मुंबई नगर पालिका के चुनाव में विरोधी दलों ने जिस प्रकार की भाषा का उपयोग महायुति के लिए किया, उसके लिए उन्हें गंभीर दुष्परिणाम भुगतने होंगे।
नीरज कुमार ने शुक्रवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि मुंबई के विकास में उत्तर भारत के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान है। निसंदेह, इस योगदान को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। आज की तारीख में उनके योगदान के कारण ही मुंबई में आर्थिक विकास की गति तेज हुई है, लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि जिस प्रकार की भाषा का उपयोग विरोधी दलों ने महायुति के लिए किया, वह दुखद है।
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के शासनकाल में महात्मा गांधी का चंपारण अब पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। यदि आज इसकी तुलना स्विट्जरलैंड से की जाए तो कहना गलत नहीं होगा। कश्मीरी शॉल के लिए अब आपको जम्मू-कश्मीर जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि अब यह यहीं उपलब्ध है।
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा पर भी प्रतिक्रिया दी। नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री यह समृद्धि यात्रा अपने लिए नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास के लिए निकाल रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होने के लिए इच्छुक हो रहे हैं। हमें पूरा विश्वास है कि आगामी दिनों में इस यात्रा में चौतरफा विकास की बयार बहेगी।
जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चंपारण के विकास में अपनी तरफ से उल्लेखनीय योगदान दिया है। लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में यहां आतंक का दबदबा था। आज की तारीख में यहां की पूरी तस्वीर बदली हुई है। अब हर जगह विकास की बयार बहती हुई नजर आ रही है और इसका श्रेय निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जाता है।
वहीं, बसपा सुप्रीमो मायावती ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इस पर नीरज कुमार ने कहा कि कोई भी अकेले चुनाव लड़ सकता है। इससे किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। समस्या तब उत्पन्न होती है, जब आप हर मुद्दे को जाति के चश्मे से देखने लगते हैं। यदि आप चीजों को संतुलित रूप से संचालित करना चाहते हैं, तो आपके लिए यह जरूरी है कि आप चीजों को जाति के हिसाब से न देखें।
साथ ही, उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मुझे इस बारे में कोई खास जानकारी नहीं है। मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें शंकराचार्य के संबंध में राज्य सरकार को आवेदन देना होगा और आगे चलकर राज्य सरकार उनके दर्शन की व्यवस्था करेगी।